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Category: दुनिया

अमेरिका की ड्रग-नौका को ध्वस्त करने वाली सैनीक ऑपरेशन में दो और मौतें, अब तक 188 की मौतें

संयुक्त राज्य ने कारिबियन के अंतरराष्ट्रीय जल में एक संदिग्ध मादक पदार्थ परिवहन जहाज़ पर सैनीक हमला किया, जिसके परिणामस्वरूप दो लोगों की मृत्यु हो गई। यह घटना उसी अभियान का हिस्सा है, जिसे ट्रम्प प्रशासन ने सितंबर 2025 से "ड्रग‑नौका ध्वस्त" नीति के तहत चलाया है। इस पहल से अब तक कम से कम 188 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, अधिकांश लैटिन अमेरिकी नाविक और स्थानीय मछुआरे रहे हैं।

औसत में जोड़-जोड़ कर अगर इस तरह के सशस्त्र कारवाइयों के आंकड़े देखें तो यह स्पष्ट है कि न केवल लक्ष्य‑समूह बल्कि असहाय नागरिकों को भी मारा जा रहा है। जबकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ये ऑपरेशन ड्रग तस्करों के लूट-मार्ग को क्षतिग्रस्त करने के लिये आवश्यक हैं, वास्तविकता में यह नीति एक तरह का समुद्री “ड्रोन‑शूट‑एंड‑रन” बन गई है। इस उद्देश्य की स्पष्टता की कमी, जनसंपर्क की लापरवाही और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के उल्लंघन के संकेत मिलते हैं।

इस अभियान का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रकार का असर पड़ रहा है। लैटिन अमेरिका की कई सरकारें, विशेषकर कोस्टा रीका, कोलम्बिया और डोमिनिकन रिपब्लिक, इस क्रम में अमेरिकी बलों के अधिकारों पर सवाल उठाते आ रही हैं। पेरू ने तो पहले ही अपने समुद्री क्षेत्र में अमेरिकी ड्रोन के प्रयोग पर प्रतिवाद किया था, यह तर्क देते हुए कि यह उनकी संप्रभुता का उल्लंघन है।

भारत के लिए भी यह विकास अप्रासंगिक नहीं है। भारत‑संयुक्त राज्य गठबंधन में समुद्री सुरक्षा का क्षेत्र व्यापक रूप से जुड़ा है, विशेषकर इंडो‑पैसिफिक में काइलिनिंग का मुकाबला करने के संदर्भ में। यदि अमेरिकी नीतियों में अति‑रनऑफ़ की प्रवृत्ति जारी रही तो संभावित रूप से भारत को भी समुद्री डकैती, मादक पदार्थ प्रवाह और तेज़ी से बदलते सुरक्षा डाइनामिक के बीच नाज़ुक संतुलन बनाना पड़ेगा। इस संदर्भ में भारतीय विदेश मन्त्रालय के हालिया बयान में कहा गया कि भारत अभिप्रेत अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत ड्रग‑तस्करी के खिलाफ सहयोग को साकार करेगा, पर साथ ही ‘सर्वोच्च समुद्री अधिकारों के सम्मान’ को भी दोहराया गया।

भले ही इस नीति का मुक़ाबला अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में हो या द्विपक्षीय वार्तालापों में, अभी तक एक स्पष्ट शर्त नहीं बनी है जिसे दोनों पक्ष स्वीकार कर सकें। सैनीक उपायों की प्रभावशीलता के आकलन के लिये अक्सर “सही लक्ष्य” की परिभाषा अस्पष्ट रहती है, जिससे “सही परिणाम” से दूरी बनी रहती है। नतीजतन, जहाँ तक इस अभियान की सफलता का सवाल है—ड्रग तस्करी को रोकना या केवल “ड्रग‑नौका” शब्द को हटाना—यह स्पष्ट है कि मानवीय लागत अनदेखी नहीं हो सकती।

वास्तविकता में, इस प्रकार की तेज़‑गति, उच्च‑तकनीकी पहल के पीछे अक्सर एक विनिमय‑आधारित सोच छिपी होती है: “यदि हम उन्हें मार डालेंगे, तो समस्या हल हो जाएगी।” लेकिन इतिहास ने बार-बार दिखाया है कि ड्रग‑ट्रैफ़िकिंग नेटवर्क बहु‑स्तरीय होते हैं, और एक पतली नाव को गिरा देना बड़े पैमाने पर रूट को नहीं बदलता। अतः, इस रणनीति के दीर्घकालिक परिणाम को समझने के लिये न केवल मौतों की गिनती, बल्कि सामाजिक‑आर्थिक पुनर्वास और वैध वैकल्पिक आय स्रोतों की योजना भी आवश्यक है—जो आज तक कहीं से नहीं आया।

Published: May 6, 2026