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Category: दुनिया

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गिब्राल्टर में कच्ची सीवेज का निरंतर निर्वहन, भूमध्य सागर को दूषित

ब्रिटिश विदेशी क्षेत्र गिब्राल्टर, जहाँ लगभग 40,000 लोग व व्यवसाय अपने दैनिक अपशिष्ट जल को सॉफ़्ट ड्रिंक के रूप में समुद्र में बहा रहे हैं, ने अब आधे दशक से अधिक समय तक कोई जल उपचार सुविधा स्थापित नहीं की। परिणामस्वरूप, कच्चा सीवेज सीधे यूरोपा पॉइंट की खाड़ी में बह रहा है – एक ऐसी जगह जिसे स्थानीय प्रशासन "प्राकृतिक प्रसार के उच्च स्तर" का हवाला देते हुए औचित्य बनाता है।

यह मामला सिर्फ एक छोटे‑से द्वीप का पर्यावरणीय लापरवाही नहीं है; यह यूरोपीय जल क़ानून (वॉटर फ्रेमवर्क डायरेक्टिव) और अंतरराष्ट्रीय समुद्री प्रदूषण समझौतों के साथ स्पष्ट टकराव दर्शाता है। स्पेन, जो गिब्राल्टर की सीमांत पड़ोसी है, ने बार‑बार इस मुद्दे को उठाया है, लेकिन ब्रिटिश सरकार की अनिच्छा या बजट प्रतिबंधों के चलते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

लगभग दो दशकों से गिब्राल्टर की जल निकासी प्रणाली में प्रगति नहीं हुई, जबकि यूरोपीय संघ में कई छोटे‑छोटे शहरों ने अपनी जल‑शुद्दीकरण प्रणाली को 2030 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा है। ब्रिटिश विदेश विभाग का कहना है कि “प्राकृतिक प्रसार” पर्याप्त है, पर यह बयान अब “समान्यकरित लापरवाही” के निकट पहुँच चुका है – विशेषकर जब समुद्री जीवों में एंटीकायीनिक बायोडेग्रेडेबल पदार्थों के स्तर में गिरावट दर्ज की गई है।

इसी संदर्भ में भारतीय हितधारकों को भी सतर्क रहना चाहिए। भारतीय क्रूज टूर ऑपरेटर अपने जहाजों को भूमध्य सागर के कई बंधनों के माध्यम से ले जाते हैं, और गिब्राल्टर के निकटवर्ती जल में बढ़ता प्रदूषण उनके यात्रियों के स्वास्थ्य एवं समुद्री जलीय पर्यावरण के संरक्षण को प्रभावित कर सकता है। साथ ही, भारतीय जलवायु वनों एवं समुद्री जीव विज्ञान के शोध टीमों के लिए भी यह एक संभावित अध्ययन बिंदु बनता जा रहा है – यदि वे इस जल‑प्रदूषित क्षेत्र में प्रवेश करने को तैयार हों।

आधिकारिक तौर पर, गिब्राल्टर की सरकार ने “पूर्ण एकीकृत जल‑शुद्दीकरण परियोजना” को 2028 तक कार्यान्वित करने का वादा किया है। लेकिन पिछले घोषणाओं की तरह, इस बार भी समय‑सीमा और वित्त पोषण की अस्पष्टता नज़र आती है। यह देखना बाकी है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव, विशेषकर यूरोपीय संघ और पर्यावरणीय गैर‑सरकारी संगठनों की साझेदारी, इस डिक्टेट को किस हद तक बदल पाएगी। वर्तमान में, भूमध्य सागर की लहरें गिब्राल्टर के कच्चे अपशिष्ट जल की “प्राकृतिक प्रसार” को सहन कर रही हैं – और यह कहानी तब तक जारी रहेगी जब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।

Published: May 6, 2026