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Category: दुनिया

ट्रम्प ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' लॉन्च किया, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पुनः खोलने का दावेदार

संयुक्त राज्य के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कल रात सोशल मीडिया के माध्यम से ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ नामक नया मिशन घोषित किया। इस पहल का लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के मोर्चे पर फँसे जहाज़ों को मुक्त कर इस रणनीतिक जलमार्ग को फिर से खुला करना है, जहाँ पिछले हफ़्तों में ईरान के द्वारा कई सशस्त्र हमले का प्रमाण मिला।

ईरान ने इस सप्ताह दो अमेरिकी और एक बहु-राष्ट्रीय कार्गो जहाज़ पर रॉकेट के शॉट लगाए, जिन्हें वह ‘उपनिवेशवादी दबाव’ का जवाब बताता है। इस घटना के बाद दुबई के निकट स्थित यूएई के एक प्रमुख बंदरगाह पर भी सुरक्षा संकट उत्पन्न हुआ, जहाँ कई शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाज़ों को रोक दिया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह स्थिति कई बड़ी शक्तियों के बीच मौजूदा तनाव को फिर से उजागर करती है। और भी स्पष्ट है कि अमेरिकी विदेश नीति के पुनः सक्रिय होने से मध्य पूर्व में सैन्य-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता फिर से गरम हो रही है, जबकि ईरान का रक्षात्मक-आक्रामक रुख ख़ुद को एक सतत असुरक्षा के रूप में पेश कर रहा है।

यह विकास भारतीय हितों के लिए विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है। भारत मध्य‑पूर्व से अपने अधिकांश कच्चे तेल का आयात करता है, जिसका 70 % से अधिक हिस्सा होर्मुज़ के माध्यम से पास होता है। इस जलडमरूमध्य में लंबी अवधि की बाधा भारतीय रिफ़ायनरियों के भंडारण स्तर को घटा देती और कीमतों में उछाल का कारण बनती। भारतीय शिपिंग कंपनियाँ भी रूट बदलने या समुद्री बीमा बढ़ाने जैसी लागतों के बोझ से जूझ रही हैं।

हालाँकि ट्रम्प का ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ शब्दात्मक रूप से साहसिक लग सकता है, पर वास्तविकता में इसका कार्यक्षेत्र स्पष्ट नहीं है। अमेरिका के पास वर्तमान में कोई आधिकारिक सैन्य प्रवर्तन अधिकार नहीं है, और निजी फर्मों को इस मिशन में शामिल करने की बात भी व्यावहारिक चुनौतियों से भरी है। इस बीच, ईरान की प्रतिक्रिया को देखते हुए, इस कदम से संभावित उल्टा परिणाम—जैसे जहाज़ों की नई बंधक बनने की संभावना—भी नहीं भूलनी चाहिए।

वैश्विक शक्ति संरचनाओं की इस उलझन में, भारत को एक विवेकपूर्ण नीति चुननी होगी: सुरक्षित वैकल्पिक रूट्स का विकास, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण को सुदृढ़ बनाना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत अपनी हितों की रक्षा के लिए कूटनीतिक दबाव बढ़ाना। केवल तभी भारत इस अस्थिर माहौल में ऊर्जा सुरक्षा को बरकरार रख सकेगा।

Published: May 5, 2026