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Category: दुनिया

विकिपीडिया संस्थापक जीमी वेल्स ने ऑस्ट्रेलिया के सोशल मीडिया प्रतिबंध को ‘भारी तबाही’ और ‘शर्म का कारण’ कहा

ऑस्ट्रेलिया सरकार ने इस वर्ष मई में 13 साल से छोटे बच्चों के लिए सभी प्रमुख सोशल‑मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया, यह दावा करते हुए कि यह कदम युवा वर्ग को ऑनलाइन घृणा, दावेदारी और मानसिक स्वास्थ्य संकट से बचाएगा। परंतु विकिपीडिया के संस्थापक जीमी वेल्स ने इस नीति को “अप्रत्याशित आपदा” और “शर्मनाक प्रज्वालन” करार दिया।

गुज़रते दशक में, वेल्स ने ग़ौर किया कि इंटरनेट का विषाक्त स्वरुप केवल फ़ेसबुक, ट्विटर या इंस्टाग्राम जैसी सामाजिक नेटवर्कों तक सीमित नहीं था। 2001 में विकिपीडिया के जन्म के समय ही वे‑बोलने वाले फोरम, चॅट रूम और ‘डायरी‑हाउस’ जैसी जगहें पहले से ही घोटाले, द्वेषपूर्ण सामग्री और निरंतर निगरानी की धड़कनें ले कर चल रही थीं। उनके अनुसार, तकनीकी कंपनियों द्वारा डेटा संग्रहण का मुद्दा नई नहीं, बल्कि इंटरनेट की उत्पत्ति से ही मौजूद था।

ऑस्ट्रेलिया के इस प्रतिबंध को वेल्स ने दो प्रमुख कारणों से “मिसफ़िट” कहा। पहला, यह बच्चों को “डिजिटल निगरानी के आदर्श” के रूप में प्रस्तुत करता है—एक ऐसी अवस्था जहाँ युवा वर्ग बिना सवाल किए यह मान लेता है कि संग्रहीत डेटा उनके जीवन का सामान्य हिस्सा है। दूसरा, यह नीति “भारी आपदा” बनकर उभरती है क्योंकि यह स्वतंत्र अभिव्यक्ति को अस्थायी रूप से नहीं, बल्कि स्थायी रूप से दमन करने की ओर संकेत करती है, जिससे सामाजिक दायित्वों की बजाए सुरक्षा की भावना प्रमुख हो जाती है।

भारत के पाठकों के लिए यह तर्क परिचित है। 2020 में भारतीय सरकार ने कुछ विदेशी एप्लिकेशन पर व्यापक प्रतिबंध लगाए थे, और फिर भी वह प्रतिबंध कई महीनों में ही हटाया गया, जिससे नीति‑निर्माताओं और तकनीकी दिग्गजों के बीच तालमेल की “सतहीयता” स्पष्ट हुई। वेल्स के शब्दों में, ऑस्ट्रेलिया की स्थिति भारतीय अनुभवों को दोहराती हुई नजर आती है—जहाँ अभिप्रेत सुरक्षा अक्सर भाषण के मूल अधिकार पर छाया बन जाती है।

वेल्स ने कहा कि एआई तकनीक स्वयं विकिपीडिया के लिये “आपदा” नहीं, बल्कि एक अवसर है। एआई क्षमताओं से लेखों की तथ्य‑जाँच तेज़ हो सकती है, जबकि मानवीय संपादन से “खुले ज्ञान” की गारंटी बनी रहती है। उनका तर्क है कि यदि सरकारें सच्ची सुरक्षा चाहती हैं, तो उन्हें अवरोधन के बजाय डिजिटल साक्षरता, डेटा संरक्षण कानून और पारदर्शी निगरानी तंत्र पर ध्यान देना चाहिए—न कि बैन के जरिए ‘बच्चों को डराना’।

समग्र रूप से, ऑस्ट्रेलिया की इस “सुरक्षा‑पहली” पहल को वेल्स ने वही देखा है जो कई देशों में दोहराया गया: नीति का उद्देश्‍य और उसके परिणाम के बीच एक दूरस्थ खाई। उनके शब्दों में, इस खाई को पाटने के लिये केवल प्रतिबंध नहीं, बल्कि एक विचारशील, खुला और उत्तरदायी डिजिटल फ्रेमवर्क की आवश्यकता है—एक वह फ्रेमवर्क जो न तो भारतीय, न ही ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को निगरानी के बंधन में बांधे, बल्कि उन्हें ऑनलाइन अधिकारों के प्रति जागरूक बनाये।

Published: May 4, 2026