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Category: दुनिया

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रूस ने 24 घंटे के युद्धविराम के बाद यूक्रेन में मिसाइल हमला, पुतिन की परेड को प्राथमिकता

क्वार्टरली सत्र के अंत में पुतिन ने रेड स्क्वायर में अपनी वार्षिक सैन्य परेड की तैयारी की, जबकि यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर ज़ेलेंस्की ने 24‑घंटे का एकपक्षीय युद्धविराम घोषित किया था। इस संधि को टालते हुए, मॉस्को ने रात‑भर में 100 से अधिक युद्ध ड्रोन और 3 रणनीतिक मिसाइलें यूक्रेन के कई शहरों पर गिरा दीं, जिससे दर्जनों नागरिक हताहत हुए।

कहानी की शुरुआत तब हुई जब केबलिन ने आधिकारिक तौर पर शनिवार को "परेड‑के‑समय" एक अस्थायी युद्धविराम की मांग की। ज़ेलेंस्की ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी, यह कहकर कि यदि पुतिन अपने स्वयं के शर्तों का उल्लंघन करता है तो वह तुरंत प्रतिकार करेंगे। सात बजे मध्यरात्रि के बाद, रूसी सैन्य हवाई गश्त ने पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन पर लगातार लक्ष्यों को निशाना बनाया। लड़ाकू ड्रोन की संख्या इतना अधिक थी कि यूएन के मानवतावादी एजेंटों ने इसे "हवाई आतंक" की श्रेणी में रखा।

इस उल्लंघन ने न केवल यूक्रेन की हताशा को और गहरा दिया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के संतुलन को भी हिलाया। नाटो के देशों ने तत्काल शर्तों की मांग की, जबकि चीन ने सच्चे "स्थिरता" के पक्ष में शांति वार्ता को दोबारा शुरू करने का आह्वान किया। ऐसी स्थिति में भारत को दोहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा: सशस्त्र बलों को रशियन उपकरणों से सशक्त बनाने वाले समझौतों के साथ जुड़ाव तथा यूरोपीय सुरक्षा संरचना की आलोचना के बीच संतुलन बनाना। दिल्ली ने अब तक अपनी विदेश नीति में "स्वतंत्रता" का सरलीकरण किया है, पर इस तरह के आक्रमणकारी कदम भारत के निर्यात, ऊर्जा आयात और रक्षा सहयोग पर पड़ने वाले अप्रत्यक्ष प्रभावों को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

दूरदर्शी विश्लेषकों का कहना है कि पुतिन का यह कदम मात्र "पारेड की शोभा" नहीं, बल्कि घरेलू जनमत को सुदृढ़ करने की लालसा है। यह रणनीति उस समय की स्मृति दिलाती है जब सोवियत संघ ने सत्ता संरक्षकता के नाम पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को देर से पूरा किया था। सरकार की इस रीढ़ की हड्डी पर वैचारिकता और वास्तविक शक्ति के बीच का अंतर स्पष्ट हो रहा है: शब्दों में शांति, कार्रवाई में संघर्ष। इस परेड‑के‑साथ संलग्न युद्धविराम की विफलता ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर शांति के विज़न को फिर से प्रश्नात्मक बना दिया है।

भविष्य की राह अभी भी अनिश्चित है। यूक्रेन की सेना ने जवाबी हवाई कार्रवाई की घोषणा की है, जबकि पश्चिमी देशों ने रूसी हथियार निर्यात पर प्रतिबंध तेज करने की तैयारी जताई है। भारत के लिए यह संकेत है कि रणनीतिक स्वायत्तता की खोज में, वैश्विक सुरक्षा ढांचे की नाजुक कड़ी को समझना और अपनी ऊर्जा व रक्षा जरूरतों को वैकल्पिक स्रोतों की ओर मोड़ना जरूरी होगा।

Published: May 6, 2026