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Category: दुनिया

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हमीस की निरस्त्रीकरण वार्ता में अड़चन, गाज़ा में फिर युद्ध की आशंका

इज़राइल और हमीस के बीच निरस्त्रीकरण वार्ता के स्थायी ठहराव ने मध्य‑पूर्व में फिर से बड़ा संघर्ष शुरू होने की धड़कन बढ़ा दी है। इज़राइल के प्रमुख समाचार संस्थानों की रिपोर्टें इस बात की पुष्टि करती हैं कि सेना अपने ऑपरेशनों को पुनः सक्रिय करने की तैयारी कर रही है, जबकि हमीस ने अपने शस्त्रागार को रखने की दृढ़ मांग दोहराई है।

वार्ता का मूलभूत बिंदु दो‑तरफ़ा असहमति में निहित है: इज़राइल अपने सुरक्षा कारणों से गाज़ा में हमीसी प्रतिरक्षा तंत्र को पूरी तरह निरस्त करने की मांग कर रहा है, वहीं हमीस शरणार्थियों की वापसी, कब्ज़े के तहत भूमि का पुनरुद्धार, और व्यापक गिरफ़्तारी के बदले में ही अपने हथियारों को कम करने को तैयार है। 2025 में इज़राइल‑हमीस के बीच स्थापित स्थगित युद्ध समझौता, अब पच्चीस महीने की शान्ति के बाद ही चुनौति का सामना कर रहा है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के द्विपक्षीय चर्चा में अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। अक्सर ऐसा प्रतीत होता है कि सतही कूटनीति के बाद कक्षाओं में केवल प्रोटोकॉल की पर्ची बंटती है, जबकि असली नीति‑निर्माण को मौन में ही आगे बढ़ाया जाता है। इस विफलता को अक्सर यू.एस. की “स्थिरता” की मौखिक घोषणा और वास्तविक रूप से हथियार और खुफिया सहायता की निरंतरता के बीच अंतर के रूप में आलोचना की जाती है। कोई घटिया व्यंग्यकार कहे तो सुरक्षा परिषद की बैठकें अब “ट्रैफ़िक जाम” बन गई हैं, जहाँ औपचारिक शब्दावली के साथ धुंधले सिग्नल ही मिलते‑जुलते हैं।

भारतीय पाठकों के लिए यह परिदृश्य कई आयाम रखता है। भारत ने गाज़ा में मानवीय सहायता के बड़े पैकेज भेजे हैं, साथ ही शांति प्रक्रिया में “दो-राज्य समाधान” की वकालत जारी रखी है। नई दिल्ली के विदेश मंत्री ने कहा है कि किसी भी बड़े संघर्ष का असर न केवल मध्य‑पूर्व में बल्कि ऊर्जा कीमतों और भारतीय प्रवासी समुदाय पर भी पड़ेगा। भारत‑इज़राइल रणनीतिक साझेदारी, विशेषकर रक्षा‑प्रौद्योगिकी क्षेत्र में, इस तनाव के बढ़ने के साथ साथ सौंपे गए उपकरणों की आपूर्ति और संयुक्त अभ्यासों को प्रभावित कर सकता है।

इज़राइल की अपनी “सुरक्षा‑पहले” नीति और हमीस की “सम्पूर्ण मुक्ति” की मांग के बीच का अंतराल न केवल दो पक्षीय असहमति को परिभाषित करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शक्ति संरचनाओं में मौजूद दोहरी मानदण्ड पर भी सवाल उठाता है। जहाँ पश्चिमी देश अक्सर इज़राइल को “रक्षा” के आस्तीन में सुरक्षित मानते हैं, वहीं समान मानदण्ड हमीस पर नहीं लगाया जाता, भले ही दोनों के पास समान मानवीय दायित्व हों। यह असंगति अंततः वार्ता को फिर से शुरू करने की दुविधा को और गहरा करती है।

वर्तमान में, यदि वार्ता पुनः गति नहीं पकड़ती और इज़राइल अपने सैन्य कैलेंडर को सक्रिय करता है, तो गाज़ा में नागरिक जनसंख्या पर फिर से विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा—एक स्थिति जिसमें न केवल प्रभावित पक्ष, बल्कि विश्व स्तर पर विश्वास और शांति‑निर्माण के प्रयास भी धूमिल हो सकते हैं।

Published: May 7, 2026