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Category: दुनिया

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इज़राइल के उग्र राजनेता बेन‑गविर ने टिकटॉक पर 'फांसी के सपने' दिखाए: फिलिस्तीनी कैदियों पर मृत्युदंड की नीतिगत हिंसा

इज़राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन‑गविर ने बुधवार को टिकटॉक पर एक वीडियो प्रकाशित किया, जिसमें उन्होंने खुलकर कहा कि वह "फांसी की डोरी के सपने देखता है"। यह बयान सीधे उन प्रस्तावों से जुड़ा है, जिनके तहत फिलिस्तीनी कैदियों पर मृत्युदंड लागू करने की मांग की जा रही है।

बेन‑गविर, जो बायडेन‑नाज़ीव सरकार के सबसे सूक्ष्म उग्र वायोलेट दलों में से एक के नेता हैं, ने इस वीडियो को मंचित किया जबकि इज़राइल में फिलिस्तीनी विरोध प्रदर्शनों की तीव्रता बढ़ रही थी। सोशल मीडिया पर उनका वीडियो कई घंटे में लाखों देखे जाने के बाद, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखा विरोध उत्पन्न हो गया।

इस बयान को अनेक देशों के विदेश मंत्रालयों ने कांसर्गक्रिस्ट्ेमित (संदेहजनक) कहा और इज़राइल की मौजूदा मानवाधिकार प्रतिबद्धताओं पर सवाल उठाए। यूरोपीय संघ ने कहा कि "ऐसी हिंसा को भड़काने वाले शब्द अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं" और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परामर्श समिति ने तुरंत एक आपात कार्यवाही की मांग की।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी टिप्पणी कर "अत्यधिक उग्र बयान से शांति प्रक्रिया को नुकसान हो सकता है" कहा, हालांकि वह इज़राइल के सुरक्षा उपायों के प्रति अपना समर्थन जारी रख रहा है। भारत की विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर सीधे टिप्पणी नहीं की, परंतु दो वर्षों से चल रही द्विपक्षीय बातचीत में भारत ने लगातार दो-राज्य समाधान और मानवीय अधिकारों के सम्मान की बात दोहराई है। भारत के विदेश मामलों के अनुभवी विश्लेषकों का मानना है कि बेन‑गविर की रेटोरिक भारतीय विदेश नीति को मन्द नहीं कर सकती, परंतु यह दिल्ली के अरब-अमेरिका संबंधों और मध्य पूर्व में भारतीय कंपनियों के निवेश को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर सकती है।

राष्ट्रवादी गंभीरता के साथ बेन‑गविर का यह वीडियो उस रणनीति का हिस्सा दिखता है, जिसमें हिंसा का ग्लैमर डिजिटल मंचों पर पेश किया जाता है। जैसा कि कई आलोचक कहते हैं, "ऐसा लगता है कि दहाने की आवाज़ अब डिजिटल मंचों में भी गूँज रही है"। वास्तविक नीति‑प्रभाव को देखें तो इज़राइल की फांसी‑के‑सपने वाले बयान ने पहले से ही नियोमिकर सरकार के गठबंधन को अस्थिर किया है, काईप्रेमी वॉरनगी (वार्निंग) को बढ़ाते हुए गठबंधन के भीतर विधायी समर्थन को कमजोर किया है।

संक्षेप में, बेन‑गविर की टिकटॉक पर फांसी‑के‑सपने वाली पोस्ट ने न केवल इज़राइल-फ़िलिस्तीन संघर्ष में मौजूदा तनाव को बढ़ाया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और मानवाधिकार की बातों में भी गहरी खाई पैदा की है। इस प्रकार की उग्र रैटोरिक का वास्तविक नीति‑परिणाम अनिश्चित ही रहेगा, परंतु यह स्पष्ट है कि डिजिटल युग में नफ़रत भड़काने वाले शब्दों के साथ मिलने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की गिनती अब गिनती में नहीं रहती।

Published: May 6, 2026