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Category: दुनिया

तेहरान की सड़कों पर इरानी जनता ने झंडे के साथ प्रदर्शन किया, IRGC को दी कड़ी चेतावनी

तेहरान के प्रमुख चौकों में 3 मई 2026 को सुबह‑शाम के बीच एक बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ, जहाँ हजारों इरानी नागरिक एक बड़े राष्ट्रीय झंडे के चारों ओर इकट्ठा हुए। दीवार पर फ़ारसी में लिखा हुआ स्लोगन – “Meydan bashuma, khayabane ba ma.” – यानी “मैदान आपका, गलियाँ हमारी” – सीधे इस्राईली इरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड (IRGC) को लक्षित था। यह संदेश स्पष्ट रूप से सैनिकों से कह रहा था कि वे विदेशी‑मुद्रा‑समर्थित संघर्ष‑क्षेत्र पर ध्यान दें, जबकि राष्ट्रीय सड़कों पर जनता की आवाज़ नहीं बुझाई जा सकती।

पिछले कुछ महीनों में, आर्थिक द्रव्यमान, किफायती ईंधन की कमी और अमेरिकी‑यूरोपीय प्रतिबंधों के कारण इरान की मौद्रिक स्थिति बिगड़ गई थी। साथ ही, नाभिकीय वार्ता में अमेरिकी पक्ष के निरंतर दबाव ने घरेलू असंतोष को और तेज कर दिया। इस पृष्ठभूमि में, सरकार ने IRGC को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और भीतर दोहरी भूमिका सौंपी – एक ओर जियो‑राजनीतिक लड़ाई में लड़ना, तो दूसरी ओर घरेलू उथल‑पुथल को दबाना।

IRGC, जो अब न केवल सैन्य बल बल्कि आर्थिक कार्यों और बाहरी कूटनीति का भी मुख्य धुरी है, की यह दोहरी भूमिका अब जनता के सामने ‘विच्छिन्न’ लग रही है। “मैदान आपका” स्लोगन में निहित निराशा इस तथ्य को उजागर करती है कि इरानी जनता अब अपनी रोज़मर्रा की जीविका को ‘युद्धक्षेत्र’ मानती है, जबकि सैन्य रणनीति को ‘विदेशी*…*’ को सौंपती है।

वैश्विक स्तर पर, इस प्रदर्शन का प्रभाव सीमा‑पार झलकता है। यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका ने IRGC‑से जुड़े कंपनियों पर पुनः प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी, जबकि चीन और रूस ने इरान को आर्थिक समर्थन का वादा दोबारा किया। इस परस्पर विरोधी दबाव का बंधन, ठीक उसी तरह है जैसे कि एक कलाई पर दो घड़ियाँ – एक समय पर चलती है तो दूसरी उल्टी।

भारत के लिए भी यह विकास महत्त्वपूर्ण है। भारत, जो अपने ऊर्जा सुरक्षा के लिए इरान से आयातित प्राकृतिक गैस और तेल पर काफी निर्भर है, अब दो चुनौतियों का सामना कर रहा है: एक तो प्रतिबंधों के कारण निर्यात‑आधारित ऊर्जा अनुबंधों का जोखिम, और दूसरी, घरेलू असंतोष से उत्पन्न संभावित आपूर्ति‑विघटन। साथ ही, भारत‑इरान के पारस्परिक व्यापार‑संधियों को बनाए रखने के लिए भी कूटनीतिक संतुलन बनाना पड़ेगा, क्योंकि भारत को उत्तरी‑पश्चिमी गैस पाइपलाइन जैसी दीर्घकालिक परियोजनाओं में रुचि है, पर वह अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच फँसा हुआ है।

जैसे इरान की सड़कों पर “ہماری گلیاں، ہمارا حق” (हमारी गलियों, हमारा अधिकार) की आवाज़ गूँज रही है, वैसे ही भारत की राजनयिक चालों में भी “हमारा हित, हमारा सिद्धांत” की प्रतिध्वनि सुनाई देती है। यह विरोध केवल पर्दे के पीछे की सत्ता‑संरचना का ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा‑सुरक्षा और कूटनीतिक हस्तक्षेप के जटिल जाल की भी अभिव्यक्ति है।

अंत में, यदि IRGC को इस ‘भौगोलिक‑वार्ता‑द्वंद्व’ से बाहर निकलना है, तो उसे न केवल अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर, बल्कि अपने ही शहरी गलियों में भी ‘मैदान’ बनना पड़ेगा। अन्यथा, जनता का यह नारा – “मैदान आपका, गलियाँ हमारी” – बस कागज की गंदगी बनी रहेगी, जिसका कोई वास्तविक प्रभाव नहीं होगा।

Published: May 3, 2026