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Category: दुनिया

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मैक्रों ने यूएस‑इरान को संघर्ष के बीच होरमुज़ जलडमरूमध्य खोलने का आग्रह किया

फ़्रांस के राष्ट्रपति एममैन्युअल मैक्रों ने बीच-बीच में चल रहे यूएस‑इरान तनाव को एक आर्थिक समाधान के साथ जोड़ने की कोशिश की। उनका मानना है कि स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़, जो विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल‑आवागमन मार्गों में से एक है, को युद्ध समाप्त होने से पहले पुनः संचालन में लाना चाहिए।

वहीं, यह प्रस्ताव अनेक जटिलताओं से भरा है। सबसे पहले, जलडमरूमध्य की सुरक्षा का सवाल है—हिंसा का माहौल बना रहने पर नौका‑रहाई का भरोसा कैसे मिलेगा? दूसरे, अमेरिकी और ईरानी सैन्य‑रणनीतियों में गहराई से निहित वैरता को सिर्फ़ “खुला रखें” कह कर निस्तेज किया जा सकता है या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ने वाले असर को अनदेखा नहीं किया जा सकता। होरमुज़ जलडमरूमध्य के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 20 मिलियन बैरल तेल के साथ- साथ भारत जैसी तेल‑निर्भर अर्थव्यवस्थाओं की आपूर्ति भी चलती है। भारत की आयात‑निर्भरता के कारण, इस मार्ग का बंद होना तेल की कीमतों में उछाल और कच्चे तेल के बिल में इज़ाफ़ा कर सकता है, जिससे सामान्य उपभोक्ता तक असर पहुँचेगा। यही कारण है कि भारतीय विदेश मंत्रालय इस तरह के मतभेद को कूटनीति की धूमिल रोशनी में सुलझाने का प्रयास कर रहा है, जबकि शिपिंग कंपनियों को “सुरक्षित पास” की हार्दिक इच्छा है।

मैक्रों की इस पहल में यूरोपीय साम्राज्यवादी अभिव्यक्ति का भी अँश है। फ्रांस, जो मध्य‑पूर्व में अपने ऊर्जा‑सुरक्षा हितों को सुरक्षित करने के लिए अक्सर बुनियादी ढाँचा‑परियोजनाओं में निवेश करता रहा है, अब इस क्षेत्र में मध्यस्थता के दोहरे पहलू को अपनाने का प्रयास कर रहा है। परन्तु यूरोपीय संघ के पास ऐसा कठोर सहारा नहीं है जो सीधे तौर पर यूएस‑इरान के युद्ध‑कूटनीति को प्रभावित कर सके। इसलिए इस “दूसरा रास्ता” पर काम करना उतना ही जोखिम भरा है, जितना कि विस्फोटक पर पेटीटे के साथ यात्रा करना।

एक सच्ची नीति‑गँभीरता यह होगी कि क्या दो पक्ष संघर्ष के बीच ही एक आर्थिक‑सुरक्षा टोपी पहन सकते हैं, या यह केवल एक रूट‑मैप है जिससे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर नज़रों को बँटाया जा सके। यदि हार्ड‑लाइन वाले गुट इस प्रस्ताव को “शीत‑संवाद” का हिस्सा मानते हैं, तो इसे ठुकरा देना ही संभावित सैन्य‑उत्प्रेरण को रोकने का एकमात्र उपाय होगा।

भविष्य की दिशा अभी अनिश्चित है, परन्तु एक बात स्पष्ट है: होरमुज़ का खुलना या बंद रहना, भारत सहित सभी तेल‑आधारित अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक मूर्खतापूर्ण खेल नहीं, बल्कि एक वास्तविक आर्थिक‑सुरक्षा की कड़ी है। नीति‑निर्माताओं को सपने‑सजाने की बजाय ठोस, सुरक्षित और न्यायसंगत समाधान तलाशना होगा, क्योंकि समुद्री हवाई मारक ने पहले ही संकेत दे दिया है—सुरक्षा को कम करके नहीं, बल्कि वास्तविक संवाद से ही दिलचस्पी बनती है।

Published: May 7, 2026