अमेरिका ने स्ट्रेटहर्मुज़ में एस्कॉर्ट मिशन को रोकने की घोषणा की, ट्रम्प ने फिर से दिशा‑बदल किया
संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कल शाम एक सोशल‑मीडिया पोस्ट के माध्यम से बताया कि वे स्ट्रेटहर्मुज़ में जारी एक दिन‑पुराने एस्कॉर्ट मिशन को स्थगित करेंगे। यह कदम उस संघर्ष के बीच आया है, जिसमें इरान और कई मध्य‑पूर्वी दलों के बीच सक्रिय युद्ध का जोखिम बना हुआ है।
परिचालन को आधिकारिक रूप से शुरू करने के कुछ ही घंटों पहले विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इस नई मिशन को समर्थन देते हुए कहा था कि यह जलमार्ग की सुरक्षा और विश्व तेल आपूर्ति की स्थिरता के लिए आवश्यक है। अब ट्रम्प की घोषणा से स्पष्ट हो गया कि अमेरिकी रणनीति में फिर से बदलाव आया है, जिससे पहले बताई गई बारीकियों पर सवाल उठते हैं।
स्ट्रेटहर्मुज़, जो विश्व तेल व्यापार का मुख्य द्वार है, पर सतत सुरक्षा व्यवस्था की अनिश्चितता न केवल मध्य‑पूर्व की सुरक्षा स्थिति को प्रभावित करेगी, बल्कि भारत सहित ऊर्जा‑निर्भर राष्ट्रों की आर्थिक योजना को भी उलझन में डाल रही है। भारतीय तेल आयात का लगभग 70 % इस जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है; किसी भी व्यवधान से पेट्रोल की कीमतों में उछाल और राष्ट्रीय बजट पर दबाव बढ़ सकता है।
वैश्विक शक्ति‑संरचनाओं की जटिल जाल में इस तरह के नीतिगत उतार‑चढ़ाव अक्सर दिखते रहे हैं, लेकिन ट्रम्प‑रूबियो की असंगतियों से अमेरिकी विदेश नीति की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े होते हैं। एक ओर रूबियो ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जहाज़ों की सुरक्षा का आश्वासन दिया, तो दूसरी ओर ट्रम्प ने “अधिक कूटनीतिक समाधान” की वकालत की, जबकि वास्तविक कार्यवाही में कोई ठोस कदम नहीं दिखा।
विश्लेषकों का मानना है कि इस निर्णय का तत्काल कारण अमेरिकी घरेलू राजनीति और चुनावी समीक्षाओं के साथ जुड़ी संभावित दबाव हो सकता है। साथ ही, चीन और रूस के साथ रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में अमेरिकी दबाव को हिलाकर, ट्रम्प प्रशासन अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी लचीलापन दिखाना चाहता है। परंतु इस “लचीलापन” का मूल्य, विशेष रूप से जलमार्ग की सुरक्षा और वैश्विक तेल बाजार की स्थिरता, स्पष्ट नहीं है।
भारत के लिए यह स्थिति दोधारी तलवार बनकर सामने आई है। मुंबई‑हैदराबाद के बीच तेल की आपूर्ति श्रृंखला पर सीधा असर पड़ेगा, जबकि कूटनीतिक तौर पर भारत को यू.एस. के साथ सुरक्षा सहयोग को पुनः परिभाषित करना पड़ेगा। दिल्ली को अब सऊदी अरब, इरान और संयुक्त राज्य के बीच संतुलन बनाते हुए, वैकल्पिक वैकल्पिक रूट्स और तेल स्रोतों की तलाश कर अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना पड़ेगा।
संक्षेप में, ट्रम्प की इस घोषणा ने सिर्फ एक दिन पुराने एस्कॉर्ट मिशन को रद्द नहीं किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नीति‑निर्माण में भरोसे की चादर को भी खींचा है। जब बड़ी शक्ति अपने स्वयं के शब्दों के साथ दोहरा खेल खेलती है, तो छोटे देश, विशेषकर ऊर्जा‑आधारित अर्थव्यवस्थाओं को, शांतिपूर्ण समाधान और शर्त‑बद्ध सहयोग की माँग करनी पड़ेगी।
Published: May 6, 2026