जो होना ही था, उसे दर्ज करता, देखता और सवाल करता समाचार मंच

Category: दुनिया

ताइवान के राष्ट्रपति लई चिंग-ते की एस्वातिनी यात्रा पर चीन ने की तीखी आलोचना

तीस मई, 2026 को ताइवान के राष्ट्रपति लई चिंग-ते ने दक्षिण अफ्रीका की सीमा के किनारे बसे एस्वातिनी (पहले स्वाज़िलैंड) की यात्रा शुरू की। यह यात्रा केवल आधिकारिक सत्कार नहीं, बल्कि ताइवान की घटती अंतरराष्ट्रीय मान्यता को बचाने का एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है, क्योंकि एस्वातिनी विश्व के केवल बुनियादी पाँच देशों में से एक है जो अभी भी ताइवान को अपना मान्य sovereign राज्य मानता है।

लई की यात्रा को लेकर बीजिंग ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। चीन के ताइवान मामलों के कार्यालय के प्रवक्ता ने राष्ट्रपति लई को "सड़कों पर दौड़ता हुआ चूहा" कहा, यह कहते हुए कि उनकी "नीचतम" कृत्य अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के उपहास के शिकार होंगे। चीन के इस प्रकार के व्यक्तिगत आधारभूत अपमान ने यह स्पष्ट कर दिया कि ताइवान‑चीन संघर्ष में भाषा भी हथियार बन चुकी है।

एस्वातिनी ने इस बयान के बाद अपने पारस्परिक संबंधों को फिर से नहीं खोला, बल्कि लई को आधिकारिक स्वागत किया, कई आर्थिक और स्वास्थ्य सहयोग की घोषणा की। यह वह मंच है जहाँ छोटे राष्ट्र, चीन के प्रचंड आर्थिक दबाव के बावजूद, अपने रणनीतिक विकल्प को दर्शाते हैं। कहा जा सकता है कि एस्वातिनी ने "रोगी को दवा देने" के बजाय "चूहा को मारने" वाले चीन को नजरअंदाज कर दिया।

भारत के लिए यह विकास दोहरावदार नहीं है। एस्वातिनी के साथ भारत ने पहले ही बड़े निवेश और बुनियादी सुविधा परियोजनाओं में हिस्सेदारी ली है, और अफ्रीका में चीन के आर्थिक विस्तार के जवाब में अपनी रणनीतिक पहुँच मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। लई की यात्रा को भारतीय विदेश मंत्रालय ने "कूटनीतिक विविधता के लिए स्वागत योग्य" कहा, जिससे यह संकेत मिलता है कि भारत चीन की दबाव नीति को अपने आर्थिक हितों के साथ संतुलित करने की कोशिश कर रहा है।

वैश्विक शक्ति संरचना में इस तरह के छोटे‑मोटे कूटनीतिक खेलों का वास्तविक प्रभाव अक्सर शब्दों की बड़प्पन में नहीं, बल्कि स्थायी साझेदारियों और आर्थिक बंधनों में दिखता है। चीन का "चूहा" कहना शायद लई की वैध अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति को कम नहीं कर पाएगा, परंतु यह दर्शाता है कि पीपुल्स रिपब्लिक के लिए कूटनीति का साधन भी कभी‑कभी अपमानजनक रैंपेज़ में बदल जाता है। इस बीच एस्वातिनी के छोटे-छोटे निर्णय वैश्विक मंच पर बड़ी आवाज़ बन रहे हैं—एक ऐसा मंच जहाँ भारत, चीन और ताइवान की पुकारें आपस में टकरा रही हैं, लेकिन वास्तविक परिणाम जमीन पर ही तय होते हैं।

Published: May 4, 2026