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लंदन में हिरासत के बाद ग्रीन उम्मीदवार ने फिर से चुनावी अभियान चलाया

लंदन के लम्बेथ बरो में ग्रीन पार्टी की प्रतिनिधि सबीन मैरी को गुरुवार सुबह मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने सोशल‑मीडिया पर सार्वजनिक रूप से एंटीसेमिटिक पोस्ट लगाने के संदेह में हिरासत कर ली थी। अचानक वह उसी दिन, या उसके अगले दिन, क्लैफ़ैम के एक चुनावी रैली में पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच दिखी, जिससे विरोधी श्रमिक पार्टी (लेबर) ने ग्रीन पार्टी पर ‘गंभीरता की कमी’ का आरोप लगाया।

सबीन मैरी को, जैसा कि रिपोर्टों में बताया गया, ‘संदेहपूर्ण सामग्री’ पोस्ट करने के कारण दो उम्मीदवारों में से एक के रूप में गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई तेज़ी से विवाद को भड़का देती है, क्योंकि यूरोप में बाएँ‑पक्षी दलों पर यह आरोप लगातार लग रहा है कि वे एंटीसेमिटिज़्म के मामलों में आंधी‑तूफ़ान की तरह हल्के‑फुल्के ढंग से प्रतिक्रिया देते हैं, जबकि सदमे में निशाने पर अत्यधिक संवेदनशील समुदायों को डुबो देते हैं।

जैक पोलान्स्की, ग्रीन पार्टी के राष्ट्रीय नेता, ने इस मामले को ‘संदेह के स्तर पर एक व्यक्तिगत त्रुटि’ कहा और अदालत के निर्णय तक इंतज़ार करने की बात कही। लेबर पार्टी ने इस टिप्पणी को ‘हास्यास्पद’ दर्ज किया, यह कहते हुए कि ‘जैसे ही किसी ने असहज पोस्ट किया, तुरंत दो कदम आगे बढ़ना चाहिए, न कि बाद में ग्राहकों को ‘भिगो’ कर बहाना बनाना।’

इन घटनाओं का स्थानीय चुनावों पर क्या असर पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। ग्रीन पार्टी का वोट‑संधान पहले से ही सतर्क रहे हैं: वे पर्यावरणीय मुद्दों पर केंद्रित हैं, पर यह सामाजिक‑राजनीतिक बवंडर उनके मुख्य दर्शकों को उलझा सकता है। एक ओर वे ‘विषम‑विचारों’ के खिलाफ कड़े कदम उठाने को कह रहे हैं, तो दूसरी ओर वह अपने स्वयं के उम्मीदवार को फिर से मंच पर ले जा रहे हैं।

भारत से कई प्रवासी समुदाय, विशेषकर लंदन में रहने वाले भारतीय, इस मामले पर नज़र रख रहे हैं। भारत का ईज़राइल के साथ बढ़ता रणनीतिक संबंध, और साथ ही दक्षिण एशिया में एंटी‑समानतावादी आवाज़ें, दोनों ही इस मुद्दे को बुनियादी स्तर पर प्रभावित कर सकते हैं। भारतीय मीडिया अक्सर यूरोपीय बाएँ‑दिक के भीतर एंटीसेमिटिज़्म को ‘अमेरिकी‑आधारित काउंटर‑इंटेलिजेंस’ के रूप में ही देखता है—एक अवधारणा जो इस मामले में स्पष्ट रूप से लागू नहीं होती।

फिर भी, ग्रीन पार्टी के भीतर और बाहर दोनों ही पक्षों को यह समझना होगा कि सार्वजनिक मंच पर ‘स्वतंत्र अभिव्यक्ति’ और ‘हेट स्पीच’ के बीच की रेखा को कहाँ खींचा जाए। यदि यह रेखा धुंधली रहेगी, तो आगे का चुनावी मैदान एक ‘सैंडविच’ बन जाएगा: बाएँ‑पक्षी पर्यावरणीय नीति के दो टुकड़े, और बीच में एंटीसेमिटिक कंटेंट का कड़वा अचार। जल्दी ही यह तय होगा कि ग्रीन पार्टी इस स्थिति को ‘असंबंधित’ के रूप में मान लेती है, या फिर अपने ही सिद्धांतों – ‘पर्यावरणीय न्याय और सामाजिक समानता’ – को पुनः स्थापित कर खुद को बिंदु पर लाती है।

Published: May 3, 2026