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ऑस्ट्रेलिया के फेडरल बजट में मेलबोर्न के सबर्बन रेल लूप को $3.8 बिलियन अतिरिक्त निधि

पृथ्वी के दक्षिणी हिस्से में असंतुलित बजट प्रबंधन के एक और उदाहरण में, ऑस्ट्रेलिया सरकार ने अपना नया फेडरल बजट पेश करने से पहले, मेलबोर्न के विवादास्पद 90 किमी लंबी Suburban Rail Loop (SRL) परियोजना को अतिरिक्त US$3.8 बिलियन की फंडिंग देने का निर्णय किया है। यह घोषणा प्रधानमंत्री एंटनी अल्बानीज़े और विक्टोरिया राज्य की मुख्यमंत्री जैसिंटा एलन द्वारा शुक्रवार को संयुक्त रूप से की जाएगी, ठीक 12 मे के बजट मंचन से पहले।

SRL को 2022 में लाँच किया गया था, और तब से यह लागत‑वृद्धि, पर्यावरणीय अनुमोदन और राजकीय वादे के बीच फँसकर "अंतहीन रेल‑गाथा" बन गई है। मूल अनुमान के अनुसार परियोजना की कीमत लगभग AU$80 बिलियन थी; अब इसे लगभग AU$84 बिलियन तक बढ़ा दिया गया है, जिसमें फेडरल सरकार का नया योगदान स्पष्ट रूप से लागत‑उत्थान को कम करने के बजाय उसे और बढ़ा रहा है।

राज्य चुनाव के इंतजार में, विक्टोरिया के प्रभारी एलन का यह कदम स्पष्ट रूप से चुनावी रणनीति के अनुरूप है। 12 नवंबर को होने वाले राज्य चुनाव में, सरकार को सार्वजनिक परिवहन के सुधार का वादा करके वोटों की उम्मीद है, जबकि वास्तविकता में यह धंसते प्रोजेक्ट के दायरे को बढ़ाने और मौजूदा घाटे को छुपाने की कोशिश लगती है। अल्बानीज़े के लिए, यह बड़ा फंडिंग पैकेज अपने स्वयं के पार्टी को "इन्फ्रास्ट्रक्चर‑दिग्गज" के रूप में प्रस्तुत करने का तरीका बन सकता है, विशेषकर जब G7 देशों द्वारा बुनियादी ढाँचा निवेश को आर्थिक पुनरुद्धार का साधन बताया जा रहा है।

वैश्विक संदर्भ में, इस प्रकार की बड़े‑पैमाने की रेल परियोजनाएँ अब सामान्य हो गई हैं—चीन की हाई‑स्पीड नेटवर्क, यू.एस. की हाई‑स्पीड ट्रेन पहल, और भारत के मेट्रो एवं सडकों के विस्तार के समान। भारतीय पाठकों के लिए सबसे निकटतम तुलना दिल्ली मेट्रो की हालिया लागत‑वृद्धि और अजेय पर्यावरणीय मानदंडों से की जा सकती है। दोनों देशों में, सरकारें अक्सर लागत‑वृद्धि को "पर्यावरणीय सुरक्षा" या "अधिक सटीक डिजाइन" के नाव में लपेटती हैं, जबकि वास्तविक कारण अक्सर अनुबंध‑दिवालिया, तकनीकी अति‑आशावाद और समय‑सीमा का दुरुपयोग होते हैं।

नीति‑प्रभाव की बात करें तो, जो भी अतिरिक्त फेडरल फंडिंग इन प्रोजेक्ट्स में जोड़ती है, वह राज्य‑केंद्रीय वित्तीय अनुशासन को कमजोर करती है। राज्य को अपने बजट में कटौती करने या कर बढ़ाने की ज़रूरत नहीं पड़ती, इसलिए वह "किसी को नहीं पूछते" की मनोवृत्ति अपनाता है। इससे दीर्घकालिक सार्वजनिक ऋण में वृद्धि और निजी निवेशकों के भरोसे में कमी आ सकती है, जैसा कि कई पूर्वी यूरोपीय देशों में देखा गया है।

इसी बीच, सार्वजनिक प्रतिक्रिया मिश्रित है। कुछ उपयोगकर्ता एक दोगुनी‑पटरिया रेतबोर की तरह चलने वाले प्रोजेक्ट से आशा रखते हैं कि वह शहर के बाहरी क्षेत्रों को केंद्र के करीब लाएगा, जबकि अन्य इसे "सीटा‑टैक्सी" का नया रूप मानते हैं, जहाँ असली लाभ टैक्टिकल राजनेताओं को मिल रहा है, न कि दैनिक यात्रियों को।

आखिरकार, इस घोषणा की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि बजट में नई धनराशि जोड़ना ही अक्सर लागत‑वृद्धि के मूल कारण—अप्रकाशित योजना, ख़रापन‑भरे अनुबंध और राजनीतिक अभ्यस्तता—को नहीं मिटाता। यदि इस तरह की परियोजनाएँ बिना ठोस जवाबदेही के आगे बढ़ती रहती हैं, तो ऑस्ट्रेलिया, भारत और अन्य विकासशील अर्थव्यवस्थाएँ समान बिंदु पर पहुँच जाएँगी: जहां इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश सिर्फ "इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि एक चुनावी उपकरण" बन जाता है।

Published: May 7, 2026