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इरान की नॉबेल विजेता नार्ज़े मोहममादी की स्वास्थ्यस्थिति खतरे में: परिवार को अस्पताल परिवर्तन से रोकता सुरक्षा दल
तेहरान के एक कारागार में बंद मानवाधिकार कार्यकर्ता नार्ज़े मोहममादी, जो 2023 में शांति के नॉबेल पुरस्कार की धारा में बंधी थीं, वर्तमान में जीवन‑धाम पर झूल रही हैं। उनका परिवार, जो इस बात से निराश है कि सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें राजधानी के बेहतर अस्पताल में स्थानांतरित करने से रोका है, ने दुहाई से भारत‑ईरान संपर्कों तक अपनी तीखी शिकायत को पहुंचा दिया है।
वहाकि अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने कई बार इरान के जेलों में कैदियों के लिए अस्पताल‑हस्तक्षेप के अधिकार की माँग की थी, इस बार सुरक्षा बलों ने एक स्पष्ट संकेत दिया कि मोहममादी को तेहरान की उन्नत सुविधाओं तक पहुँच नहीं दी जाएगी। उनका कहना है कि यह कदम न केवल चिकित्सा मानकों की अनदेखी है, बल्कि प्रतिबंधित विरोध के संभावित साक्ष्य को भी छुपाने का एक रणनीतिक कदम हो सकता है।
इस घटना को भारतीय पाठकों के लिए भी महत्त्वपूर्ण माना जाता है। भारत, जो ऊर्जा‑सुरक्षा के कारण इरान के साथ वैरायटी सेभिद्य कुशलताओं पर निर्भर है, अक्सर कूटनीतिक दुविधाओं का सामना करता है। भारत‑इरान व्यापार मार्गों का विस्तार, विशेषकर वैकल्पिक सड़क‑मार्ग और ऊर्जा‑सहयोग के पहलुओं को देखते हुए, नई दिल्ली को इस मानवीय मामला पर संतुलन‑पूर्ण प्रतिक्रिया देनी होगी, जहाँ बयानों में अक्सर ‘मानवाधिकार सम्मान’ शब्द का प्रयोग किया जाता है, परन्तु ठोस कदमों की कमी स्पष्ट है।
इसी बीच, पश्चिमी सरकारों ने इरान के न्यायिक ढाँचे की निरंतर आलोचना की है और मोहममादी को ‘त्रुटिविहीन मुक्ति’ की मांग की है। लेकिन व्यावहारिक तौर पर, इरान की सुरक्षा संरचनाएँ वैधता की एक झलकी भी नहीं दिखातीं। उन्हें खुद की ‘सुरक्षा’ के आड में अंतरराष्ट्रीय मानकों से बंधन तोड़ने की अनुमति नहीं मिलती। इस असंगतिपूर्ण नीति के पीछे छिपा है एक बेतुका परिकल्पना कि मानवाधिकारों की रोकथाम राष्ट्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक है – एक तर्क जो न केवल निरर्थक है, बल्कि कूटनीति की पराकाष्ठा को भी तुच्छ बनाता है।
तथ्य यह है कि मोहममादी की स्थिति, यदि शीघ्रता से चिकित्सा देखभाल न मिल पाई तो मृत्यु तक पहुँचना संभव है। उनका परिवार अब इरान के उच्चतम एलीट अधिकारियों से अंतिम अनुरोध कर रहा है: «इसे तेहरान के किसी मानद अस्पताल में ले जाएँ, नहीं तो यह नाउम्मीद बयान केवल एक निरर्थक राजनयिक खेल बन कर रह जाएगा।»
संक्षेप में, इरान की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा मोहममादी को अस्पताल परिवर्तन से रोकना एक स्पष्ट संकेत है कि अधिकार‑रक्षक मौलिक संरचना के भीतर रोशनी नहीं देखी जाएगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की शब्द‑बाजी अब निराशाजनक रूप से सिर्फ़ कागज पर लिखी हुई है, जबकि कोई वास्तविक कार्रवाई नहीं हो रही। भारत को इस मामले में केवल सार्वजनिक बयानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए; यदि वह असली ऊर्जा‑सुरक्षा और समुद्री व्यापारिक हितों को बनाए रखना चाहता है तो उसे इरान के मानवीय उल्लंघनों को बिना कसौटी के नहीं देखना चाहिए।
Published: May 7, 2026