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Category: दुनिया

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वेनिस बिएनाले में रूसी पाविलियन पर पुस्सी रॉयट का विरोध, द्वार कुछ समय के लिये बंद

वेनिस बिएनाले के द्वितीय पूर्वावलोकन दिवस में, रूसी पाविलियन को अचानक बंद करना पड़ा, जब विरोधी समूह पुस्सी रॉयट ने मंच पर अस्थिर कर देने वाला प्रदर्शन किया। समूह के सदस्य गुलाबी बालाक्लावा पहने हुए, गुलाबी‑नीले‑पीले फ्लेयर जलाते हुए, पंक संगीत की ध्वनि में "ब्लड इज़ रशिया’स आर्ट" और "क्यूरेटेड बाय पुटिन, डेड बॉडिज़ इन्क्लूडेड" जैसे नारे चिल्लाए।

यह कार्रवाई सिर्फ एक कला‑संबंधी विरोध नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश था – कि युद्ध‑क्रियाओं के पीछे छिपी रूसी संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर दावेदारी देना अब अस्वीकार्य है। जबकि पश्चिमी देशों ने यूक्रेन में रूसी आक्रमण के लिए व्यापक प्रतिबंध लगाए हैं, कई देशों ने फिर भी सांस्कृतिक भागीदारियों को जारी रखने का विकल्प चुना है। इस लापरवाही ने पुस्सी रॉयट को मंच पर खड़ा किया, जिससे बिएनाले की आयोजक प्रबंधन की नीतिगत असंगति उजागर हुई।

भारत के संदर्भ में यह घटना दोहरी त्रिज्या रखती है। भारत ने परम्परागत रूप से रूसी ऊर्जा और रक्षा गठबंधन को महत्व दिया है, जबकि हाल के वर्षों में वह पश्चिमी व्यावसायिक और तकनीकी साझेदारियों की ओर भी झुक रहा है। बिएनाले जैसे उच्च-स्तरीय मंच पर रूस की भागीदारी को लेकर भारतीय कलाकारों और संस्थाओं में गहन बहस देखी जा रही है – कुछ इसे स्वतंत्र कला की सार्वभौमिकता के समर्थन में देखते हैं, तो अन्य इसे मानवीय मूल्यों के साथ समझौता मानते हैं। इस प्रकार पुस्सी रॉयट का प्रदर्शन भारतीय संस्कृति‑नीति निर्माताओं के लिये एक चेतावनी बन सकता है: सांस्कृतिक स्वीकृति बनाम नैतिक जवाबदेही के बीच संतुलन बनाना अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है।

संगठनात्मक तौर पर बिएनाले का जवाब थोड़ा अकार्यक्षम रहा। विरोध को रोकने के लिए सुरक्षा बल तैनात तो किए, परंतु पाविलियन को ‘अवस्थायी रूप से बंद’ करने के बाद भी कोई स्पष्ट संचार नहीं किया गया। यह दिखाता है कि बड़े अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी, जब कलाकार‑सक्रियवादी समूहों का प्रतिरोध निरंतर बढ़ता है, तो स्थापित संस्थाएँ उचित नीति‑समायोजन में देर कर देती हैं।

आगे देखना यही है कि वेंिस बिएनाले किस तरह से अपने क्यूरेटरशिप को पुनः परिभाषित करेगा। यदि मंच सौंदर्य के बजाय राजनैतिक शक्ति‑संतुलन के तहत ही कार्य करता रहा, तो भविष्य में ऐसे प्रदर्शन और भी आम हो सकते हैं। इस बीच, पुस्सी रॉयट ने साबित कर दिया कि कला अब भी सबसे तेज़ व्याख्यान है – यदि आप उसे सुनने के लिये तैयार हैं।

Published: May 6, 2026