ट्रम्प ने कहा: 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को इरान समझौते की उम्मीद में रोकेंगे
संयुक्त राज्य के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कल सुबह एक बयानी में कहा कि स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ में वाणिज्यिक जहाज़ों को मार्गदर्शन करने के लिए शुरू किया गया "प्रोजेक्ट फ्रीडम" को रोक दिया जाएगा। यह फैसला, उन्होंने कहा, शुरुआती संकेतों के कारण आया है कि इरान के साथ एक संभावित समझौते की दिशा में वार्ता चल रही है।
स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़, जो पेरीशियन खाड़ी को ओमन जल से जोड़ता है, विश्व तेल के सबसे महंगे शॉर्टकटों में से एक है। 2019 में इरान के anti‑ship missiles के सन्दर्भ में हुए तनाव के बाद से यू.एस. नौसेना ने बार‑बार इस जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक नौकाओं को सुरक्षित करने की घोषणा की थी। प्रोजेक्ट फ्रीडम, जिसे दो दिन से कम समय पहले सक्रिय किया गया था, इस उद्देश्य के साथ एक तेज़-तर्रार पहल थी, जिसमें अमेरिकी मिलिटरी कोरस को जहाज़ों के लिए एस्कॉर्ट और संचार समर्थन प्रदान करने का आदेश दिया गया था।
ट्रम्प की घोषणा के बाद, अमेरिकी राजदूतों ने इरानी विदेश मंत्रालय के साथ कई राउंड की टेलीफ़ोनिक बातचीत का ज़िक्र किया। वॉशिंगटन ने “सुरक्षित और स्थिर शिपिंग” के लिए “डिप्लोमैटिक समाधान” की वकालत की, जबकि पेरिस और लंदन जैसी यूरोपीय राजधानी ने भी इसी दिशा में संकेत दिए। फिर भी, इस तेज़ गति वाले संकट‑केन्द्रित ऑपरेशन को रोकना, केवल राजनयिक सलाहकारों के फुसफुसाहट से नहीं, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश देता है: जब डिप्लोमा दिखाता है कि “रास्ता खुल रहा है”, तो बिनबिलिया सैन्य हस्तक्षेप को ‘अस्थायी’ कहा जा सकता है।
इसे भारतीय पाठकों के नजरिए से देखें तो, इस नॉर्थ ओरिएंटल शिपिंग लेन पर भारत का निर्भरता अत्यधिक है। भारत का लगभग 70% समुद्री तेल आयात इस जलडमरूमध्य से होकर गुज़रता है, और भारत की नौसेना भी अपने एंटी‑पाइरेटिक मिशनों के साथ इस क्षेत्र में सतर्क रहती है। प्रोजेक्ट फ्रीडम के अचानक रोका जाना, भारतीय व्यापारी तेल के कीमतों में संभावित अस्थिरता के साथ-साथ बौद्धिक रूप से “काबिल‑ए‑प्रेम” सुरक्षा कवरेज की कमी के सवाल उठाता है। भारतीय शिपिंग कंपनियों ने त्वरित वैकल्पिक मार्गों, जैसे ओमान गोल्फ़ या अफ्रीकी महाद्वीप के चार द्वारों के बारे में विचार किया है—परन्तु ये विकल्प समय, ईंधन और खर्च में कई गुना अधिक हैं।
संस्थागत आलोचना उस पढ़े‑लिखे राजनेता के सन्देश को उजागर करती है, जो “तेज़‑गति” ऑपरेशन की घोषणा करता है, लेकिन फिर “राजनीतिक रणनीति” के बदलने पर उसे “स्थगित” कर देता है। इस तरह के आदेश, अप्रत्याशित, लागत‑बढ़ी और नीति‑सुसंगतता को धूमिल करते हैं। आयरन डोम‑तकनीक से सुसज्जित अमेरिकी जहाज़ों ने पिछले दो दिन में कुल मिलाकर $1.2 बिलियन के अल्पकालिक अनुबंधों को हाथ में लिया हुआ रहा, जबकि अब इन अनुबंधों को “भविष्य में पुनः विचार” के तहत बंद कर दिया गया है।
सारतः, ट्रम्प का यह “सेइंग‑हॉल” निर्णय, जहाँ आँखों में एक झलक “इंक्लिंग पर समझौता” की है, वहीं अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और समुद्री सुरक्षा के बीच छोटे‑छोटे अंतर को भी उजागर करता है। यदि समझौता ठोस हो जाता है, तो विश्व व्यापार में राहत मिल सकती है, परन्तु ऐसी “भुगतान‑रहित” ठहराव की अवधि, यदि बहुत अधिक बढ़ती है, तो वैश्विक तेल बाजार में थरथराहट और भारतीय जैसा बड़ा खरीदार शिपरेंग के लिए नई अस्थिरता का कारण बन सकती है। यह सम्मिलित नीति‑निर्णय, शांति‑उपकरण और सैन्य‑दिखावटे के बीच की दूरी को फिर से परिभाषित करने का अवसर भी बन सकता है।
Published: May 6, 2026