ज़ेलेंस्की ने रूसी ‘निंदकता’ की निंदा की, परेड के लिए युद्धविराम का पर्दाफाश
किएव के राष्ट्रपति व्लादिमीर ज़ेलेंस्की ने 5 मई को रशिया के उस प्रस्ताव को 'अत्यधिक निंदकता' कहा, जिसमें वह अपने सैन्य परेड की पृष्ठभूमि में एक क्षणिक युद्धविराम की माँग कर रहा है। इस प्रस्ताव के साथ ही, मॉस्को के ‘रात के आकाश में पवित्र शांति’ का एक अनपेक्षित विरोधाभास सामने आया, क्योंकि रूसी सेनाएँ पिछले कई महीनों से यूक्रेन पर निरंतर मिसाइल और ड्रोन हमला जारी रख रही हैं।
राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा, "रूस को अपने शस्त्र-सज्जित जुलूस के लिए 'शांति' का नकाब पहनना पड़ेगा, जबकि वह हर दिन नयी हवाई हमले कर यूक्रेन की सड़कों को खून से रंग रहा है।" यह टिप्पणी तब सामने आई, जब यूक्रेन के दक्षिणी शहर ज़ापोरिज़िया में एक तीव्र हवाई हमला हुआ, जिसमें कम से कम 12 नागरिक मारें गए। क्षेत्रीय गवर्नर इवान फेदोरोव ने टेलीग्राम पर लिखा - "रूस ने 12 लोगों की जान ली।" कुल मिलाकर, इस हफ्ते के विभिन्न क्षेत्रों में किए गए रॉकेट और ड्रोन प्रहारों से 23 लोग मृत्युदंडित हुए।
रूसी दावों और वास्तविक कार्यों के बीच का यह अंतर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक नई मिठास जोड़ता है। जबकि रूसी विदेश मंत्रालय ने ‘मानवीय अंतराल’ की भाषा अपनाई, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थिरता और पश्चिमी गठबंधन की कठोर चेतावनी ने इस दावे को धूमिल कर दिया।
भारत के लिए यह द्विपक्षीय गतिशीलता केवल एक दूरस्थ भू-राजनीतिक खेल नहीं है। भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी, विशेषकर एंटी-ड्रोन प्रणाली और ईंधन आपूर्ति के संदर्भ में, इस संघर्ष के शैडो में परकी रह जाती है। साथ ही, भारत के NATO‑समान द्विपक्षीय मंचों में भागीदारी और यूक्रेन‑रूस में सुरक्षा सहयोग की सीमित शर्तें, नीति-निर्माता को इस दोहरी मापदंडी स्थिति की तीव्र जाँच पर लाती हैं।
वास्तव में, जहाँ रूस को अपने ‘सैन्य परेड’ के लिए अंतरराष्ट्रीय ध्वनि‑स्तर की वैधता चाहिए, वहीं उसकी लगातार हवाई हमले एक असफल ‘शांति’ का नॉस्टैल्जिक अल्बम बनाते हैं। यह दिखाता है कि बड़े शक्ति‑हाउस कितनी आसानी से सार्वजनिक इशारा और कलंक के बीच स्विच कर सकते हैं—जैसे बाढ़ के बाद एसी चालू करना, लेकिन ठंडे पानी का इंतज़ार नहीं कर पाना।
परिणामस्वरूप, यूक्रेन के नागरिकों की पीड़ा बढ़ी, अंतरराष्ट्रीय आश्वासन के वादे धुंधले पड़े, और भारत को अपना सुदृढ़ रक्षात्मक तंत्र एवं कूटनीतिक संतुलन फिर से परखना पड़ेगा। इस नाजुक चरण में, ‘परिचालित शांति’ की तुलना में वास्तविक सुरक्षा कवच की आवश्यकता स्पष्ट है।
Published: May 6, 2026