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Category: दुनिया

विक्टोरिया का 2026 बजट: महामारी के बाद पहली सरप्लस, लेकिन क़रज़े का बोझ 200 बिलियन डॉलर के करीब

ऑस्ट्रेलिया के सबसे धनाढ्य राज्यों में से एक, विक्टोरिया ने इस वित्तीय वर्ष (2025‑26) में 727 मिलियन डॉलर का ऑपरेटिंग सरप्लस दर्ज किया। यह पहला सरप्लस है जो राज्य ने महामारी के बाद हासिल किया, और यह पूर्व‑बजट अपडेट में बताई गई 710 मिलियन की उम्मीद से थोड़ा बेहतर है।

परन्तु इस छोटे‑से उत्सव के पीछे एक भारी बोगदा है: राज्य का कुल क़रज़ा 2030 तक लगभग 200 बिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। कांग्रेस‑प्रवृत्त श्रमिक सरकार इस लक्षित बंटवारे को ‘जिम्मेदार वृद्धि’ कहती है, पर वास्तविकता में यह ‘जिम्मेदारी का अभ्यास’ से काफ़ी दूर लगती है।

बजट में प्रमुख कटौतियों में परिवहन खर्चों की कमी शामिल है, जिससे सड़कों और ट्राम परियोजनाओं को निरस्त या देर से शुरू किया जाएगा। साथ ही, नामी‑नवीन सहायता पैकेज के तहत माता‑पिता के लिए शिक्षा‑सहायक राशि में वृद्धि की गई है – एक कदम जो निरंतर लोकप्रियता को बनाए रखने के लिए सहज लग सकता है, पर यह सवाल उठाता है कि क्या यह खर्चा भविष्य की धंधे‑धूंध में गड़बड़ी नहीं करेगा।

वैश्विक आर्थिक माहौल को देखते हुए, इस प्रकार की ‘सरप्लस‑पर‑कर्ज़’ क़ीमत संकल्पना में कोई चमत्कार नहीं दिखता। विश्वव्यापी ब्याज दरों में वृद्धी, आपूर्ति‑श्रृंखला में अभी भी अस्थिरता, और जलवायु‑प्रेरित आपदाओं के कारण सार्वजनिक खर्च में अचानक वृद्धि की सम्भावना, सभी मिलकर राज्य के बैलेंस‑शीट को जोखिम में डाल रहे हैं।

भारत के पाठकों के लिए यह अद्यतन दो कारणों से रोचक है। पहला, ऑस्ट्रेलिया के राज्य बॉन्ड अक्सर भारतीय पोर्टफोलियो में फीचर होते हैं; बढ़ता क़रज़ा वाडे की रिटर्न को दबा सकता है, जिससे भारतीय निवेशकों को कम लाभ की आशंका रहेगी। दूसरा, कई भारतीय राज्य भी अपने वित्तीय घाटे को कम करने के प्रयास में ‘सतत सरप्लस’ की तलाश में हैं, पर पुनःवित्तीय लागत बढ़ने के साथ उनका विस्तार भी जोखिमभरा हो गया है। इस प्रकार, विक्टोरिया का बजट दोनों देशों में ‘फिसलती हुई सच्चाई’ का एक परावर्तक बनता है।

राज्य के राजकोषीय अधिकारी इस साल के सरप्लस को “विक्टोरिया की पुनरुत्थान यात्रा” के रूप में पेश करते हैं, जबकि यह छुपा रहता है कि इस ‘पुनरुत्थान’ की नींव धीरज‑भरे क़र्ज़ पर टिकी हुई है। दलील यह है कि क़र्ज़ को ‘स्मार्ट‑बॉन्ड’ और ‘लंबी‑अवधि की निवेश’ से संभाला जाएगा, पर इतिहास अक्सर दिखाता है कि ‘स्मार्ट’ शब्द अक्सर ‘अधिक खर्चीला’ शब्द के साथ गुँथे‑गुँथे होते हैं।

संकल्पना स्पष्ट है: वर्तमान में दिखाया गया सरप्लस अल्पावधि की राजनीतिक जीत हो सकती है, पर दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक—क़र्ज़ को नियंत्रित करना—अभी भी अनसुलझी है। भविष्य के पीढ़ियों के लिये यह सवाल रहेगा कि क्या विक्टोरिया अपने क़र्ज़‑भरे बोक्स के साथ चलने वाले ‘समृद्धि‑भ्रम’ को भुनाने में सफल रहेगा या फिर इस आर्थिक ‘सिरफिरा’ के नीचे बँधे रहेंगे।

Published: May 5, 2026