बढ़ती दुर्लभ पृथ्वी धातु की मांग से अमेज़न में अपराधी उत्खनन का उछाल
दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहन और स्वायत्त ड्रोन की तड़प ने दुर्लभ पृथ्वी धातुओं की कीमतों को पिछले दो वर्षों में दो गुना कर दिया है। इन धातुओं की आपूर्ति के लिए अब पहाड़ों की तलहटी ही नहीं, बल्कि पृथ्वी के सबसे बड़े हरे छत्र, अमेज़न वर्षावन भी लक्षित हो रहा है।
ब्राज़ील की सरकार, जो आधिकारिक तौर पर 2025 में सतत खनन नीतियों को लागू करने का वादा कर रही थी, अब अपने स्वयं के जंगलों में गुह्य‑गुह्य खानों के नक्शे पर हस्ताक्षर कर रही है – अगर हम शाब्दिक अर्थ में देखें तो यह ‘हरित’ शब्द का नया अर्थ खोजता है। अभी तक कोई बड़ा प्रतिबंध नहीं लगा, क्योंकि फाइलें अक्सर जंगल के झील के किनारे पर कागज़ की नावों में बहा दी जाती हैं।
मुख्य खिलाड़ी कई हैं: चीन, जो पिछले दशक में चीन‑दुर्लभ‑पृथ्वी गठबंधन के तहत विश्व की 60 % आपूर्ति नियंत्रित कर रहा है; संयुक्त राज्य अमेरिका, जिसने अपने रणनीतिक “क्लीन एंट्री” पहल के तहत ब्राज़ील और अन्य लैटिन अमेरिकी देशों को फंडिंग के बदले कड़े पर्यावरणीय मानक देने का प्रस्ताव रखा है; और यूरोपीय संघ, जो अपनी कार्बन निरपेक्षता लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारत सहित कई देशों से स्थायी स्रोतों की माँग कर रहा है।
इनमें सबसे गड़बड़ बात यह है कि सभी प्रमुख औद्योगिक देशों द्वारा “स्थायी” शब्द को दोहराते हुए, वास्तविक जांच‑तपास बहुत कम होती है। वास्तविकता यह है कि कई स्थानीय मिलिशिया, अक्सर नकली लाइसेंस लेकर, जंगल के दो‑तीन स्थानों में तस्करी‑संजालित खनन पोर्टल खोल रहे हैं। परिणाम: जलवायु‑परिवर्तन के प्रमुख शोषणकर्ता, जो पहले ही तेज़ी से ट्री‑कवरेज घटा रहे थे, अब ओजोन‑फ़्रीजिंग गैसों और भारी धातु के अपशिष्ट से भी जहर खा रहे हैं।
भारत के लिए यह समस्या केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि रणनीतिक भी है। दिल्ली ने हाल ही में ‘दुर्लभ‑धातु विविधीकरण’ योजना के तहत अफ़्रीका और ऑस्ट्रेलिया में निवेश को बढ़ावा दिया है, ताकि चीन‑उपनदिशा पर निर्भरता घटे। अब अमेज़न में बढ़ती अनियमित उत्खनन नेटवर्क, भारत की भविष्य की ई‑मंत्रालय योजना के लिए एक चेतावनी संकेत बन गया है – अगर आपूर्ति‑शृंखला सुरक्षित नहीं, तो ‘इलेक्ट्रिक भारत’ का सपना धूप में पिघलता रहेगा।
न्यायिक दृष्टिकोण से भी स्थिति बिखर रही है। अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण कानून के विशेषज्ञ कहते हैं कि ब्राज़ील के ‘पर्यावरणीय संरक्षण’ के आधिकारिक दस्तावेज़, जो अक्सर एशियाई निवेशकों को आकर्षित करने के लिए तैयार किए जाते हैं, अब ‘कार्बन‑फ्रेमवर्क’ के तहत फॉर्मलिटीज़ बन कर रह गए हैं, जबकि जमीन पर ‘जंगल‑उत्खनन‑क्लब’ की बैठकें चल रही हैं।
एक हद तक यह मामला अदृश्य आर्थिक शक्ति के खेल से उतना ही जुड़ा है, जितना कि जंगल के नीचे छुपे हुए धातु के टुकड़े जुड़े हैं। वैश्विक शक्ति-सम्बन्धी संतुलन को अगर देखे तो इस अमेज़न की ‘अपराधी धड़कन’ को केवल ब्राज़ील या स्थानीय गुट का मामला नहीं, बल्कि बड़ी कंपनियों और राष्ट्रों की आपूर्ति‑शृंखला रणनीति की प्रतिविरूपता कहा जा सकता है।
यदि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस “क्रिमिनल रेज़र” को केवल एक प्रोजेक्ट के रूप में नहीं, बल्कि पर्यावरणीय सुरक्षा से जुड़े प्रमुख राष्ट्रीय नीति के रूप में देखेगा, तभी अमेज़न के बचे हुए हरित पृष्ठभूमि को फिर से साँस लेने का मौका मिल सकता है। अन्यथा, भविष्य के ड्रोन‑बेटी और इलेक्ट्रिक‑कार‑भूखे दुनिया के लिए ये हरे‑भरे जंगल सिर्फ धातु‑धन की ‘खाने‑पानी’ बन कर रहेंगे।
Published: May 3, 2026