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Category: दुनिया

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अमेरिकी सेना का पूर्वी प्रशांत में हमले से दो नौवहनकर्ता मारे, एक बचा; इस साल ड्रग‑ट्रैफ़िक पर 190 से अधिक मौतें

संयुक्त राज्य सेना ने शुक्रवार को बताया कि उसने पूर्वी प्रशांत में एक जलयान को लक्ष्य बनाया, जिससे दो लोग मारे गए और एक व्यक्ति बच कर बाहर आया। वीडियो में दिखाया गया है कि एक मिसाइल ने जहाज़ पर प्रहार कर उसे जड़ता में बदल दिया, उसके बाद जहाज़ आग में लिपट गया। इस बार की कार्रवाई को अमेरिकी दक्षिणी कमांड ने सार्वजनिक किया, जिससे क्षेत्र में अमेरिकी औपनिवेशिक शक्ति के प्रयोग पर पुनः बहस छिड़ गई।

इस प्रकार के हमलों की गंभीर सांख्यिकीय रूपरेखा के अनुसार, सितम्बर 2025 से अब तक कैरिबियन और प्रशांत दोनों समुद्रों में ‘ड्रग ट्रांसपोर्ट’ के नाम पर किए गए अमेरिकी हवाई और मिसाइल हमलों में कुल 190 से अधिक लोगों की मौतें हुई हैं। अधिकांश पीड़ित स्थानीय मछुआरों या छोटे व्यापारियों के रूप में पहचानते हैं, जबकि अमेरिकी सरकार का कहना है कि ये लक्ष्य ‘अवैध ड्रग सप्लाई चैन’ के हिस्से थे।

भारत के लिए इस बहस का प्रतिध्वनि कई आयाम रखती है। भारतीय नौसेना भी भारतीय राज्य जलसंधियों में समुद्री ड्रग ट्रैफ़िक को रोकने के लिए कई संयुक्त अभ्यास करती है, और अमेरिका के इस प्रकार के बल प्रयोग को अंतरराष्ट्रीय कानून एवं संप्रभु अधिकारों के संशोधित परिप्रेक्ष्य में देखना पड़ता है। भारत ने हमेशा कहा है कि समुद्री सुरक्षा में बहुपक्षीय सहयोग आवश्यक है, परंतु किसी भी राष्ट्र द्वारा एकतरफ़ा सैन्य कार्रवाई की वैधता पर सवाल उठाते हैं।

भौगोलिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से देखे तो, अमेरिकी इस कदम से आशा करता है कि ड्रग प्रवाह के प्रमुख समुद्री रूट को बाधित किया जा सके, जबकि प्रतिद्वंद्वी देशों को यह संदेश दिया जाए कि समुद्री अपराध पर कार्रवाई में यू.एस. का ‘इंटरविनिंग’ अधिकार है। इसी समय, लैटिन अमेरिकी देशों और प्रशांत द्वीप राष्ट्रों ने इस नीति को अस्वीकार किया है, यह मानते हुए कि यह राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन और नागरिक आबादी के प्रति असंवेदनशीलता दर्शाता है।

नीति‑घोषणाओं और वास्तविक परिणामों के बीच का अंतर स्पष्ट है। जबकि आधिकारिक बयान में ‘ड्रग‑ट्रैफ़िक को समाप्त करना’ कहा जाता है, तथाकथित सशस्त्र हमले अक्सर आम नागरिकों की जीवितियों को खतरे में डालते हैं, जिससे स्थानीय समुदायों में वैर उत्पन्न होता है और अमेरिकी सॉफ्ट पावर को ही नुकसान पहुंचता है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस दिशा में सख़्त निंदा की है, और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून के तहत अधिकार‑न्याय की मांग की है।

भविष्य में, यदि इस रणनीति को जारी रखा गया तो क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की सम्भावना है। भारत को इस दिशा में अपनी समुद्री सुरक्षा नीति को पुनः समायोजित करना पड़ेगा, चाहे वह अपने स्वयं के समुद्र‑सुरक्षा संचालन को मजबूत करना हो या अंतर्राष्ट्रीय मंच पर बहुपक्षीय नियमों की वकालत करना। इस प्रकार, एक साधारण मिसाइल प्रहार न केवल दो जीवन की समाप्ति बन गया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शक्ति‑समुच्चय, कूटनीतिक विरोधाभास और नीति‑परिणामों के बीच की दूरी को भी उजागर कर रहा है।

Published: May 9, 2026