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Category: समाज

हर्मुज संकट के साथ तेल की कीमतों में उछाल, भारत में आम नागरिकों को बढ़ते जोखिम

संयुक्त अरब अमीरात ने इरान से उड़े हुए ड्रोन और संभावित मिसाइलों को रोकने का दावा किया है। जबकि इरान से कोई टिप्पणी नहीं आई, हर्मुज जलमार्ग—दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल‑समुद्री धारा—पर तनाव स्पष्ट रूप से बढ़ा है। इस बढ़ते तनाव का असर भारत की आर्थिक और सामाजिक जलधारा में गहरा दिख रहा है।

प्रधानमंत्री के कार्यालय ने बात‑बात में बताया कि "विदेशी जलमार्गों पर अस्थिरता हमारे तेल आयात को बाधित कर सकती है", परन्तु ठोस उपायों को लेकर कोई समय‑सारिणी सार्वजनिक नहीं हुई। परिणामस्वरूप पेट्रोल, डीज़ल और तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) की कीमतें पिछले दो हफ्तों में औसतन 12 % बढ़ गई हैं। यह कीमत‑वृद्धि न सिर्फ घर के बजट को खींच रही है, बल्कि स्वास्थ्य‑सुविधाओं में दवाओं की लागत और बच्चों की पढ़ाई के लिये आवश्यक पुस्तक‑सामग्री की कीमतों को भी प्रभावित कर रही है।

सेवायुक्त कर्नाटक ने कहा, "हर्मुज में शिपिंग में व्यवधान के कारण तेल आपूर्ति की अनिश्चितता हमारे ऊर्जा नीति में बड़े अंतराल को उजागर करती है।" इस अनिश्चितता के मद्देनज़र कई राज्यों ने वैकल्पिक ऊर्जा‑स्रोतों की प्राथमिकता देने का प्रस्ताव रखा है, पर नीति‑निर्धारण में अब तक वही पुरानी दुविधा देखी जा रही है, जो पिछले कई सालों से चल रही है।

सामाजिक दृष्टिकोण से देखें तो, महंगाई का सबसे कड़ा असर मुस्कुराते‑हँसते छोटे‑छोटे किराने के दुकानों, शहरी तथा ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के स्तर पर पड़ रहा है। गरीब वर्ग के लिये, तेल की कीमतों में इस वृद्धि का सीधा संबंध दैनिक जीवन की बुनियादी ज़रूरतों—जैसे सर्दियों में हीटिंग, विद्यालयों में बस‑सेवा, और स्वास्थ्य केंद्रों में आपातकालीन इमरजेंसी रेस्पॉन्स—से है। एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक ने कहा, "दवा की कीमतें बढ़ रही हैं, इसलिए कई रोगियों को इलाज में देरी का सामना करना पड़ रहा है।" यह स्पष्ट संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के व्यवधान से घरेलू सामाजिक सेवाओं में भी धक्का आता है।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया में निराशा की लकीर साफ़ दिख रही है। कई नागरिक ने शिकायत दर्ज कराई कि तेल रिफ़ाइलिंग स्टेशनों को सूचित करने में सरकारी सूचना‑प्रणाली भी मिसाइल‑हस्तक्षेप जितनी ही धीमी है। वहीं, ऊँचे‑ऊँचे विज्ञापनों में विज्ञापनदाता कंपनियों ने ‘सुरक्षित मार्ग’ का दावा किया, परन्तु वास्तविक सहायता तक पहुँचने में अक्सर लोगों को लंबा इंतज़ार करना पड़ता है।

वित्त मंत्रालय ने कोविड‑19 के बाद पहली बार अतिरिक्त आयात शुल्क को हटाने की घोषणा की, परन्तु इस कदम का प्रभाव अब तक सीमित ही दिखाई दे रहा है। नीति विशेषज्ञों का मानना है कि हर्मुज के आँधियों के बीच भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा‑नीति को पुनः जांचना चाहिए, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा का तेज़ी से विस्तार, राष्ट्रीय पेट्रोलियम भंडारण क्षमताओं का सुदृढ़ीकरण, तथा आपातकालीन मूल्य‑स्थिरीकरण तंत्र को मजबूत करना शामिल है।

जब तक अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर शांति नहीं लौटती, सामान्य नागरिक ही इस अस्थिरता के सबसे अधिक शिकार रहेंगे। प्रशासनिक जवाबदेही की माँग अब केवल शब्दों में नहीं, बल्कि ठोस कार्यों में बदली है—और यह तब तक नहीं हो सकता जब तक नियोजन में वही पुरानी अटक-अटक नहीं जैसी बैठी हुई है।

Published: May 5, 2026