अफ़्रीकन लायन अभ्यास के बाद मॉरक्को में दो अमेरिकी सैनिक गायब
सैन्य कर्मियों की एक साधारण चेक‑इन में ही नीला धुंधला पड़ता है—अमेरिकी रक्षा विभाग के अफ्रीका कमांड (AFRICOM) के अनुसार, दो अमेरिकी सेवा सदस्य 2 मई को दक्षिण‑पश्चिमी मॉरक्को के टैन‑टैन शहर के निकट स्थित बहुराष्ट्रीय अभ्यास ‘अफ़्रीकन लायन’ के दौरान अचकचन गायब हो गए।
‘अफ़्रीकन लायन’ एक वार्षिक संयुक्त प्रशिक्षण अभियान है, जिसमें यू.एस., मोरक्को, अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, सेनेगल और फ्रांस जैसी यूरोपीय प्रतिपक्षी देशों के साथ-साथ कभी‑कभी भारत जैसे बाहरी अभ्यर्थी भी भाग लेते हैं। इस बार के अभ्यास में 30,000 से अधिक सैनिक, विमान और नौसैनिक जहाज़ शामिल थे, जिससे यह साबित होता है कि “अभ्यास” शब्द में अब ‘अभ्यास’ से अधिक ‘अभियान’ का वजन है।
गुमशुदगी की रिपोर्ट मोरक्को के टैन‑टैन के पास एक रेगिस्तानी बेस से मिली, जहाँ दो अमेरिकी सैनिक ने अपने वाहन को अस्थायी रूप से रोक कर संचार उपकरण की जाँच की थी। देर रात में उनका संपर्क टूट गया, और अगले सुबह उन्हें खोज‑बचाव दलों के सामने “गुमशुदा” दर्शाया गया। इसके बाद यू.एस., मोरक्को और अन्य सहभागी राष्ट्रों ने एक संयुक्त खोज‑और‑बचाव ऑपरेशन शुरू कर दिया, जिसमें हेलीकॉप्टर, ड्रोन और सप्लाई हवाई जहाज़ों का प्रयोग किया जा रहा है।
ऐसी घटनाएँ, जहाँ सहयोगी देशों के बीच अत्याधुनिक सैन्य सहयोग का ढांचा बनता है, फिर भी बुनियादी सुरक्षा पहलुओं में चूक दिखती है, एक कूटनीतिक पहेली पेश करती हैं। मोरक्को और यू.एस. के बीच हालिया रक्षा समझौते ने टैन‑टैन को रणनीतिक एरियल रिफ्यूलिंग हब के रूप में स्थापित किया था, लेकिन इस तरह की घटनाएँ बुनियादी संचार एवं स्थानीय भू‑भौतिक जोखिम मूल्यांकन की कमी को उजागर करती हैं।
भारतीय पाठकों के लिये यह मामला विशेष महत्व रखता है, क्योंकि भारत भी अफ्रीका में अपनी सुरक्षा सहयोग को गहरा कर रहा है—पिछले वर्ष भारत‑अफ़्रीका सुरक्षा संवाद और भारतीय नौसेना की अफ्रीकी बंदरगाहों में रेज़िलिएंस ऑपरेशन के बाद, भारतीय सैन्य अटॉर्नी और इंटेलिजेंस एजेंसियों ने इस क्षेत्र में प्रशिक्षण साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा की थी। यदि भारतीय जवान भी किसी दिन ‘अफ़्रीकन लायन’ के हिस्से बनें, तो इस तरह की “गुमशुदगी” को रोकने के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल और स्थानीय भू‑रक्षा अनुसंधान को अनिवार्य मानना पड़ेगा।
जैसा कि इस घटना ने संकेत दिया है, वैश्विक शक्ति संरचनाएँ अक्सर औपचारिक घोषणा और वास्तविक कार्यान्वयन के बीच के अंतर को छिपा देती हैं। अमेरिकी विदेश नीति दस्तावेज़ों में ‘आफ्रीकी साझेदारियों को सुदृढ़ करना’ कहा गया है, लेकिन इस अभ्यास के दौरान जोखिम प्रबंधन में लापरवाही का तिरछा चित्रण इस बात को रेखांकित करता है कि नीति घोषणाओं और मैदान में वास्तविकता के बीच का अंतर अक्सर काफी लंबा हो सकता है।
वर्तमान में खोज‑और‑बचाव कार्य 48 घंटे से अधिक समय तक चल रहा है, और फिलहाल कोई पुष्टि नहीं हुई है कि दो सैनिकों को पुनः प्राप्त किया गया है। अगर वे सुरक्षित पाए जाते हैं तो यह एक राहत की बात होगी; अगर नहीं, तो यह एक कठोर सीख होगी कि बहुत बड़े सैन्य अभ्यासों में ‘छोटे’ मानव कारकों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
Published: May 3, 2026