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Category: दुनिया

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यूरोप का पहला हाथी अभयारण्य खुला: पोर्टुगाल में जूली और करिबा को मिलेगा नया घर

पुर्तगाल के अलेंटेजो में, लिस्बन से 200 किमी दूर, एक पुराने रैंच को यूरोप का पहला बड़े पैमाने का हाथी अभयारण्य बनाकर नई जान देने का प्रयोग किया जा रहा है। यह परियोजना गैर‑लाभकारी संगठन पैंजिया (Pangea) द्वारा चलाई जा रही है, जिसका लक्ष्य 600 से अधिक हाथियों को फिर से ‘वन्य’ बनाना है—या कम से कम ‘छूटे‑छूटे’ दिखाना।

पहले दो प्रवासियों में जूली, जो पूर्व में पुर्तगाल के एक सर्कस में काम करती थी और अब देश की आखिरी सर्कस‑हाथी बनी हुई है, और करिबा, बेल्जियम के एक बड़े चिड़ियाघर के निवासी, शामिल हैं। जूली को अगले महीने, यानी जून 2026 में, अलेंटेजो के इस अभयारण्य में ले जाया जाएगा, जबकि करिबा की स्थानान्तरण इसी समय तय है। दोनों का चयन मात्र प्रतीकात्मक नहीं; यह यूरोप के कई देशों में सर्कस‑हाथियों पर प्रतिबंध, चिड़ियाघर सुधार और ‘रेवाइल्डिंग’ के सिद्धांतों के प्लेटफ़ॉर्म पर सच्ची चाल है।

ईयू के भीतर 2020‑के दशक के मध्य से, कई सदस्य राज्य—जैसे जर्मनी, ऑस्ट्रिया, नेदरलैंड्स—ने सर्कस में जंगली जानवरों के उपयोग पर कठोर रोक लगा दी। फिर भी, “कैद में रहे 600 हाथियों” की आँकड़े जटिल विरासत को उजागर करते हैं: जब एक तरफ जंगली हाथी संरक्षण के लिए फंडिंग बढ़ रही है, तो दूसरी ओर पुराने चिड़ियाघर और निजी संग्रहालयों में ये बड़े स्तनधारी अभी भी ‘संचालन‑संपत्ति’ बने हुए हैं।

पैंजिया के अभयारण्य को 10 एकड़ से अधिक भूमि, जल‑स्रोत और ‘प्राकृतिक‑जैसी’ भूभाग मिला है; फिर भी, यह ‘प्राकृतिक’ शब्द यहाँ थोड़ा व्यंग्यात्मक रह जाता है, क्योंकि बड़े स्तनधारी को ऐसे सीमित एन्क्लेव में फिर से डाला गया है, जहाँ वास्तविक घने जंगल, बड़े जलाशय या मानव‑हस्तक्षेप रहित प्रजनन‑पारिस्थितिकी नहीं है। यह अक्सर ग्रीन‑वॉशिंग के समान है: ‘रिवाइल्डिंग’ शब्द के पीछे‑पीछे “अधिकतम देखभाल” का शारीरिक सौंदर्य बन रहा है, जबकि नीति‑निर्माताओं को असली संरक्षण के लिए सार्वजनिक धन फिर से आवंटित करने से बचाया जा रहा है।

भारत के पाठकों के लिए यह बिंदु दिलचस्प है—देश में 60,000‑से‑अधिक वन्य हाथी हैं, और कई राज्य अभी भी आदिवासी भूमि पर बड़े‑पैमाने के विकास‑परियोजनाओं के चलते संघर्ष में हैं। इसी तरह, भारत में भी कई हाथी सर्कस, जिम और निजी संग्राहकों के पास हैं, जबकि हालिया संसद बहस ने सर्कस में जंगली जानवरों के उपयोग पर प्रतिबंध की मांग की है। यूरोप का यह कदम, यदि सच्ची प्रतिबद्धता के साथ नहीं जुड़ता, तो सिर्फ़ ‘डोमेस्टिक एन्क्लेव में परिवर्तन’ रह जाएगा, जबकि वास्तविक वन्य टेरिटरी में संरक्षण के खर्च को घटाता रहेगा।

निरंकुश अंतर्राष्ट्रीय प्रतिमान के सामने, यूरोप की यह पहल दो ध्रुवीय वास्तविकताएँ उजागर करती है: एक ओर, पैंजिया जैसे NGOs को निधि मिल रही है, और ‘पहला बड़े पैमाने का हाथी अभयारण्य’ का खिताब मिल रहा है; दूसरी ओर, सरकारी अधिकारी अक्सर “सीमित भूमि पर पुनर्स्थापना” को ‘कानून के अनुसार संरक्षण’ के तौर पर प्रदर्शित करते हैं। किनारा पर, जहाँ सह-आर्थिक विकास, पर्यावरणीय न्याय और वन्य जीवन के वास्तविक अधिकार आपस में टकराते हैं, वहाँ नीति‑घोषणा और जमीन‑पर‑परिणाम के बीच का अंतर दिन‑प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।

अभयारण्य का आधिकारिक उद्घाटन जून के अंत में निर्धारित है, और मीडिया को आशा है कि जूली व करिबा के साथ‑साथ अन्य यूरोपीय हाथी भी इस नई ‘आभासी वन्य भूमि’ में समायोजित हो पाएँगे। लेकिन पूछना बाकी है—क्या यह ‘नेचर‑रिहैबिलिटेशन’ की नई पराकाष्ठा है, या फिर धुंधली ब्रांडिंग के पीछे छिपा एक और बौद्धिक ‘जंगल‑पार्क’ है, जहाँ संरक्षण का शब्द सिर्फ़ विज्ञापन‑स्लोगन बन कर रह गया है?

Published: May 7, 2026