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Category: दुनिया

रूस के मिसाइल हमले से खार्किव‑खेरसन में कम से कम आठ मौतें, मॉस्को में दुर्लभ ड्रोन वार

बृहस्पतिवार, 4 मई को, रूसी वायुसेना ने पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन के दो प्रमुख शहरों—खार्किव और खेरसन—को लक्षित करते हुए हवाई हमला किया। प्रारम्भिक आंकड़ों के अनुसार, इस हमले में कम से कम आठ नागरिक प्राप्त हुए, जिनमें दो छोटे बच्चे भी शामिल हैं। विस्फोट के बाद दोपहर में जमीं पर धुआँ उठते देख, स्थानीय प्रशासन ने आपातकालीन चिकित्सा सहायता के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय मानवीय संस्थाओं को त्वरित हस्तक्षेप की मांग की।

इसी शाम, मॉस्को की राजधानी में अचानक गूँजते ड्रोन के ध्वनि ने रूसी सुरक्षा एजेंसियों को आश्चर्यचकित कर दिया। यह घटना कई वर्षों के बाद राजधानी में हुई पहली ऐसी हवाई हमला रहेगी। ड्रोनों ने शहर के कई प्रशासनिक भवनों के पास उड़ान भरी, लेकिन कोई मारक क्षति दर्ज नहीं हुई। रूसी आधिकारिक बयानों ने इसे "अपरिचित उग्रवादी समूह" के एकाउण्ट किया, जबकि विशेषज्ञों ने संकेत दिया कि यह उत्तर-उक्रेनी प्रतिरोध या कोई बाहरी गुप्त एजेंट हो सकता है।

रूसी रक्षा मंत्रालय ने दोनों घटनाओं को “रहस्यमयी लेकिन बेतरतीब” वर्णित किया और कहा कि यह “आघातकारी विदेशियों की निरंतर कोशिशें” हैं। इस पर कई अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक ने टिप्पणी की कि मोटे तौर पर रूसी रणनीति अब संयोगों की लकीर पर चल रही है—एक ओर सीमा पर तीव्र बॉम्बारी, तो दूसरी ओर अपनी ही राजधानी में सुरक्षा का दर्पण तोड़ना। विसंगतियों से भरपूर इस ‘डुअल-ट्रैजेक्टरी’ में, रूसी इंटेलिजेंस की ‘जेरिटिकली ब्रेन’ रणनीति पर सवाल उठे।

भारत, जिसके पास यूक्रेन में लगभग सात हजार भारतीय नागरिक रह रहे हैं, इस विकास को गंभीरता से देख रहा है। नई दिल्ली ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिवाद नहीं दिया, पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि “बिना पक्षपात के शांतिपूर्ण समाधान” की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। भारत ने गंभीर मानवीय स्थिति को देखते हुए यूक्रेन में तेज़ी से राहत कार्यों को बढ़ाने का ऐलान किया, जबकि संयुक्त राष्ट्र में विभिन्न प्रस्तावों पर अक्सर ‘भुमिका‑समान’ अक्षर शून्य वोट दिया। भारतीय जनसंचार को सन्देश दिया गया कि “अस्थिरता ही नहीं, बल्कि निरंतर आर्थिक प्रतिबंध भी पूरे अंतरराष्ट्रीय प्रणाली को खलिहान बना रहे हैं”।

स्थापित अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत, नागरिकों पर सीधे सैन्य हमला करना स्पष्ट रूप से उल्लंघन है, लेकिन रूस ने इसका खरा तर्क इस “सुरक्षा खतरे” के इर्द‑गिर्द बनाया है। इस पारस्परिक विरोधाभास को देख, कई विशेषज्ञों ने कहा कि कुशलता से चल रहा “हाइब्रिड युद्ध” अब एक बिखरते “पैटर्न” में बदल रहा है, जहाँ “रणनीतिक संधारण” और “ऑपरेशनल अनियमितता” दोनों ही पक्षों को बर्बाद कर रही हैं।

निष्कर्षतः, इस सप्ताह के दो घटनाएँ—खार्किव‑खेरसन में घातक मिसाइल हमले और मॉस्को में दुर्लभ ड्रोन प्रहार—रूस की सैन्य नीति में स्पष्ट असंगतियों की ओर इशारा करती हैं। जबकि इस तरह के कार्य भू‑राजनीतिक खेल के दायरे में होते हैं, उनका प्रत्यक्ष प्रभाव प्रतिदिन सैंकड़ों अनजान नागरिकों के जीवन में गहरी चोटें पहुंचाता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चुनौती अब इन असंगतियों को पहचानना और लागू उपायों के माध्यम से यह सुनिश्चित करना है कि ‘सुरक्षा’ शब्द का दुरुपयोग नहीं हो।

Published: May 4, 2026