रूडी जुलियानी गंभीर स्थिति में, 9/11 के धूल‑जहर से श्वास बाधित
न्यूयॉर्क शहर के पूर्व मेयर रूडी जुलियानी को इस सप्ताह अस्पताल में भर्ती किया गया, जहाँ उन्हें बिना सहायता के श्वास लेना लगभग असंभव हो गया है। उनका प्रवक्ता इस बात को स्पष्ट करता है कि यह स्थिति केवल आयु‑संबंधी नहीं, बल्कि 2001 के सेप्टेम्बर 11 के हमले के बाद उत्पन्न धूल‑जहर से उत्पन्न प्रतिबंधित वायुप्रणाली रोग (restrictive airway disease) का प्रत्यक्ष परिणाम है।
जुलियानी, जो उस समय “संघर्ष के संरक्षक” के रूप में खुद को प्रस्तुत करते थे, अब वही धूल अपने शरीर पर फिर से धुंधली चादर जैसा बिखेर रही है। उन्होंने स्वयं 9/11 के बाद कई बार वाक्पटुता से कहा था कि न्यूयॉर्क की पुनर्निर्माण ऊर्जा “विश्व को एकजुट करेगी” – परंतु बौरस में कहीं पे परवाह नहीं, स्वास्थ्य नीतियों की धुंधली छाया में उन हजारों प्रथम प्रतिक्रिया टीम के रोगियों को हाथ बंटाने में सरकार की तत्परता आज भी सवाल के घेरे में है।
संयुक्त राज्य में इस वर्ग के रोगियों के इलाज के लिए स्थापित फंड और वैधता में लगातार कतराव देखा जा रहा है। जब EPA ने “धूल‑जहर हटाने” की नीति घोषित की, तो वही धूल कुछ वर्षों में “स्थायी श्वास‑रोग” में बदलकर मरीजों को अस्पताल के बेड पर खड़ा कर दिया। यह नीति‑असंगतता कूटनीतिक रूप से खुद को “मानवीय उत्तरदायित्व” के झंडी के नीचे छुपाने की कोशिश करती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका की छवि धुंधली हो जाती है।
भारत के पाठकों के लिए यह बात विशेष महत्व रखती है, क्योंकि भारतीय नीतियों को भी आतंकवादी हमलों के बाद उत्पन्न स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने की जरूरत पड़ेगी। 2008 के मुंबई हमले, 2016 के वाराणसी धावा और हालिया कश्मीर में सशस्त्र संघर्षों में कई नागरिकों को धूल‑जहर वाले वातावरण में फँसना पड़ा है। जबकि भारत ने फिलीपींस, यूक्रेन और अफ़ग़ानिस्तान में “मानवीय सहायता” का राजदूत बनकर अपना स्वर उठाया, वहीं घरेलू स्तर पर ऐसी स्वास्थ्य‑सुरक्षा व्यवस्था अभी भी निर्माणाधीन है।
विदेशी नीति विवरणों और वास्तविक परिणामों के बीच का अंतर अक्सर वाक्पटु बयानबाजी में लुप्त हो जाता है। जुलियानी के मामले में, एक पूर्व मेयर का “बेहतर स्वास्थ्य” के वादे पर अब “असहाय साँसें” की वास्तविकता ने पंचर किया है। यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी गठबंधनों और सार्वजनिक स्वास्थ्य की बातों को अलग‑अलग मोर्चों पर नहीं, बल्कि एक समग्र परिप्रेक्ष्य में देखना कितना आवश्यक है।
संक्षेप में, रूडी जुलियानी की स्वास्थ्य‑संभाल न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि अमेरिकी संस्थानों की स्वास्थ्य‑नीतियों में मौजूदा तारतम्यहीनता का एक दर्पण भी है—एक दर्पण जो भारत जैसे मित्र राष्ट्रों को भी अपने घरेलू सुरक्षा और स्वास्थ्य रणनीतियों को पुनः‑आकलन करने के लिए प्रेरित कर सकता है।
Published: May 6, 2026