ऑस्ट्रेलिया के इन-होम बाल देखभाल योजना को बढ़ती लागत से खतरा, 800 परिवारों की सुरक्षा दांव पर
ऑस्ट्रेलिया के कम ज्ञात सार्वजनिक बाल देखभाल कार्यक्रम, जो दूरस्थ इलाकों और विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिये घर-घर में सेवा देता है, अब बढ़ती लागत के कारण अस्तित्व संकट में है। राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस योजना का फायदा लगभग 800 परिवारों को मिल रहा है—जिनमें दुर्दांत स्वास्थ्य या विकलांगता वाले बच्चे, या अनियमित काम वाले माता‑पिता शामिल हैं।
नॉरदर्न टेरिटरी के कैथरिन के लगभग 100 किलोमीटर दक्षिण‑पश्चिम में पशुपालन करने वाली रेबीका मोर बेल, तीन छोटे बच्चों की माँ, ने 2018 से ही इस सुविधा पर भरोसा किया। उनका कहना है कि बिना इस व्यवस्था के उनके बच्चों की देखभाल का मुद्दा असहनीय बन जाता। लेकिन अब, लागत वृद्धि के कारण सरकार ने बजट में कटौती की संभावना जताई है, जिससे इस ‘सुरक्षा जाल’ के टूटने का डर बढ़ गया है।
आलोचक तर्क देते हैं कि योजना की पारदर्शिता ही आधी समस्या है। बजट अनुरोधों को अक्सर ‘अनुत्पादक प्रशासनिक खर्च’ के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, जबकि वास्तविक खर्च—प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं के वेतन, सुरक्षा उपकरण और यात्रा लागत—बढ़ते ही जा रहे हैं। परिणामस्वरूप, कुछ क्षेत्रों में देखभालकर्ता आधी वेतन पर काम करने के लिए मजबूर हो रहे हैं, जिससे ‘सुरक्षित नहीं’ की चेतावनी वैध हो रही है।
वैश्विक स्तर पर, इस प्रकार के सामाजिक सुरक्षा उपायों की अस्थिरता कई मौजूदा बहसों को उजागर करती है। जबकि भारत में अंखड़वाड़ी और नॉटेज प्री‑स्कूल जैसी पहलों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में बाल देखभाल की कोशिशें जारी हैं, ऑस्ट्रेलिया में इस छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कार्यक्रम के पतन का संकेत है कि सार्वजनिक निधियों पर निर्भर मॉडल, जब आर्थिक दबाव बढ़ता है, तो जल्दी ही बुनियादी सेवाओं की कीमत चढ़ा देते हैं।
नीति‑निर्माताओं को न केवल तुरंत फंडिंग में वृद्धि करके इस संकट को रोकना चाहिए, बल्कि दीर्घकालिक सततता के लिये एक स्पष्ट मूल्यांकन ढाँचा भी तैयार करना चाहिए। अन्यथा, ‘सर्वोच्च सार्वजनिक हित’ का पोत ढह सकता है—और फिर वह पोत किसी भी नाविक के लिए नहीं, बल्कि उन बच्चों के लिए भी नहीं रहेगी, जिनके सपने अब दूरस्थ टापुओं पर पनप रहे थे।
Published: May 4, 2026