एफ़आईए ने 2030 तक फॉर्मूला वन को पुनः वी8 इंजन पर लौटाने की घोषणा की
मियामी ग्रां‑प्रि के चरण में, अंतर्राष्ट्रीय मोटरस्पोर्ट संघ (FIA) के अध्यक्ष मोहम्मद बैन सुलैम ने रोमांचक लेकिन विवादास्पद एक समय‑सारिणी पेश की। उन्होंने कहा कि 2030 तक फॉर्मूला वन के पहियों के नीचे फिर से पारंपरिक V8 इंजन स्थापित किए जा सकते हैं, जिससे इस बात का इशारा मिलता है कि इलेक्ट्रिक‑हाइब्रिड कारों की ‘क्रांतिकारी’ धारा धीरे‑धीरे क्षीणित हो रही है।
वर्तमान में, फॉर्मूला वन ने 2014 में हाइब्रिड पावरट्रेन अपनाकर कार्बन‑उत्सर्जन को घटाने और तकनीकी नवाचार को तेज करने का लक्ष्य रखा था। लेकिन प्रशंसकों और टीमें दोनों ने अक्सर यह आरोप लगाया कि जटिल हाइब्रिड सिस्टमें ध्वनि‑प्रेमियों की अपेक्षा के अनुरूप नहीं है, और लागत में बढ़ोतरी ने छोटे टीमों को पीछे धकेल दिया है। बैन सुलैम ने इन बिंदुओं को स्वीकार करते हुए कहा, “व्यावहारिकता, शोर और सस्पेन्स की भावना के बिना फॉर्मूला वन अधूरा है।”
इस निर्णय के कई स्तर होते हैं। प्रथम, यह FIA की स्वयं की नियामक नीति में एक स्पष्ट उलटावा दर्शाता है—जैसे ही अंतर्राष्ट्रीय जागरूकता जलवायु परिवर्तन के खिलाफ तेज होती है, मोटरस्पोर्ट के भीतर “पर्यावरणीय ट्यून‑इन” को पुनः विचार किया जा रहा है। द्वितीय, यह प्रायोजन और टेलीविजन अधिकारों के आर्थिक समीकरण को प्रभावित करेगा; शोर‑प्रेमी दर्शक वर्ग के पुनरुत्थान से संभावित विज्ञापन राजस्व बढ़ेगा, जबकि इलेक्ट्रिक‑पश्चिमी भागीदारों को कभी‑कभी राजी करना पड़ेगा।
विरोधी पक्ष भी कम नहीं। कई पर्यावरणीय समूह और कुछ प्रमुख राष्ट्रीय सरकारें, जिनमें यूरोपीय संघ की हरित वाणिज्य नीति भी शामिल है, इस कदम को “वापसी की अनावश्यक नीति” कह कर जंजाल में डाल सकते हैं। भारतीय संदर्भ में देखें तो, भारत ने 2011‑2013 के बीच फॉर्मूला वन ग्रां‑प्रि को अपना प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खेल मंच बनाया था, लेकिन प्रतिस्पर्धी लागत और तकनीकी बाधाओं के कारण वह कई वर्षों से गायब है। यदि फॉर्मूला वन V8 पर वापस जाए तो यह फिर से भारतीय दर्शकों को आकर्षित करने का एक साधन बन सकता है, जहाँ कार ध्वनि और गति का मेल अभी भी बड़े पैमाने पर पसंद किया जाता है। साथ ही, भारत की मोटरस्पोर्ट उत्सव की बढ़ती माँग और स्थानीय निर्माता कंपनियों की संभावित साझेदारी इस बदलाव को आर्थिक अवसर में बदल सकती है।
अंत में, ‘इलेक्ट्रिक क्रांति’ के लुप्त होते स्पार्क को फिर से जगा कर, FIA एक बार फिर मोटरस्पोर्ट की दिशा पर नीति‑विचार को उजागर कर रही है। चाहे यह कदम तकनीकी नवाचार को धीमा करे या प्रशंसकों के दिल में फिर से आग भड़ाए, इसका प्रभाव 2030 से आगे भी कार्बन‑कट रणनीति और वैश्विक शक्ति‑संतुलन के बीच की खाई को दर्शाएगा।
Published: May 4, 2026