मॉस्को में सुरक्षा का सख़्त दाँव: हवाई अड्डे बंद, मोबाइल इंटरनेट काट, 9 मई के वीकटरी डे परेड घटेगी
रूसी राजधानी मोस्को ने मंगलवार को एक बड़ा सुरक्षा प्रकोप शुरू किया – अधिकांश हवाई अड्डों को बंद कर दिया गया और कई मोबाइल उपयोगकर्ताओं की इंटरनेट पहुंच अस्थायी रूप से बाधित कर दी गई। यह कदम 9 मई को मनाए जाने वाले वीकटरी डे परेड से ठीक पहले उठाया गया, जो द्वितीय विश्व युद्ध के अंत की स्मृति में रूस का सबसे बड़ा राष्ट्रीय समारोह है।
केंद्रशासित क्रेमलिन ने आधिकारिक तौर पर बताया कि यह कार्रवाई ‘संभावित उक्रेनी ड्रोन हमलों’ की रोकथाम के लिये आवश्यक है। युद्ध के मैदान से दूर, रूसी सरकार अब अपने स्वयं के शहर को भी संभावित हवाई हमले के टारगेट के रूप में देख रही है। यह डर तब और बढ़ा जब यूक्रेन ने अपनी नई लंबी दूरी वाले ड्रोन परीक्षणों की घोषणा की, जो रूस की राजधानी तक पहुँचने की क्षमता रखते हैं।
परेड के स्वरूप में भी बदलाव आया है। दो दशकों में पहली बार, रूसी सेना ने भारी टैंक और मिसाइल सिस्टम को लहराए बिना छोटा करने का फैसला किया। पारंपरिक ‘पावर शो’ को घटाकर सैकड़ों पैराइट्स और पवित्र पताकाएँ ही दिखाने का इरादा बताया गया। यह न केवल सुरक्षा कारणों से है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय दबाव को कम करने के लिये भी एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
विश्व स्तर पर इस कदम को कई विश्लेषकों ने ‘रूस की सैन्य शोभा में गिरावट’ के संकेत के रूप में पढ़ा। जबकि लेनिनग्राद के पास के सीमाओं पर संलग्न बलों को अभी भी भारी मचाड़ें मिल रहे हैं, वैभवपूर्ण परेड की अनुपस्थिति संभावित रूप से इस बात को उजागर करती है कि ‘ड्रोन के लोहे से भी भेद नहीं रुकता’।
भारत के लिए यह विकास दोहरी दुविधा पेश करता है। भारत‑रूस का ऐतिहासिक रक्षा‑व्यापार और ऊर्जा सहयोग अभी भी जारी है, परन्तु नई दुरी‑ड्रोन काबिलियत के सामने न्यू‑डिलेटेड सुरक्षा को लेकर नई रणनीति अपनाने की आवश्यकता स्पष्ट हो रही है। वार्तालापों में अक्सर दोनों पक्ष ‘आशा’ और ‘सुरक्षा’ के शब्दों को दोहराते रहते हैं, पर सच्चाई यह है कि मोस्को के भीतर के कदम भी पश्चिमी और यूक्रेनी दबाव का अनिवार्य परिणाम हैं।
आलोचना के दायरे में इस बात को भी लाया गया है कि इंटरनेट कटौती अनगिनत नागरिकों को भी असहज कर रही है, जबकि इन‑ट्रांजिट रेल्वे, टैक्सीस, और डाक सेवाओं पर इसका प्रभाव अनदेखा नहीं किया जा सकता। ‘डिजिटल परिधान’ को भी गोली मारना, यह साबित करता है कि प्राधिकरण के दायरे में ‘स्व-सेफ्टी’ का अनुकूलन अक्सर ‘जनता के अधिकारों’ के साथ टकरा जाता है।
सारांश में, मोस्को में सुरक्षा का कड़ा दाँव न केवल एक नजदीकी सुरक्षा उपाय है, बल्कि यह रूस के अंतरराष्ट्रीय प्रतिबिंब को भी पुन: तैयार कर रहा है। जब ऐसा बड़ा इतिहासिक उत्सव इतने सीमित रूप में मनाया जाता है, तो यह संकेत मिलता है कि ‘सत्ता‑संरचना’ और ‘धमकी‑परिस्थिति’ के बीच का फासला दिन-प्रतिदिन कम हो रहा है। भारतीय पाठकों के लिये यह समझना जरूरी है कि किसी भी बड़े भू‑राजनीतिक खेल में, एक देश के भीतर की सुरक्षा उपायें कभी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसके वास्तविक सशक्तिकरण को नहीं बदल सकतीं।
Published: May 5, 2026