रूस‑यूक्रेन के ड्रोन संघर्ष में चार मौतें, ‘शैडो फ्लीट’ टैंकरों पर प्रहार
रात के पन्ने की तरह धुंधले मौसम में, दोनों पक्षों ने एक साथ 600 से अधिक ड्रोन और एक बैलेस्टिक मिसाइल लाँच करके संघर्ष का स्तर नया ऊँचाई पर पहुंचा दिया। रूसी बलों ने 268 ड्रोन और एक द्रव्यमान मिसाइल का उपयोग किया, जबकि यूक्रेनी सेना ने कम से कम 334 निशाना लगाने वाले ड्रोन भेजे। इस असंतुलित युद्ध‑रात्रि में चार व्यक्ति मारे गये, जिनमें दो डाकिया और दो नौजवान नाविक शामिल थे।
ड्रोन के इस घुमक्कड़ कूच में उल्लेखनीय अंश ‘शैडो फ्लीट’ के नाम से जाने जाने वाले तेल टैंकरों को निशाना बनाना रहा। ये वही जहाज हैं जो अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचते हुए रूसी कच्चे तेल को विश्व बाजार में पहुंचाते हैं। इस बार टैंकरों पर किए गये प्रहार ने एक बार फिर नौवहन सुरक्षा को खतरे में डाल दिया, जबकि समुद्री बीमा प्रीमियम में वृद्धि का जोखिम भी बरकरार है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर प्रभाव तुरंत महसूस किया गया। शैडो फ्लीट के हिस्से पर प्रत्यक्ष प्रहार होने से तेल की कीमत में अस्थायी उछाल आया, जो भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए असहनीय हो सकता था। अधिकांश भारतीय आयातकों ने इस तनाव को लेकर आपूर्ति श्रृंखला में संभावित रुकावटों की चेतावनी दी, जबकि ऊर्जा मंत्रालय ने वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कूटनीतिक स्तर पर, पश्चिमी गठबंधन ने यूक्रेन के ड्रोन प्रोत्साहन को ‘आतंकवाद की नई परिभाषा’ कहा, जबकि रूस ने वार्तालाप को ‘आतंकवादी ढंग से किए गए जवाबी कार्रवाई’ के रूप में प्रस्तुत किया। संयुक्त राष्ट्र समुद्री सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जो संस्थागत अक्षमता का स्पष्ट उदाहरण बन गया। इस बेमेल में, अंतरराष्ट्रीय कानून के हाई‑थ्रेशोल्ड वाले अनुबंधों को मिथ्या साबित कर दिया गया, जबकि वास्तव में ‘ड्रोन‑गुंज’ को रोकने के लिए कोई नियामक ढाँचा नहीं बना।
ड्रोन‑युध्द की यह लहर यह प्रश्न उठाती है कि क्या राज्य‑प्रायोजित ‘साइबर‑भौतिक’ रणनीति वास्तव में प्रतिद्वंद्वियों को बाधित कर रही है या सिर्फ पहचान के लिये एक शो‑केस बन चुकी है। इस खेल में ‘कई‑ट्रेन’ की तरह अति‑उत्पादन और ‘कोई‑छापे नहीं’ की नीति के बीच एक बड़ी खाई है। दर्शकों के लिये उपलब्ध साक्ष्य यह सुझाव देते हैं कि इस प्रकार की असमानता‑आधारित लड़ाई में वास्तविक ‘जीवन‑सुरक्षित’ तत्व शायद ही कभी शांति मंच पर पहुँच पाए।
Published: May 4, 2026