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Category: समाज

हरी फ़ेंसेस से बगीचे को विस्तृत बनाना: 'ग्रीन ड्रेंचिंग' का सामाजिक पहलू

शहरी घनों में रहने वाले कई परिवारों ने हाल ही में एक सरल लेकिन प्रभावी उपाय अपनाया है – काली बाड़ों को विभिन्न हरे रंगों से रंगना। इस प्रवृत्ति को ‘ग्रीन ड्रेंचिंग’ कहा जा रहा है, जिसके पीछे आशा है कि बगीचा अधिक विस्तृत, शांतिपूर्ण और आरामदायक लगेगा। गहरा जंगल‑हरा, म्यूटेड सेज और ऑलिव‑हरा जैसे शेड्स विभिन्न बाग़ शैली के अनुरूप सुझाए जा रहे हैं।

भौगोलिक सीमाओं के कारण सार्वजनिक हरित स्थानों की कमी, आराम‑दायक रहने की इच्छा, तथा मानसिक स्वास्थ्य पर नज़र डालते हुए इस कदम की लोकप्रियता में वृद्धि हुई है। कई शोधों से पता चलता है कि हरे‑भरे पर्यावरण से तनाव में कमी, नींद में सुधार और बच्चों के शैक्षिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। परन्तु यह व्यक्तिगत समाधान सामाजिक व्यवधान की चुप्पी को नहीं छुपा सकता।

शहरों में सार्वजनिक उद्यानों और सड़कों के लिये हरित आवरण प्रदान करने की योजना कई बार आर्थिक बाधाओं या टेंडर‑जटिलताओं के कारण टाल दी जाती है। परिणामस्वरूप नागरिक स्वयं अपना हरित क्षेत्र बनाने के लिए निजी उपायों का सहारा ले रहे हैं। यह स्थिति उन प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, जिनमें शहरी नियोजन के लिये बजट आवंटन, जल‑संसाधन प्रबंधन, तथा सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रमों का अभाव स्पष्ट है।

जबकि कुछ नगरपालिका ने इस सामाजिक पहल को प्रोत्साहन देने के लिये ‘हरी दीवारों’ के लिये किफायती रंग विकल्पों की सूची जारी की है, कई जगहों पर नियम‑कानून और फॉर्मलिटी में अनावश्यक कागजी कार्यवाही नागरिकों को निराश कर रही है। ऐसी स्थिति में न केवल व्यक्तिगत खर्च बढ़ता है, बल्कि पर्यावरणीय स्थिरता के लिये सामूहिक प्रयास भी रुकते‑रुकते थक जाते हैं।

‘ग्रीन ड्रेंचिंग’ के माध्यम से घर के आंगनों में हरित दृश्य को बढ़ाने का साहसिक कदम, शहरी प्रशासन की लापरवाही के प्रति एक सूक्ष्म शिकायत बन गया है। यदि शहर की परिधि में हर पथ, हर पार्क और हर निचे को हरियाली से ढका नहीं गया, तो नागरिकों को खुद ही पौधों के रंग में बदलना पड़ेगा – काली दीवारें हरे‑भरे सपनों का प्रथम चरण बन जाएँगी। इस प्रवृत्ति ने न केवल निजी बाग़ों को सजाने की नई दिशा दी, बल्कि शहरी नीति निर्माताओं को यह याद दिलाया कि हरित आवरण केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि नागरिकों की जीवन गुणवत्ता का मौलिक घटक भी है।

Published: May 5, 2026