जो होना ही था, उसे दर्ज करता, देखता और सवाल करता समाचार मंच

Category: दुनिया

विज्ञापन

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ में वकील की आवश्यकता है?

आपराधिक मुकदमों, जमानत, गिरफ्तारी, एफआईआर, जांच और उच्च न्यायालयी कार्यवाही से जुड़े कानूनी मार्गदर्शन के लिए यहां क्लिक करें

नॉर्वे की नीति में दोहरे मानक: गैस क्षेत्रों को दोबारा खोलते हुए जलवायु प्रतिबद्धताएँ उलट रही है

ओस्लो ने तीन उत्तर समुद्र (नॉर्थ सी) गैस क्षेत्रों को लगभग तीन दशकों के बाद फिर से चालू करने का फैसला किया, जबकि वही सरकार जलवायु परिवर्तन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिज्ञाओं पर बड़ी आवाज़ दे रही थी। यह कदम इस समय आया है जब मध्य‑पूर्व में चल रही सैन्य‑राजनीतिक टकराव ने विश्व भर में तेल‑गैस की कीमतों को आसमान‑छूने लगा है।

फ़रवरी 2026 में संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमले के बाद, तेल‑गैस बाज़ार में मूल्य वृद्धि तेज़ी से बढ़ी। इस संकट का लाभ उठाते हुए, नॉर्वे ने न केवल बंद किए गए तीन गैस क्षेत्रों को फिर से खोलने की मंजूरी दी, बल्कि उत्तर समुद्र, बारेंट्स समुद्र और नॉर्वेजियन समुद्र में 70 नए अन्वेषण क्षेत्रों का भी प्रस्ताव जारी किया। विरोधी समूहों ने यह कदम “पागलपन और ग्रीनवॉशिंग” का सबसे स्पष्ट उदाहरण कहा।

नॉर्वे की ऊर्जा नीति को यूरोप की ऊर्जा सुरक्षा की दोहरी जरूरतों से टकराव माना जा रहा है। यूरोपीय संघ, जो 2035 तक कोयले की सीमा बंद करने और 2050 तक कार्बन‑न्यूट्रल होने का लक्ष्य रखता है, नॉर्वे से अपेक्षा करता है कि वह अपनी प्राकृतिक गैस निर्यात को धीरे‑धीरे घटाए। लेकिन वहाँ की सरकार की नई मंजूरी यह संकेत देती है कि आर्थिक लाभ, विशेषकर उच्च ऊर्जा कीमतों से मिलने वाली टैक्स रेवेन्यू, अभी जलवायु लक्ष्य से अधिक आकर्षक लग रही है।

भारत के लिए यह विकास दो पहलुओं को उजागर करता है। पहला, यूरोप की ऊर्जा‑संकट स्वभावतः भारतीय कंपनियों को नॉर्वेजियन गैस‑स्रोतों की ओर आकर्षित कर सकती है, जिससे भारत‑नॉर्वे ऊर्जा सहयोग में नई गति मिल सकती है। दूसरा, नॉर्वे की “स्थिर‑स्रोत” नीति की असंगतियों से यह प्रश्न उठता है कि ग्लोबल क्लाइमेट फ्रेमवर्क कितनी दृढ़ता से लागू होगा, जब भी महत्त्वपूर्ण देशों को आर्थिक दबाव का सामना करना पड़े।

नॉर्वे के इस कदम को कई संस्थागत विश्लेषकों ने “पर्यावरणीय नीति में दोहरे मानकों का शिखर” कहा है। जब नॉर्वे ने 2025 में कार्बन‑टैक्स बढ़ाने और इलेक्ट्रिफिकेशन को तेज़ करने का वादा किया, उसी साल वह नई गैस खोजों को प्रोत्साहित कर रहा है। इस विरोधाभास को हल्के‑फुल्के स्वर में ऐसे कहा जा सकता है – अगर जलवायु लक्ष्य एक स्यूटकेस में रखे जाएँ, तो फिर नॉर्वे को उस स्यूटकेस को खुली हवा में घटाने में कोई दिक्कत नहीं।

अंततः सवाल यही रहेगा कि नॉर्वे की नीति “ऊर्जा सुरक्षा” को “जलवायु जिम्मेदारी” के साथ कैसे समेटेगी। वर्तमान में, आर्थिक लाभ की चमक ने पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं को धूमिल कर दिया है, और यह वही कथा है जो विश्व के कई तेल‑गैस निर्यातक देशों में दोहराई जा रही है।

Published: May 6, 2026