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Category: दुनिया

ट्रम्प की जर्मनी से और सैनिक हटाने की चेतावनी से रिपब्लिकन घबराए

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दो हफ्ते पहले जर्मनी से 5,000 सैनिक हटाने की घोषणा कर इंट्रैक्टिव इन्टर्नेट को आश्चर्यचकित कर दिया था, जब जर्मन चांसलर ने दावा किया था कि इरान के कदमों से अमेरिका को "शर्मिंदा" किया जा रहा है। उस फैसले के बाद भी जर्मनी में लगभग 30,000 अमेरिकी सैनिकों की एंट्री बनी रही, लेकिन ट्रम्प ने शनिवार को फिर से संकेत दिया कि यह संख्या और घटेगी। "हम और भी कटौती करेंगे, 5,000 से कहीं अधिक," उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा।

रिपब्लिकन दल के भीतर इस घेराबंदी के लिए तनाव स्पष्ट है। कई वरिष्ठ पार्टी सदस्यों को लगता है कि NATO के भीतर अमेरिकी प्रतिबद्धता को कमजोर करना ट्रम्प की पार्टी के भीतर और भी विभाजन पैदा कर सकता है। उनका आरोप है कि रणनीतिक साझेदारों को “बिल्ली के पीछे की हवा” जैसा एहसास हो रहा है और यह धक्का यूरोपीय सुरक्षा ढांचे को हिलाने की संभावना रखता है।

विपरीत रूप से, जर्मनी ने इस कदम को अपने राष्ट्रीय रक्षा बजट को बढ़ाने और यूरोपीय सुरक्षा का बोझ स्वयं उठाने के अवसर के रूप में प्रस्तुत किया है। हालांकि, ट्रम्प की नई धमकी म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के लिए अनपेक्षित तनाव का कारण बन सकती है, जहाँ संयुक्त राज्य की प्रतिबद्धता का सवाल ही उठ चुका है।

वैश्विक संदर्भ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उभरते हुए चीन, लगातार रूसी ऊर्जा दबाव, और मध्य-पूर्व में इरान की बढ़ती रेटोरिक, सभी मिलकर अमेरिकी रक्षा नीति की पुनःपरिभाषा को प्रेरित कर रहे हैं। ट्रम्प ने “अमेरिकी प्राथमिकताओं को यूरोप से बाहर ले जाने” का आह्वान किया है, जिसका मतलब है कि यूरोपीय शरणा की जगह अब शान्ति की नई राह—शायद प्रशांत के सुदूर द्वीपों—की ओर धकेला जाएगा।

भारत इस खेल का कोई बेपरवाह दर्शक नहीं है। नई दिल्ली ने हाल ही में जर्मनी के साथ उच्चस्तरीय रक्षा सहयोग को सुदृढ़ किया है, और अमेरिका के साथ भी ‘एंटरप्राइज’ काउंटर‑ड्रोन साझेदारी को आगे बढ़ा रहा है। यदि अमेरिकी सैनिकों की जर्मनी से निकासी तेज़ी से होती है, तो यूरोपीय सुरक्षा संरचना में बदलाव भारत की यूरोपीय सुरक्षा गारंटी पर निर्भरता को पुनःस्थापित कर सकता है। साथ ही, NATO के भीतर अमेरिकी घटाव के कारण चीन-भारत‑अमेरिका त्रिकोणीय संतुलन पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि यूरोप की सुरक्षा अस्थिरता एशिया‑प्रशांत में ऊर्जा और औद्योगिक साझेदारियों को प्रभावित कर सकती है।

सारांश में, ट्रम्प की “और सैनिक हटाने” की घोषणा सिर्फ एक अटलांटिक नीति के छोटे‑छोटे टुकड़े नहीं, बल्कि एक बड़े युद्धक्षेत्र की तैयारी का संकेत है—जहाँ सैद्धांतिक तौर पर ‘सुरक्षा’ और ‘बाजार’ शब्द को मिलाकर एक नया दुनिया क्रम तैयार किया जा रहा है। एक समय में जो NATO को “परमाणु बचाव कवच” कहता था, अब वह “राजनीतिक कवच” की ही तरह पहुँच सकता है, परन्तु वह कवच झूठी सुरक्षा की लकीर तक ही सीमित रहेगा।

Published: May 3, 2026