सूडान ने ईथियोपिया व यूएई पर ड्रोन हमले का आरोप लगाया, राजदूत को वापस बुलाया
सूडानी सैन्य प्रवक्ता ने मंगलवार को कहा कि मार्च 1 से अब तक चार ड्रोन हमले, जिनमें कई वाणिज्यिक सुविधाएं और नागरिक बुनियादी ढाँचा निशाना बना, भारत के दूर-सहाय्यी निगरानी प्रणाली के अनुसार इथियोपिया के बहिर दर हवाई अड्डे से प्रक्षेपित हुए। इन हमलों में यूएई के समर्थन की सनसनीखेज संकेत भी मिले, जिससे दुबई-आधारित ड्रोन आपूर्ति श्रृंखला का आगे जाँच का संकेत मिलता है।
संक्षिप्त समय में चार घातक घुसपैठों के बाद, सत्ता में रहे सैन्य नेतृत्व ने इथियोपिया को कूटनीतिक नोटिस भेजा, राजदूत को दुबई की गली में नहीं बल्कि खड़िये पर वापस बुलाने का आदेश दिया। यह कदम सूडान के जलवायु-राजनीतिक तनाव के एक नए चरण को दर्शाता है, जहाँ पड़ोसी देशों के साथ आरोप‑लापरवाही की लड़ाई खुल कर चल रही है।
इथियोपिया-यूएई गठजोड़ की रेखा स्पष्ट है: एतियोपिया के बहिर दर हवाई अड्डे को रणनीतिक द्वीपों का केंद्र बना कर लाल सागर में नौसेना शक्ति का विस्तार किया जा रहा है, जबकि यूएई ने अपने ग्राह्य लक्ष्य को अफ्रीकी समुद्री मार्गों की सुरक्षा और ऊर्जा प्रवाह को नियंत्रित करना बताया है। सूडान की इस आरोपावली ने इस गठबंधन की अस्पष्टता को उजागर कर दिया—कौन 'हथियार' बेचा, कौन 'उपयोग' किया, और किसके लिए सीमा‑पार शत्रुता को वैध ठहराया गया?
सूडान के इस कदम का असर अफ्रीकी महाद्वीप के बड़े खिलाड़ियों के बीच संतुलन को झकझोर रहा है। संयुक्त राष्ट्र की शांति बलों के पुनर्संरचना, अफ्रीका-भारत सहयोग मंच, और यूएस‑चीन की भारत-आधारित रणनीतिक प्रतिस्पर्धा इस संघर्ष के बंधन में धुंधले हो रहे हैं। भारत, जो सूडान में तेल आयात, पोर्ट सुडान में जहाज़ रेस्ट, और अचल निवेश में गहरा जुड़ा हुआ है, अब इस तीव्र कूटनीतिक त्रिकोण को संतुलित करने के दो दोरियों पर खड़ा है। भारत की विदेश नीति परिप्रेक्ष्य में, एथेनिया के साथ परस्पर लाभकारी जल संसाधन समझौता और यूएई के साथ ऊर्जा‑परिचालन सहयोग दोनों ही नाज़ुक संतुलन पर टिका है।
वास्तविक नीति‑घोषणा और जमीन पर कार्यान्वयन के बीच लगातार एक खाई दिखाई देती है। स्त्रेलित ड्रोन साक्ष्य, जो तकनीकी तौर पर “सामान्य” सैन्य रडार से नहीं बल्कि अधिक परिष्कृत “इंटरसेप्शन” सिस्टमों से प्राप्त हुए, अभी भी एक कागज़ी औपचारिकता का स्तर रखते हैं। यदि प्रतिपक्ष के पास इन आरोपों को झूठा साबित करने की क्षमता नहीं है, तो सूडान का यह कदम सिर्फ “ड्रोन‑जॉब” के रूप में इतिहास में अंकित हो सकता है, न कि व्यावहारिक गठबंधन‑समीक्षा का।
नतीजतन, इथियोपिया व यूएई के साथ अफ्रीकी ध्रुवीकरण को लेकर सूडान की कूटनीति एक दोधारी तलवार बनती जा रही है—एक ओर रक्षा‑परिचालन को सुदृढ़ करने की कोशिश, तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को अनिश्चितता की लकीर से डराने का जोखिम। भारत के व्यापारिक समुदाय के लिये स्पष्ट है: अब बोरिंग ‘सप्लाई‑चेन’ के बजाय ‘जियो‑पॉलिटिकल‑रूट’ पर अधिक सतर्कता की माँग है।
Published: May 5, 2026