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इरान ने कराज के जलते पुल को प्रतिरोध का प्रतीक बना दिया
तेहरान के दक्षिण‑पश्चिमी उपनगरीय क्षेत्र में स्थित कराज पुल पर हालिया बमबारी ने इरानी अधिकारियों को एक त्वरित राष्ट्रीय कथा तैयार करने के लिए प्रेरित किया। इस पुल को, जो B1 कॉरिडोर का अहम हिस्सा है, अब ‘प्रतिरोध की शहदिया’ कह कर शत्रु‑उग्रता के खिलाफ़ जनसमर्थन जुटाने का साधन बनाया गया है।
B1 कॉरिडोर सिर्फ इरान के राजधानी को उत्तरी‑पश्चिमी क्षेत्रों से जोड़ता ही नहीं, बल्कि इस रीति‑रिवाज में बड़ी एज़राई जनसंख्या वाले क्षेत्रों को भी जोड़ता है। कराज में स्वयं एक उल्लेखनीय एज़राई समुदाय रहता है, जबकि टाबरिज़ जैसे शहर लगभग पूरी तरह एज़राई‑निवासियों से घिरे हैं। इस तथ्य को नई सरकार ने चुपके से उपयोग किया, यह संकेत देते हुए कि बमबारी न केवल राष्ट्रीय संस्थाओं पर, बल्कि एज़राई‑विरासत वाले लोगों के आत्म‑निर्णय पर भी एक नाजायज़ हमला है।
इरानी प्रेस विभाग ने तुरन्त एक बैनर स्थापित कर, पुल के ध्वस्त हिस्से को ‘इबादत‑ए‑हिंसा’ की जगह ‘इबादत‑ए‑हिम्मत’ कहकर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस कदम पर कुछ राष्ट्रीय कवियों ने तय किया कि “पुल तो पुल है, पर उसे प्रतिरोध के रूप में ढालना आसान नहीं”—एक हल्की‑फुकी तंज भी इस अभिजात्य‑राजनीतिक मंच की अभिव्यक्ति बन गई।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय दायरे में इस घटना की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत मन्द रही। संयुक्त राज्य ने “सभी पक्षों से शांति और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के तहत उचित जांच” की माँग रखी, जबकि यूरोपीय संघ ने आधिकारिक बयान में केवल “नए विकसित सुरक्षा खतरे” का उल्लेख किया। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस विकास को “क्षेत्रीय स्थिरता के लिये चिंता का विषय” के तौर पर दर्ज किया, क्योंकि कारज के निकट स्थित एज़राई-समुदाय वाले क्षेत्रों में संभावित ऊर्जा ट्रांसपोर्ट मार्गों पर तनाव बढ़ सकता है।
आंतरिक रूप से, इस प्रतीकात्मकरण ने कई प्रश्न खड़े किए हैं। बमबारी के बाद सरकार ने सुरक्षा बलों को सुदृढ़ कर दिया, कई सामाजिक नेटवर्क पर अधिनियामक निगरानी बढ़ाई, और असहमति व्यक्त करने वालों को “विदेशी एजेंट” का लैबल दिया। यह स्पष्ट है कि राष्ट्रीय भावनाओं को उजागर करने के साथ‑साथ असंतोष के स्वर को दबाया जा रहा है।
इस प्रकार, कराज का जलता पुल राष्ट्रीय एकजुटता का मंच बन गया है, लेकिन यह मंच अक्सर एकतरफ़ा या तो सरकार के प्रवर्तनों को सुदृढ़ करने या संकुचित करने का काम करता है। ऐसी प्रतीकात्मक राजनीति, जो अंतर्राष्ट्रीय शर्तों के बीच सरसराती है, अक्सर वास्तविक नीति‑परिणामों और जनसंघर्ष के बीच की दूरी को बढ़ा देती है। असल में, पुल की खंडहर ही वह वास्तविक ‘सेतु’ बन गया है, जहाँ अधिकारियों और जनता के बीच की आँखों में आँसू मिलते‑जुलते हैं—और यह अंतर नहीं, बल्कि इरान की व्यापक राष्ट्रीय रणनीति का एक हिस्सा है।
Published: May 9, 2026