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Category: समाज

हॉरमूज जलडमरूमध में अमेरिकी प्रयोग से भारतीय अर्थव्यवस्था पर छाया

संयुक्त राज्य अमेरिका ने आज हॉरमूज जलडमरूमध को मजबूर खोलने का प्रयास किया, जबकि इराण और संयुक्त अरब अमीरात के बीच बनी शांति संधि की धड़कन अभी भी कायम थी। अमीरात ने बताया कि इराण ने इस प्रयास के जवाब में बंधु राष्ट्र पर मिसाइल और ड्रोन का प्रहार किया। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय waters‑ में अस्थायी तनाव की ओर इशारा करती है, जिसका असर सीधे भारत की तेल आयात, कीमतों और जनसुरक्षा पर पड़ता है।

हॉरमूज की रणनीतिक महत्ता भारत के तेल‑आधारित ऊर्जा मिश्रण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है; यहाँ से गुजरने वाले लगभग 20 प्रतिशत भारतीय आयातित कच्चे तेल का मार्ग है। यदि इस जलडमरूमध में जहाज़ों का संचार बाधित हो गया तो हमारे घरेलू ईंधन, परिवहन और उद्योग‑सेक्टर पर कीमतों में अप्रत्याशित उछाल देखना पड़ेगा। इससे पहले ही बढ़ती महंगाई के बोझ में मध्यम‑आय वर्ग को अतिरिक्त दबाव का सामना करना पड़ेगा।

सरकार ने इस क्षणिक खतरे को लेकर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया, न ही मौजूदा रणनीतिक ऊर्जा अधिसूचना में इस तरह के अंतरराष्ट्रीय तनाव के लिए त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र की व्याख्या की है। ऐसी नीति‑भ्रांति, जो आधी‑शताब्दी पुरानी ऊर्जा‑सुरक्षा योजना को 21वीं सदी की जटिल समुद्री जियो‑पॉलिटिक्स से जोड़ने में असफल रहती है, समय की कसौटी पर खरा नहीं उतरती।

वास्तव में, भारत की ऊर्जा‑नीति अब वायु‑ड्रोन, समुद्री कन्फ्लिक्ट, और बहुपक्षीय दांव‑पेंच के बीच फँसी हुई है। जबकि विदेश मंत्रालय मौखिक आश्वासन देता रहता है, आम नागरिकों के लिए इस दुविधा का सीधा संकेत पेट्रोल पम्पों पर लंबी कतारों और अस्थायी कीमत‑वृद्धि में देखा जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में, जहाँ हर लिटर ईंधन का खर्च शिक्षा और स्वास्थ्य पहुँच को प्रभावित करता है, ऐसी उछाल अधिक गंभीर सामाजिक असमानता को जन्म दे सकते हैं।

इसी बीच, इन मामलों को उठाने के लिए संसद में पूछताछ सत्र आयोजित होना चाहिए, परन्तु अक्सर प्रश्नावली का उत्तर केवल “वर्तमान परिस्थितियों की जाँच जारी है” तक सीमित रह जाता है। यह वही पुरानी “सुनवाई‑बाद‑विचार” की रणनीति है जिसे हम अब तक नयी ऊर्जा‑सुरक्षा के लिए अपनाना भूल गए हैं।

इसलिए, यह आवश्यक है कि नीति‑निर्माता अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध में संभावित व्यवधानों को कार्यनीतिगत रूप‑रेखा में शामिल करें, वैकल्पिक आयात मार्ग, रणनीतिक तेल भंडारण, तथा नवीकरणीय ऊर्जा निवेश को प्राथमिकता दें। तभी भारत के सामान्य नागरिक, चाहे वह गाँव का किसान हो या शहर का दैनिक यात्रियों, इस वैश्विक अस्थिरता के झटकों से बच सकेगा।

Published: May 5, 2026