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Category: दुनिया

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रॉजर स्टोन को म्यांमार जैंटा के लिए लबिंग सेवाओं पर अफ़रातफ़री

एक ऐतिहासिक मोड़ पर अमेरिकी राजनीति के कम चर्चित कोनों से एक, डोनाल्ड ट्रम्प के भरोसेमंद सहयोगी रॉजर स्टोन को म्यांमार के सैन्य शासन के लिए माह‑दर $50,000 की फीस लेकर “वॉशिंगटन‑म्यांमार संबंधों का पुनर्निर्माण” करने के लिये नियुक्त किया गया। यह अनुबंध न केवल अमेरिकी नीतियों की स्पष्ट दोहरी मापदंड को उजागर करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय अधिकारों के साथ एक बेतुकी टकराव भी दर्शाता है।

2021 के फ्रेमवर्क में सेना द्वारा सत्ता हवाले कर लिये बाद से म्यांमार के जंबे या ‘टैट मुंग’ पर प्रतिबंध, वैडिंग ट्रैवल बेनिफिट्स और वैरिएंट कउदीन क़ानून जैसी कड़ी नीतियों के बावजूद, अब वाशिंगटन में एक पूर्व‑फायरड डोनाल्ड ट्रम्प‑सहयोगी को “कूटनीतिक पुल” बनाने का काम सौंपा गया। खुद यूएस विदेश विभाग ने हालिया बयानों में जैंटा की “अमानवीय कार्यों” को “भयावह अवैधता” कहा, फिर भी निजी लबिंग फर्मों को वह “संभव संवाद” के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जिसमें धुंधली गुस्से की चमक नहीं, बल्कि “रिपेयर” शब्द की मीठी ध्वनि है।

इसी बीच म्यांमार ने “शाम” चुनावों का मेजबानी किया, जिन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक ने ‘नकली’ का टैग लगा दिया। चुनावी प्रक्रिया को वैधता दिलाने की इस कोशिश को दो-तिहाई अमेरिकी हितों के तालमेल में फिट करने की आशा में, स्टोन को फिर‑फिर “प्रत्यक्ष संवाद” स्थापित करने का प्री‑स्लेट्योरन कहा गया।यहाँ सवाल यही खड़ा है कि क्या “संबंध पुनर्निर्माण” का काम एक ऐसी झुंड के साथ है जो स्वयं को विश्वसनीय नहीं मानती? और क्या अमेरिकी नीति‑निर्माताओं ने इस बात को नज़रअंदाज़ कर दिया है कि जब भारत जैसे पड़ोसी देश अपने बाल्कन के समान दक्षिण‑पूर्व एशिया में शरणार्थी संकट और मानवाधिकार उथल-पुथल को संभाल रहा है, तो वाशिंगटन के उच्च न्यायालय में “नैतिक” कोर के साथ एक ‘बीड़ी’ लबिंग फॉर्मूला गले लगा रहा है?

वास्तविकता यही है कि स्टोन की फीस के पीछे न केवल वाणिज्यिक हित है, बल्कि अमेरिकी राजनयिक परम्पराओं की गिरती विश्वसनीयता भी छिपी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब चीन, जापान और भारत जैसी प्रमुख शक्ति अपने‑अपने रणनीतिक हितों को ‘जिम्मेदारी’ के साथ जटिल करती हैं, तो एक पूर्व‑कैंपेन सलाहकार को “लेगसी‑जंक्शन” के नाम पर सैन्य‑शासन के समर्थन में लाया जाना, प्रणाली की भूमिका‑बदलाव की ओर इशारा करता है।

भले ही स्टोन की यह लबिंग सेवा एक “टड़प‑दर” पर चल रही हो, मगर इसका असर अमेरिकी-डॉबरोनी भुगतान संरचनाओं में, संयुक्त राष्ट्र और ASEAN के मानवीय मंचों में, तथा भारतीय विदेश नीति में जहाँ म्यांमार के जटिल शरणार्थी प्रश्नों को संभालना जरूरी है, पर गहरा पड़ता है। इस परिप्रेक्ष्य में, “संवाद का पुनर्निर्माण” शब्द का उपयोग करने वाले लोग शायद यह भूल गए हैं कि इमारत को तोड़ना “पुनर्निर्माण” का असली पहला कदम है।

Published: May 9, 2026