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पश्चिमी पाकिस्तान में मोर्टार हमले से 6 नागरिक मरे, 13 घायल
पाकिस्तान के हंगू जिले के दर्रानी बंधा इलाके में गुरुवार, 7 मई को जारी एक सुरक्षा ऑपरेशन के दौरान घातक मोर्टार शेल ने नागरिक रहने वाले क्षेत्र को लक्षित कर लिया। इस ताबाकी में छह लोगों की मृत्यु और तेरह घायल हुए, पुलिस रिपोर्ट के अनुसार यह हमला स्थानीय उग्रवादी समूहों द्वारा किया गया।
स्थानीय पुलिस ने बताया कि जब सुरक्षा कर्मी आतंकवादियों के विरुद्ध अर्द्ध-खुली कार्रवाई में लगे थे, तब उन्होंने मोर्टार से निकली गोलियों को उत्तर-पूर्वी गली में गिरा दिया। इस बात से स्पष्ट है कि ऑपरेशन की योजना में नगरीय आबादी की सुरक्षा को पर्याप्त रूप से नहीं सोचा गया — एक लापरवाही जो अब सवालों के घेरे में है।
हंगू, जो पैकिस्तान के उत्तरी-पश्चिमी क्षेत्रों में स्थित है, दशकों से जिहादी समूहों की सक्रियता और मिलिटेंट फौजों द्वारा दोहराए जाने वाले अतिक्रमणों का शिकार रहा है। इस क्षेत्र में अक्सर तुर्की-उत्पादन वाले हथियारों के उपयोग की बात सामने आती है, जिससे सीमा-परिसर के पार भारतीय सुरक्षा परिदृश्य में भी चिंताएँ बढ़ जाती हैं। भारत के सीमा सुरक्षा एजेंसियों ने पहले ही कहा था कि आतंकवाद के इस तरह के फैलाव से दक्षिण एशिया के संपूर्ण सुरक्षा मंडल पर असर पड़ता है, खासकर जब इस तरह के हमले सिंध के साथ निकटता से जुड़ते हैं।
आतंकवादी समूहों द्वारा मोर्टार जैसे भारी हथियारों का उपयोग न केवल जनता की सुरक्षा को खतरे में डालता है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थानों की लागत-प्रभावशीलता पर भी प्रश्न चिन्ह लगाता है। कई विश्लेषकों ने इस बात को रेखांकित किया है कि पाकिस्तान की सुरक्षा बलों ने शहरी क्षेत्रों में सटीक निशाना साधने वाली तकनीकी क्षमता को अभी तक व्यवस्थित नहीं किया है। इसी प्रकार, जवाबी कार्रवाइयों की तैयारी में जनसंख्या को पर्याप्त सूचना नहीं देना, इस त्रुटिपूर्ण योजना की झलक देता है।
भारी मानवीय मूल्य के साथ, इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों को भी छेड़खानी करने का जरिया बना दिया है। वे कह रहे हैं कि "व्यापक सुरक्षा ऑपरेशनों में नागरिक सुरक्षा को नज़रअंदाज़ करना न केवल रणनीतिक विफलता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून के भी उल्लंघन को दर्शाता है।"
आगे देखते हुए, इस प्रकार के हमलों को रोकने के लिए न केवल सुरक्षा बलों की तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाना आवश्यक है, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग, विशेषकर भारत‑पाकिस्तान के बीच सूचना‑साझाकरण को पुनर्स्थापित करना अत्यावश्यक होगा। तभी इस तरह के निरंतर हिंसा के चक्र को तोड़ना संभव हो पाएगा।
Published: May 9, 2026