फ़ाइबर‑ऑप्टिक फ़र्स्ट‑पर्सन व्यू ड्रोन: रूस‑यूक्रेन और मध्य‑पूर्व संघर्ष में नई भयावह शक्ति
रूस‑यूक्रेन जंग के धूमिल रणभूमि में अब एक नया रूप धारी तोप आया है – छोटा, तेज़, पहला‑व्यक्ति‑दृष्टि (FPV) ड्रोन, जो फ़ाइबर‑ऑप्टिक लिंक से जुड़ा होता है और सटीक उछाल‑विवेक से लक्ष्य पर सटीक हमले करता है। शुरुआती रिपोर्टों में इन मशीनों को ‘फैंटेम्’ कहा गया, क्योंकि वे धुंधली आवाज़ों में उड़े, पर धक्का मारते ही अग्रिम पंक्तियों के सुदृढ़ बंकर भी कंकड़‑कंकड़ हो जाते हैं।
इन ड्रोन की विशिष्टता केवल उनके आकार में नहीं, बल्कि उनका संचार ढाँचा है। पारंपरिक रडार‑जाम या एन्क्रिप्टेड रेडियो के विपरीत, फ़ाइबर‑ऑप्टिक के माध्यम से डेटा को निरंतर दो‑तरफ़ा प्रसारित किया जाता है, जिससे नियंत्रण‑हैश में देरी नगण्य रहती है। परिणामस्वरूप ऑपरेटर को वास्तविक‑समय में 0.03‑सेकंड की लैटेंसी के साथ लक्ष्य को देख‑समझ कर निर्देश देने की सुविधा मिलती है – एक ऐसी क्षमताओं का मिश्रण जो पहले‑पहले प्रभावी लाइट‑वेट लूरिंग म्यूटिनेंट (LWLM) के रूप में प्रयोग में लाई गई थी, पर आज यह संगीतमय युद्ध‑तकनीक बन चुका है।
रूस‑यूक्रेन जंग में प्रवेश
पिछले दो वर्षों में दोनों पक्ष ने इस तकनीक को विभिन्न रूपों में अपनाया। रूस ने अपने ‘एल्बास’ समूह में इन फ़ाइबर‑ऑप्टिक FPV ड्रोन को आपूर्ति किया, जिससे डॉन बेसिन की खाड़ी में अन्तःस्थलीय रोकेटों की ठहराव शक्ति घट गई। दूसरी ओर, यूक्रेन ने पश्चिमी सहयोगियों से कुछ ‘हाई‑स्पीड लाइट‑क्यूब’ मॉड्यूल प्राप्त कर रात में ही दुश्मन की टैंक रैंम्पों पर सटीक हमला कर पाया। दोनों पक्षों की रिपोर्टों में ‘कमी में वृद्धि, क्षति में वृद्धि’ शब्द उल्लेखनीय हैं, परन्तु स्वतंत्र संख्यात्मक आँकड़े अभी भी अनुपलब्ध हैं – शायद ऐसा इसलिए कि डेटा को फ़ाइबर‑ऑप्टिक के माध्यम से ‘रहित’ वॉटरमार्क के साथ भेजा जाता है।
मध्य‑पूर्व के जटिल परिदृश्य में विस्तार
इसी दौरान, इस तकनीक का विस्तार पश्चिमी एशिया तक भी हुआ। इज़राइल‑हामास संघर्ष में इज़राइल की डिफेंस फोर्सेस ने ‘स्टेल्थ‑स्वीपर’ नामक ड्रोन को पायलट किया, जो इज़राइली दालिया रडार को फँसाकर हाई‑स्पीड अटैक कर सकता था। वहीं, सीरिया के विभिन्न प्रतिद्वंदियों ने इरानी‑समर्थित फ़ाइबर‑ऑप्टिक मॉड्यूल को अपने छोटे क्वाडकोप्टर‑ड्रोन में जोड़कर वायुदल पर ‘भूत‑जैसी’ मातें दीं। यह द्विदिशी प्रवाह बताता है कि इस छोटे आकार के हथियार ने परम्परागत उलझन को कितनी तीव्रता से काट दिया है: रणनीतिक असंतुलन से लेकर टैक्टिकल जासूसी तक, सबको एक ही तार पर बंधा दिया।
