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Category: दुनिया

अमेरिका‑ईरान के संघर्षविराम पर नई धुंध, यूएई को दो मिसाइल, हॉर्मुज़ जलधारा में फिर से जमेगी धारा

पहले महीने की संघर्षविराम अब टकराव की बाड़ के सामने खड़ी है। इरान ने लगातार ४८ घंटों में दो बार संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को मिसाइलों से लक्षित किया, जबकि अमेरिकी नौसेना स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज़ को फिर से खोलने की छँटाई कर रही है।

संघर्षविराम को लेकर अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ का आशावादी बयान—"समझौता अभी भी बना हुआ है"—उस पन्ने की तरह दिखता है जिस पर लिखावट धुंधली है। वास्तविकता में तो दुबई के आकाश में इरानी फ्यूरिएशन के धुएँ उठे हैं, और नौसैनिक जहाज़ों की धुंधली लकीरें ही अब शांति की सच्चाई बताएँगी।

इर्द‑गिर्द तनाव बढ़ने के कई पड़ाव हैं। हॉर्मुज़, जो दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल प्रवाह मार्गों में से एक है, उसके बंद होने से वैश्विक तेल कीमतों में हलचल मची है। भारत, जो अपने अधिकांश कच्चे तेल का आयात इसी जलडमरूमध्य से करता है, अब दो दायरे में फँस चुका है: एक ओर ऊर्जा सुरक्षा की चिंता, तो दूसरी ओर ईरान के साथ ऐतिहासिक मतभेद को हल्के में नहीं लिया जा सकता। भारतीय कूटनीति को अब इस विवाद को निराकरण‑दृष्टि से देखना पड़ेगा, नहीं तो तेल की कीमतों में उतार‑चढ़ाव से भारतीय उपभोक्ताओं पर सीधे असर पड़ेगा।

ईरान की इस बार की मिसाइल-रफ़्तार के पीछे कई रणनीतिक संकेत छिपे हैं। अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने प्रतिरोध को दर्शाना, अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप को चिढ़ाते हुए, और अफ्रीका‑एशिया के बीच स्थित तेल मार्गों को फिर से अपने नियंत्रण में ले लेना—इनमें से हर एक कदम इरान के बॉक्स में "राजनीतिक विजय" के लेबल के साथ रखा गया है।

वहीं, अमेरिकी पक्ष का जिद्दी रुख—हॉर्मुज़ को दोबारा खोलने के लिए नौसैनिक संचालन को तेज़ी से आगे बढ़ाना—भी अपनाई गई नीति में स्पष्ट विरोधाभास दिखाता है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे कोई बंद दरवाज़ा तोड़ते‑भेदने की कोशिश कर रहा हो, जबकि सामने वाला दरवाज़ा धीरे‑धीरे बंद हो रहा हो। अंतरराष्ट्रीय कानून के ढांचे में कहा गया "हथियार रोकना" अब शब्दों के बंडल में बदल गया है, और दो मुख्य खिलाड़ी इस बंडल को खोलने की बजाय खुद को ढक रहे हैं।

अंततः, संघर्षविराम की नाजुकता को समझते हुए, दोनों पक्षों को न केवल मौखिक आश्वासनों से, बल्कि ठोस निरीक्षण, स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षण और वास्तविक कदमों से अपनी प्रतिबद्धता सिद्ध करनी होगी। नहीं तो इस तनाव की लहर न केवल मध्य पूर्व, बल्कि एशिया‑प्रशांत की ऊर्जा सुरक्षा, भारत की आर्थिक स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा ताने‑बाने को भी ध्वस्त कर देगी।

Published: May 6, 2026