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Category: दुनिया

इज़राइल‑ईरान युद्ध में फुजैराह में भारतीयों पर हमला, भारत ने किया कड़ा निंदा

स्थायी रूप से तनावग्रस्त इज़राइल‑ईरान टकराव ने इस महीने फिर से अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों को अभेद्य बना दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नये ‘प्रोजेक्ट फ़्रीडम’ ने हर्मुज जलडमरूमध्य को बिना बाधा के शिपिंग के लिये खोलने की दावेदारी की, जिससे ईरान ने त्वरित जवाबी कदम उठाए। ईरान के द्वारा गलीफ़ में लांघे गए मिसाइल और ड्रोन हमलों में फुजैराह पेट्रोलियम ज़ोन के पास स्थित कार्गो टैंकर्स को निशाना बनाया गया, जहाँ भारतीय कामगारों की बड़ी संख्या तैनात थी।

हमले में कई भारतीय करीबी सहकर्मी घायल हुए, जबकि कुछ ने गंभीर चोटें झेली। भारत ने तुरंत दुबई के विदेश मंत्रालय को आपातकालीन नोटिस भेजते हुए इस घटना की कड़ी निंदा की और सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ करने की मांगी। विदेश मंत्री ने फुजैराह में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिये दुबे के साथ मिलकर “अतिरिक्त सुरक्षा उपाय” लागू करने का आश्वासन दिया, हालांकि इस तरह के आश्वासन अक्सर कागज़ी होते हैं, जैसा कि पिछले रीयल-टाइम खुफिया लीक में दिखा।

विपक्षी इस कदम को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर अमेरिकी प्रभाव का नया प्रदर्शन माना है। ‘प्रोजेक्ट फ़्रीडम’ का मूल उद्देश्य हर्मुज को पश्चिमी जहाज़ों के लिये खुला रखना था, ताकि ईरान के ‘अवैध नौसैनिक गतिविधियों’ को दबाया जा सके। लेकिन बोरी-भारी नौकरशाही और सैन्य पैरामिलिट्री की असफलता ने इस रणनीति को ‘भौतिकी के नियमों की तरह’ अव्यवहारिक बना दिया – जहाँ बिंदु को खींचे जाने पर धागा टुट जाता है।

ईरान की प्रतिक्रिया, जिसका सार्वजनिक बयान आपराधिक मानवीय कृत्यों के रूप में डिटेक्ट किया गया, दर्शाता है कि वह केवल जाल बुनते नहीं, बल्कि रॉकेट‑सरलता से जवाब देते हैं। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय दांव में कूटनीतिक विरोधाभास स्पष्ट है: एक ओर संयुक्त राज्य अपनी रक्षा को ‘स्वतंत्रता’ कहता है, तो दूसरी ओर वह एक जलमार्ग को अपने आर्थिक हितों के लिये खोल रहा है, जहाँ भारत और विश्व दोनों ही तेल पर निर्भर हैं।

नई दिल्ली की स्थिति जटिल से कम नहीं है। भारत को शांति की इच्छा के साथ-साथ अपने नागरिकों की सुरक्षा का सिद्धान्त भी तोड़ना नहीं पड़ता। लेकिन जब बड़े अभिनेताओं के आर्थिक हित टकराते हैं, तो छोटे देशों के दावे अक्सर “तटस्थता” की छत्रछाया में धुंधला हो जाता है। इस संघर्ष में भारत का कड़ा रुख दर्शाता है कि वह अब भी “भारी अस्थिरता” वाले क्षेत्रों में अपने लोगों को “सुरक्षित” कहकर नहीं रहने देगा, चाहे वह कूटनीतिक दबाव के पीछे हो या तोपखाने के उछाल के पीछे।

Published: May 5, 2026