वैश्विक शक्ति‑संरचनाओं पर असर
ड्रोन के इस त्वरित प्रसार ने दो बड़े कूटनीतिक विरोधाभासों को उजागर किया। पहला, अमेरिकी सामरिक कूटनीति ने ‘अपरिवर्तनीय अव्यवस्था’ पर ज़ोर दिया, जबकि वास्तव में वाशिंगटन ने कई देशों को कम‑कीमत‑ड्रोनस के तकनीकी भाग (जैसे ऑप्टिकल सेंसर, बॅटरी‑मैनेजमेंट) निर्यात करने की अनुमति दी। दूसरा, रूस ने ‘सुरक्षा‑पर्यटन’ की बहानें बनाकर अंतरराष्ट्रीय नियमों से बचने की कोशिश की, परन्तु वही तकनीक अब स्वयं को पश्चिमी सामरिक वातावरण में ‘हैबिटेट’ करवाने लगी है।
इन घटनाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय नीति‑घोषणाएँ अक्सर हवाई रक्षा को ‘नवीनतम उत्तरदायित्व’ कहना चाहती हैं, पर वास्तविकता में कई राष्ट्रीय परिवारों द्वारा एजेंसी‑स्तर पर ‘डेवलपमेंट‑इन‑प्रोग्रेस’ ही दर्ज है। इस दूरी पर सूखा व्यंग्य यह है कि कुछ प्रमुख रक्षा संस्थाएँ अभी भी ‘रीडिंग‑डेड‑टॉपिक’ के तौर पर हमारे अनगिनत छोटे‑ड्रोन हमलों को ‘भविष्य के मॉड्यूल’ में ही वर्गीकृत कर देती हैं।
भारत के लिए निहितार्थ
आधुनिक युद्ध के इस परिदृश्य में भारत के लिए दो प्रमुख चुनौतियाँ सामने आती हैं। पहले, हमारे पास पर्याप्त एंटी‑ड्रोन जाल (उदाहरणतः बॅटरी‑ट्रैकिंग, जेमी‑एंटरसेप्शन) नहीं है, जिसे सरकार की द्वारा ‘2025 तक पूर्ण कवर’ के रूप में प्रकाशित किया गया था, परन्तु अभी भी ‘पाइलट प्रोजेक्ट’ ही दर्ज है। दूसरे, घरेलू रक्षा उद्योग को फ़ाइबर‑ऑप्टिक‑आधारित FPV प्रणालियों के नवाचार में भागीदारी करने के लिए स्पष्ट नीति‑संकल्प चाहिए – विशेषकर निर्यात नियंत्रण के तहत ‘ड्युअल‑युज’ मानदंडों को मिलान करने हेतु।
यदि हम इन छोटे‑ड्रोन के प्रभाव को एक आँकड़े में नापें, तो वह होगी ‘जमीनी क्षमताओं का तेज़ी से क्षीणन’ – और यही वह शब्दावली है, जिसे अधिकांश रणनीतिक विश्लेषकों ने अब तक अनदेखा किया है। हालांकि, इस ‘भूत‑जैसा’ हथियार का व्यापक उपयोग हमें यह सिखाता है कि भविष्य का युद्ध अब भारी बमबारी या बड़े‑आकार के जहाजों से नहीं, बल्कि ‘क्लीयर‑फाइबर’ के माध्यम से नवीनतम शत्रु‑प्रसारण को बाधित करने वाले बेतरतीब छोटे‑ड्रोन से तय होगा।
निष्कर्षतः, फ़ाइबर‑ऑप्टिक FPV ड्रोन न केवल वर्तमान के युद्ध को बदल रहे हैं, बल्कि नीतियों को भी ‘रचनात्मक अटकल’ की सीमा तक धकेल रहे हैं। शांति‑परित्याग की बातों के पृष्ठभूमि में, यह छोटा‑सा ‘फैंटेम्’ हमें याद दिलाता है कि असल शक्ति‑परिवर्तन अक्सर आँसू‑भरी रिपोर्ट‑कार्ड की जगह धुँधली फाइबर‑लाइनों में छिपा रहता है।
Published: May 4, 2026