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Category: दुनिया

इज़राइल ने F‑35 और F‑15IA के ऑर्डर को सरकारी मंजूरी दी

इज़राइल का रक्षा मंत्रालय 3 मई 2026 को एक ऐतिहासिक रक्षा खरीद को औपचारिक रूप से मंजूरी दे रहा है। इस पैकेज में लोकेहिड़ मार्टिन से F‑35 मल्टी‑रोल स्टेल्थ फाइटर और बोएंग से F‑15IA इंटेलिजेंस‑एयरक्राफ्ट का एक स्क्वाड्रन शामिल है। दोनों विमानों को इज़राइल की वायु शक्ति को गहरा करने की आशा से खरीदा गया है, जबकि अमेरिकी कंपनियों को अरबों डॉलर के अनुबंधों से सौदा करने का अवसर मिल रहा है।

यह कदम मौजूदा मध्य‑पूर्व तनावों के बीच आया है, जहाँ इज़राइल को इरान‑समर्थित मीसरियों और लेबनान के हीज़बोला दोनों से निरंतर खतरा महसूस हो रहा है। वॉशिंगटन ने भी इस सौदे को ‘क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक’ कहा, हालाँकि इसे कभी‑कभी “अस्त्रों की दौड़” के रूप में भी देखी गई है—एक ऐसी दौड़ जिसमें हर खिलाड़ी अपनी फौज को अधिक तेज़, अधिक कुशल और अधिक खर्चीला बनाने की कोशिश करता है।

वित्तीय बोझ को देखते हुए इज़राइल ने इस खरीद को कई चरणों में वितरित करने की योजना बनाई है, परंतु आलोचक बताते हैं कि जब तक सरकारी बजट ‘बजट मार्जिन’ के तहत समायोजित नहीं हो जाता, तब तक यह सौदा मात्र कागज़ी फैंसी नहीं रहेगा। इस पर रक्षा मंत्रालय ने त्वरित जवाब देते हुए कहा, “हमारी सुरक्षा के लिए आवश्यक निवेश में कटौती नहीं की जा सकती”—एक ऐसा बयान जो अक्सर ‘जवाबदेही की अनदेखी’ के रूप में देखी जाने वाली नीतियों की गूँज है।

भारत के लिए इस कदम का क्या अर्थ है? भारत आज भी अपने स्वयं के वायु-सेना को आधुनिकीकरण की दिशा में ले जा रहा है, जहाँ कुछ प्रमुख पहल F‑35 के विकल्पों की तलाश में हैं। इज़राइल की इस बड़े पैमाने पर खरीद को देखते हुए, भारतीय रक्षा उद्योग को संभावित सहयोग एवं प्रतिस्पर्धा दोनों के मोर्चे पर तैयार रहना पड़ेगा। साथ ही, अमेरिकी एरोस्पेस कंपनियों के साथ इज़राइल का गहरा संबंध भारत के लिये एक संकेत हो सकता है कि भविष्य में हथियार निर्यात नीतियों में और भी अधिक कर्तव्यपरक शर्तें आ सकती हैं।

भौगोलिक रूप से, यह सौदा इज़राइल को न केवल अधिक स्टेल्थ क्षमता देगा, बल्कि वे F‑15IA की उच्च‑उड़ान, लंबी‑दूरी इंटेलिजेंस भूमिका से भी लाभान्वित होंगे। यह दोहरी क्षमताओं वाला मिश्रण इज़राइल की मौजूदा ‘एयर डोम’ को कच्चे तौर पर सुदृढ़ कर देगा, जिससे उसके पड़ोसी राष्ट्रों को अपनी रणनीति पुनः विचार करनी पड़ेगी।

अंत में, यह देखना बाकी है कि यह महंगा व्यापार इज़राइल की सुरक्षा को ठोस लाभ पहुंचाएगा या फिर ‘डिफेंस पूल’ में और अधिक वित्तीय पानी में डुबकी का कारण बनेगा। जैसे ही प्रथम विमानों का डिलीवरी शेड्यूल निकट-अभिसरण में आएगा, दोनों देशों—इज़राइल और अमेरिकी—की सैन्य‑राजनीतिक साझेदारी की नई सीमा निर्धारित होगी, जबकि विश्व मंच पर ‘अस्त्रों की दौड़’ के जटिल चित्र में एक और नया पैरावर्स जुड़ जाएगा।

Published: May 4, 2026