विक्टोरिया राज्य का बजट 2026‑27: महामारी के बाद पहली बार बजट अतिरेक, दो साल की सरप्लस की राह
ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य ने अपने 2025‑26 वित्तीय वर्ष में $700 मिलियन का ऑपरेटिंग सरप्लस दर्ज किया, जो कोविड‑19 महामारी की शुरुआत से पहले के अंतिम अधिशेष के बाद की पहली जीत है। इस परिणाम को 2026‑27 के बजट में दो साल तक लगातार अधिशेष की संभावना के साथ पेश किया गया, जिससे रियोन‑लेबर सरकार को वित्तीय स्थिरता का ठोस प्रमाण मिल रहा है।
सुबह‑शाम के अपडेट के बाद इस संख्या में थोड़ी‑बहुत असंगति रहना असामान्य नहीं है; दिसंबर में प्रकाशित $710 मिलियन का प्री‑बजेट अनुमान और पिछले मई में $611 मिलियन की साक्षी अनुमान दोनों ही अब पीछे छूट गए हैं। ऐसा लग रहा है कि वित्त विभाग ने अपने पहले के अनुमान को पुनः देख कर, अपने ही कलम से एक स्वस्थ आंकड़ा लिख दिया। जैसा कि दिल्ली में गैस की कीमतें ऊपर‑नीचे होती हैं, वहीँ विक्टोरिया की बजट रेखा भी अब थोड़ी‑बहुत स्थिर दिख रही है।
वित्तीय पुनरुद्धार की कहानी को वैश्विक संदर्भ में देखना आवश्यक है। अधिकांश उन्नत अर्थव्यवस्थाएँ अभी‑भी महामारी‑उपरांत मौद्रिक सख्ती, मँहगाई और ब्याज दरों के व्रद्धि के साथ जूझ रही हैं। इस परिदृश्य में विक्टोरिया का अधिशेष दो‑स्तरीय संदेश देता है: एक ओर, स्थानीय अर्थव्यवस्था ने निर्यात‑उन्मुख सेवा क्षेत्र (जैसे ऑस्ट्रेलिया‑भारत शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर्यटन) को मजबूती से संभाला, तो दूसरी ओर, राज्य ने खर्च‑परिपालन में कुछ हद तक सच्ची ‘कट‑बैक’ की बॉर्डरलाइन को छुआ।
भारतीय पाठकों के लिए यह तुलना रोचक है। भारत के प्रमुख राज्यों—जैसे महाराष्ट्र और तमिल नाडु—में अभी भी वित्तीय घाटे का दबाव है, और केन्द्र सरकार की 6 % की वार्षिक ऋण‑से‑जीडीपी लक्ष्य के साथ तालमेल बिठाने में संघर्ष जारी है। विक्टोरिया का दो‑वर्षीय अधिशेष, यदि भारतीय नीति नियंताओं को प्रेरित करे, तो राज्य‑स्तर की वित्तीय अनुशासन के बारे में नए सवाल उठ सकते हैं: क्या उच्च कर‑आधारित राजस्व (पीआरआई, GST‑समान) को और अधिक कुशलता से निकाला जा सकता है, या विनियम‑प्रतिकूलता को घटाकर खर्च‑प्राथमिकता को पुनः परिभाषित किया जा सकता है?
नीति‑घोषणाओं और वास्तविक परिणामों के बीच की दूरी पर एक सूखा व्यंग्य यही है—राज्य के ‘बजट आश्चर्य’ अक्सर चुनाव‑प्रसंग में सज्जा के साथ आते हैं, जबकि वास्तविक सुधारें तो अतीत के ‘आर्थिक ठगी’ को धुंधला कर देती हैं। इस बार, लॅबर सरकार ने बजट में आय‑सूत्रों को विविधता‑पूर्ण करने का वादा किया है, जिसमें नई बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिए निजी‑सहयोग (PPP) मॉडल को बढ़ावा देना, और साथ ही पर्यावरण‑सुलभ ऊर्जा में निवेश को तेज करना शामिल है। पर अगर हम पिछले पाँच वर्षों की सार्वजनिक ऋण‑प्रबंधनीयता को देखें, तो यह कहना सुरक्षित है कि ‘सुरक्षित’ शब्द अभी‑भी ‘नीला‑रिक्लैम’ जैसा दिखता है, न कि ठोस वित्तीय पत्थर।
सार में, विक्टोरिया का बजट 2026‑27 दो‑वर्षीय सरप्लस की घोषणा के साथ एक सकारात्मक संकेत देता है, पर यही संकेत निहित जोखिमों को कम नहीं करता। चाहे वह सार्वजनिक निवेश की प्राथमिकता हो, या मौद्रिक नीति का प्रभाव, इस अधिशेष की टिकाऊ शक्ति को तभी मापा जा सकेगा जब अगले वित्तीय वर्ष में राज्य की खर्च‑आधार में कोई ‘किसी भी मुफ्त लंच’ की बात न की जाए। भारतीय नीति‑निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों के लिये यह सीख की एक और कड़ी बन सकती है—संकल्प और आँकड़े दोनों को एक साथ चलाना ही स्थायी वित्तीय स्वास्थ्य की कुंजी है।
Published: May 5, 2026