जो होना ही था, उसे दर्ज करता, देखता और सवाल करता समाचार मंच

Category: समाज

हिमाचल प्रदेश में 390 पीजीटी पदों की भर्ती आज समाप्त, शिक्षक अभाव के मुद्दे फिर सार्वजनिक बहस का केंद्र

हिमाचल प्रदेश राज्‍य चयन आयोग (एचपीआरसीए) ने आज (4 मई 2026) अपने विज्ञापन 07/2026 के अंतिम दिन पर 390 प्री-लीडरशिप (पीजीटी) पदों के लिए सभी ऑनलाइन आवेदनों को बंद कर दिया। कुल 2 092 पदों के बड़े पैमाने पर इस भर्ती चक्र में विज्ञान और वाणिज्य विषयों के लिए ये नौकरियां विशेष रूप से उजागर हुईं।

आवेदकों को स्नातकोत्तर डिग्री, बी.एड. और एच.पी.टी.ई.टी. (हिमाचल शिक्षक पात्रता परीक्षा) प्रमाणपत्र अनिवार्य करना पड़ता है, तथा चयन प्रक्रिया में कंप्यूटर‑आधारित परीक्षा, दस्तावेज़ सत्यापन और चिकित्सा जांच शामिल है। हालांकि, इस जटिल योग्यता मानक को पूरा करने वाले योग्य शिक्षकों की संख्या लगातार घटती जा रही है, जिससे कई जिलों में खाली कक्षा और कमजोर शैक्षणिक परिणाम जैसी समस्याएं पहले से ही गहरी हो चुकी हैं।

शिक्षण शक्ति की इस रीढ़ में हुए अतिरिक्त तनाव को देखते हुए, कई सामाजिक संगठनों ने प्रश्न उठाए हैं कि क्यों इतने बड़े पैमाने पर भर्ती के बावजूद भर्ती प्रक्रिया अक्सर बाधित रहती है। पिछले वर्ष कई बार विज्ञापन में बदलाव, ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी खराबी और दस्तावेज़ सत्यापन में अनावश्यक देरी ने योग्य उम्मीदवारों को निराश किया। इन चक्रों को 'ब्यूरोक्रेसी की अनुगामी गति' कहा जा सकता है, जहाँ प्रक्रिया की जटिलता ही मुख्य बाधा बन गई है।

शिक्षा प्रणाली में आपूर्ति की कमी का सीधा असर उन समुदायों पर पड़ता है जिनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति कमजोर है। ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षक टर्नओवर के कारण पढ़ाई के मानकों में गिरावट देखी जा रही है, जबकि शहरी स्कूलों में अधिक संसाधन उपलब्ध हैं। इस वर्गीय असमानता को दूर करने के लिए सरकार को न केवल भर्ती संख्या बढ़ानी चाहिए, बल्कि चयन एवं नियोजन में पारदर्शिता और समयबद्धता भी सुनिश्चित करनी चाहिए।

वर्तमान में प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठते हैं: जब वही पद हर साल खुलते‑बंद होते रहते हैं, तो क्या वह योजना का हिस्सा है या सिर्फ धुंधला बहाना? नीति‑निर्माताओं को इस सत्र में न केवल खुली रिक्तियों को भरने के लिये तेज़ी लानी होगी, बल्कि उन ढांचागत कमियों को भी दूर करना होगा, जो योग्य शिक्षकों को आकर्षित करने में बाधा बनती हैं। इस दिशा में निरंतर निगरानी और सार्वजनिक रिपोर्टिंग की आवश्यकता अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा शिक्षा का भविष्य केवल काग़ज़ी विज्ञापन तक सीमित रह जाएगा।

Published: May 4, 2026