इज़राइली बलों ने नाबलुस में किया तीव्र जाँच, 26 वर्षीय फिलिस्तीनी की मौत
इज़राइल की सेना ने 3 मई, 2026 को पश्चिमी किनारे के नाबलुस शहर में एक गहन जाँच संचालन चलाया, जिसमें 26 वर्षीय फिलिस्तीनी नागरिक की जान ली गई। इस घटना ने आधी रात के बाद शुरू हुए कई छोटे‑मोटे टकराव के क्रम में एक नई मृत्यु को जोड़ा, जो इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव की गवाह है।
नाबलुस, जो ऐतिहासिक रूप से फिलिस्तीनी राजनैतिक दलों का एक प्रमुख ठिकाणा रहा है, पिछले कुछ हफ़्तों में इज़राइली सुरक्षा बलों द्वारा कई बार घेराबंदी, घरों की तलाशी और बिंदु-से-बिंदु टकराव का सामना कर चुका है। इस बार के ऑपरेशन की आधिकारिक पृष्ठभूमि अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है, परन्तु इज़राइल ने अक्सर कहा है कि यह “आतंकवादी तत्वों के घेरे को तोड़ने” के उद्देश्य से किया गया है।
मृत व्यक्ति की पहचान अभी तक अंतिम रूप से नहीं हुई, लेकिन स्थानीय स्रोतों के अनुसार वह एक साधारण नागरिक था, जिसका कोई ज्ञात सैन्य या राजनीतिक जुड़ाव नहीं था। इस तरह की “आग में घी डालने” वाली कार्रवाई ने न केवल नाबलुस के स्थानीय लोगों में डर और गुस्सा फैलाया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर इज़राइल की नीतियों को फिर से सवाल के घेरे में ले आया है।
संयुक्त राष्ट्र ने इस घटना पर “निर्णायक जाँच” की मांग की है, जबकि यूरोपीय संघ की प्रतिनिधि मंडली ने “आंध्र प्रदेश में हिंसा के क्षणिक पुनरावृत्ति” को रोकने के लिए इज़राइल से अधिक पारदर्शिता की माँग की। भारत, जो मध्य पूर्व में समीपस्थ देशों के साथ रणनीतिक एवं ऊर्जा संबंध रखता है, इस मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाता दिख रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि दिल्ली “स्थिरता के लिए शांतिपूर्ण संवाद” के पक्ष में है और “सभी पक्षों से असहनीय हिंसा की निंदा” करता है। भारतीय प्रवासियों और व्यापारियों पर संभावित सुरक्षा जोखिम को देखते हुए, विदेश मंत्रालय ने नाबलुस के निकटतम भारतीय दूतावास को सतर्क रहने और भारतीय नागरिकों से सतर्कता बरतने का निर्देश दिया।
इज़राइली बलों की इस कार्रवाई ने भारत के मध्य पूर्व नीति के दोहरे पहलू को उजागर किया: एक ओर तेल आयात व रक्षा सहयोग के कारण इज़राइल के साथ गहरी पारस्परिक निर्भरता, और दूसरी ओर भारत का “समतापूर्ण” रुख जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाता है। इस प्रकार की स्थिति में, नीति‑घोषणाओं और वास्तविक परिणामों के बीच का अंतर अक्सर स्पष्ट हो जाता है—इज़राइल के लिए सुरक्षा शब्द अक्सर “विरोधी नेता” की अभिव्यक्ति बन जाता है, जबकि फिलिस्तीनियों के लिए यह एक अधिक कठोर जीवन यापन की निशानी बनती है।
नाबलुस में हुई इस घटना से यह स्पष्ट है कि पश्चिमी किनारे पर स्थित तालिबानी संघर्ष अभी भी अस्थिरता का स्रोत है, और हर नई जाँच या टकराव स्थानीय जनसंख्या के बीच गहरी असहजता पैदा कर रहा है। भारत के लिए यह एक संकेत हो सकता है कि किस प्रकार मध्य पूर्व की जलवायु में परिलक्षित छोटे‑मोटे घटनाएँ भी अपने विदेश नीति के संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं।
Published: May 3, 2026