ऑस्ट्रेलिया के बजट पर ऊर्जा‑संकट, लिडिया थॉर्पे ने अल्बानिज़ को इज़राइल की निंदा करने की मांग
विकल्प पार्लियामेंट सदस्य लिडिया थॉर्पे ने आज प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानिज़ से आग्रह किया कि वे गाज़ा जलपर्यटन के इज़राइल द्वारा अवरोध को निंद्य बनाएँ। यह आह्वान एक ऐसा समय आया है जब ऑस्ट्रेलिया खुद ‘वैश्विक तेल की सर्पिल’ में फँसा हुआ है, क्योंकि यू.एस.-इज़राइल‑ईरान तनाव ने तेल की कीमतों को ‘कच्ची लहर’ बना दिया है।
वित्त मंत्री जिम चार्मर्स ने बताया कि अगले मंगलवार के बजट में 26 सेंट की ईंधन कर कटौती को जून के बाद नहीं बढ़ाया जाएगा। इसके बजाय उन्होंने एक “विविध आपातकालीन योजना” की बात की, जिससे घरेलू परिवारों और समग्र अर्थव्यवस्था को मध्य पूर्व के संघर्ष से उत्पन्न संभावित कीमतों के झटके से बचाया जा सके। बजट का स्वर आर्थिक अनिश्चितता, वैश्विक महंगाई और ऊर्जा असुरक्षा के बीच “अधिक महत्वाकांक्षी सुधार” पर रहता है।
ऑस्ट्रेलिया और जापान ने संयुक्त रूप से ऊर्जा प्रवाह को “समर्थन” करने का वचन दिया। यह शब्द‑बोली अधिकतर पेट्रोलियम, गैस और संभवतः रीफ़्यूलिंग इंफ़्रास्ट्रक्चर की निरंतर आपूर्ति को सुरक्षित रखने की कोशिश को दर्शाती है। दो देश, जो स्वयं तेल आयात पर भारी निर्भर हैं, अब ऐसा प्रतीत होते हैं जैसे किसी योग सत्र में “श्वासोच्छ्वास” को व्यवस्थित कर रहे हों, जबकि वास्तविक नीति‑निर्माण में न तो स्पष्ट लक्ष्य हैं, न ही पर्याप्त वित्तीय भार‑साझाकरण।
भारत के पाठकों के लिए यह विकास दोहरी चिंता उत्पन्न करता है। भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है; मध्य‑पूर्व में ऊँचे तेल की कीमतें सीधे हमारे ईंधन, परिवहन और खाद्य मूल्य पर असर डालती हैं। ऑस्ट्रेलिया‑जापान का ऊर्जा‑समर्थन बैनर, यदि वास्तविकता में उत्पादन‑आधारित प्रतिबद्धता नहीं, तो यह सिर्फ एक “जैविक विविधता” की तरह रहेगा, जिसका लाभ भारत को सीमित ही मिलेगा।
भवन नीति‑घोषणाओं और वास्तविक परिणामों के बीच फासला स्पष्ट है। ऑस्ट्रेलिया के बजट में “एक्सटेंशन नहीं” का उल्लेख, जबकि तेल‑कीमतों के अस्थिर प्रवाह को नियंत्रित करने के लिये “विविध आपातकालीन योजना” की बात, यह दोहरी मानकों की तरह दिखता है। आधी बात में सरकार राजकोषीय संरक्षण का जाहीर करती है, तो दूसरी ओर वही ऊर्जा‑संकट को “समर्थन” की घोषणा कर, अपने ही साथियों को भी अस्थिर बनाती है।
वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो यह स्थिति ताकत‑संतुलन की नई उलझन को उजागर करती है: संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल की रणनीतिक गठबंधन, ईरान के प्रति प्रतिशोधी कदम, तथा यूरोप‑एशिया के बीच ऊर्जा सुरक्षा का खेल। मध्यम‑पूर्वी संघर्ष की लहरें अब भी पेट्रोलियम‑बाजार में “हॉस्टेज” बना हुआ है, और ऑस्ट्रेलिया, जो स्वयं को “उच्च ऊर्जा कीमतों की शिकार” कह रहा है, दोहरी नीति‑पुस्तिका को जारी रख रहा है।
संक्षेप में, इस मंगलवार का बजट न केवल ऑस्ट्रेलिया के घरेलू आर्थिक पहलुओं को छुएगा, बल्कि विश्व ऊर्जा बाजार में नई अस्थिरताओं को उजागर करेगा। भारत को इस पर नज़र रखनी होगी, क्योंकि हमारी ऊर्जा‑आधारभूत संरचना, आयात‑निर्भरता और घरेलू महंगाई सभी इसी धागे से जुड़े हैं।
Published: May 4, 2026