विज्ञापन
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ में वकील की आवश्यकता है?
आपराधिक मुकदमों, जमानत, गिरफ्तारी, एफआईआर, जांच और उच्च न्यायालयी कार्यवाही से जुड़े कानूनी मार्गदर्शन के लिए यहां क्लिक करें।
फ्रांस में राष्ट्रपति पद के 30 प्रत्याशियों की भीड़: क्या ये दहशतपसर राष्ट्रीय गठबंधन को रोक पाएँगे?
पिछले हफ़्ते पेरिस की एक छोटी सभागार में बारिश के झोंकों के बीच सैकड़ों बाएँ पक्ष के समर्थक "एकता! एकता!" का नारा लगाते हुए इकट्ठा हुए। यह सभा फ्रांस के लोकप्रिय फ्रंट (Popular Front) के 90वें जनमदिन का जश्न थी, जो 1930 के दशक में दाहिनी उग्रवाद के उदय को रोकने के लिए गठित एक बाएँ गठबंधन था। अब वही डर कंधे पर है, बस विरोधी रीति‑रिवाज़ बदल गया है: इस बार लक्ष्य है राष्ट्रीय गठबंधन (National Rally) – मैक्रॉन के बाद के सबसे बड़े दाहिने‑समर्थक आंदोलन।
परंतु इस ऐतिहासिक प्रतिध्वनि के साथ ही फ्रांस की राजनीति में एक नई विषमता उभरी है – 30 से अधिक उम्मीदवारों का अभूतपूर्व रिकॉर्ड। अधिकांश पुरुष, कुछ ही महिलाओं ने इस भीड़ में जगह पाई। इतना विस्तृत उम्मीदवार‑पैलेट, जो ख़ासकर बाएँ‑स centre‑leaning पार्टियों में फूट-फूट कर प्रकट हो रहा है, चुनावी गणित को जटिल बना रहा है। अगर बाएँ वोटर एक सॉस में कटा हुआ पास्ता जैसा बिखर गया, तो दाहिनी राष्ट्रीय गठबंधन को संभावित बहुमत मिलने की संभावना और भी बढ़ जाती है।
यूरोप में हाल ही में देखी गई दाहिनी ताकतों की वापसी – इटली, नॉर्वे और अनगिनत छोटे देशों में राष्ट्रीय-लोकतांत्रिक संचार का पुनरुत्थान – इस परिप्रेक्ष्य में फ्रांस का चुनाव एक महत्वपूर्ण संकेतक बन जाता है। एक ओर यूरोपीय संघ के भीतर आर्थिक‑सुरक्षा कवरेज का सवाल है, तो दूसरी ओर फ्रांस‑भारत रक्षा‑साझेदारी, एयरोस्पेस सहयोग और जलवायु‑नीति के महत्वपूर्ण अभिसरण बिंदु हैं। यदि राष्ट्रीय रैली फ्रांस में सत्ता में आती है, तो यूरोपीय सामूहिक निर्णय‑प्रक्रिया में संभावित विकृति भारत के लिए द्विपक्षीय समझौतों की शर्तों को पुनः मूल्यांकन करने का कारण बन सकती है।
इसी समय, फ्रांस की सरकार ने कई बार बाएँ‑संचालक गठबंधन के भीतर जलवायु, सामाजिक सुरक्षा और यूरो‑स्थिरता के मुद्दों पर अस्पष्ट वैधता का उल्लेख किया है – एक तरह का “सूखा व्यंग्य” जो राजनीतिक कागज़ीकरण में लिपटा हुआ है। इस कागज़ीकरण के बीच, नागरिक आंदोलन का स्वर अब भी सच्चे लोकतांत्रिक प्रयोग की याद दिलाता है, जहाँ "एकता" का नारा जलते हुए कागज़ों की धुंध में भी एक स्पष्ट संकेत बनकर दिखता है।
आगे देखते हुए, यदि बाएँ पक्ष में नई गठबंधन या मुख्य उम्मीदवार का उदय नहीं होता, तो फ्रांस के अगले राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रीय गठबंधन को भविष्य में संभावित बहुमत‑सरकार बनाने का अवसर मिल सकता है। इसका नतीजा न केवल यूरोपीय संसद में नीति‑निर्माण के संतुलन को बदल सकता है, बल्कि वैश्विक मंच पर अधिकार‑संरचनाओं में भी परिवर्तन लाने की सम्भावना रखता है। भारत के लिये, यह फ्रांस‑भारत द्विपक्षीय सहयोग की स्थिरता के लिये एक परीक्षा होगी – विशेषकर जब रक्षा‑उपकरणों की निर्यात, साइबर सुरक्षा समझौते और जलवायु परिवर्तन‑अनुबंधों जैसे क्षेत्रों में पारस्परिक निर्भरता बढ़ती जा रही है।
सारांश में, फ्रांस की इस चुनावी भीड़भाड़ में बाएँ‑संचालन शक्ति की बिखराव को रोकना, राष्ट्रीय गठबंधन की उभरती शक्ति को संतुलित करना—यह दोहरी चुनौती न केवल फ्रांस के भीतर बल्कि व्यापक अंतरराष्ट्रीय नीति‑परिदृश्य में भी अपना असर दिखाएगी।
Published: May 9, 2026