नेपाल ने लिपुलेख पास पर दावा दोहराया, भारत‑चीन के बीच कैलाश यात्रा को दांव पर डालते हुए
कैलाश मानसरोवर तीर्थ यात्रा का मार्ग लिपुलेख पास के माध्यम से गुजरने को लेकर नेपाल ने फिर से भारत‑चीन को चेतावनी दी। काठमांडू ने स्पष्ट किया कि यह पास उसके भू-भौगोलिक दायरे में है और किसी भी विदेशी याचना अथवा तीर्थयात्रा का उपयोग उसके संप्रभु अधिकार का उल्लंघन होगा।
भारत ने तुरंत जवाब दिया कि लिपुलेख पास 1954 से पवित्र यात्रा के एक स्थापित मार्ग के रूप में प्रयोग में है और अंतर्राष्ट्रीय तौर पर इसे भारत की सीमाओं में माना जाता है। यह बयान तथ्यात्मक रूप से सही तो हो सकता है, परंतु इस बात को नहीं भुलाया जा सकता कि वही पास भारत‑नेपाल‑चीन त्रिपक्षीय सीमा पर स्थित है, जहाँ नक्शे की रेखाएँ अक्सर राजनयिक शब्दकोश के पृष्ठों पर धुंधली पड़ जाती हैं।
चीन की ओर से केवल चालाकी से मुस्कुराते हुए कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं मिली है, फिर भी लिपुलेख के भारतीय पक्ष से जुड़े हुए अवसंरचनात्मक काम देखना मुश्किल नहीं है। त्रिपक्षीय मोड़ पर इस पास की रणनीतिक महत्ता केवल तीर्थ यात्रा तक सीमित नहीं, बल्कि यह क्षेत्रीय सुरक्षा, वाणिज्यिक मार्ग और संभावित सैन्य तैनाती के संदर्भ में भी अहम माना जाता है।
नेपाल के प्रधानमंत्री के भारत दौरे की संभावित तिथि 11‑12 मई घोषित थी, परंतु विदेश सचिव के साथ साक्षात्कार की संभावना अभी भी धुंधली बनी हुई है। भारत‑नेपाल संबंधों को मधुर बनाये रखने की कोशिश में नई दिल्ली ने कई बार व्यापार‑सहयोग व जल‑संधि को प्राथमिकता दी है, परंतु सीमा‑विवाद को अनदेखा करना अब राजनयिक फुजीबिस की नई परिभाषा लिखेगा, यह निश्चित है।
वास्तविकता में नीति‑घोषणाओं और जमीन पर होने वाले कार्यों में अंतर स्पष्ट है। नई दिल्ली का कहना है "लिपुलेख पास हमेशा से भारतीय है," जबकि काठमांडू का तर्क है "इतिहास के पन्नों में लिखा है, लेकिन सीमा रेखा को फिर से लिखना पड़ रहा है।" चीन की मौन नीति, जो कभी‑कभी अपने पक्ष का समर्थन करती है, इस घुटन को और गहरा कर देती है।
यदि इस यात्रा के दौरान दोपहर‑भोजन से पहले कोई समझौता नहीं हो पाया, तो यह मुलाक़ात परछाईं की तरह टकटकी लगाएगी। भारतीय पाठकों को याद रखना चाहिए कि इस प्रकार के छोटे‑छोटे दावे बड़े‑पैमाने पर भारत की उत्तरी सीमा की सुरक्षा, आर्थिक कनेक्टिविटी और राजनयिक निर्भीता को प्रभावित कर सकते हैं।
Published: May 4, 2026