विज्ञापन
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ में वकील की आवश्यकता है?
आपराधिक मुकदमों, जमानत, गिरफ्तारी, एफआईआर, जांच और उच्च न्यायालयी कार्यवाही से जुड़े कानूनी मार्गदर्शन के लिए यहां क्लिक करें।
संसद में प्रस्ताव, उच्चस्तरीय इवेंट सुरक्षा के लिए ₹७,५०० करोड़, जबकि सार्वजनिक सेवाओं में घटी कटौती
नई दिल्ली – संसद के एक दल के सांसदों ने हालिया बजट में एक असामान्य प्रस्ताव रखा है। वे एक अरब डॉलर के बराबर, अर्थात् लगभग ₹७,५०० करोड़, को एक निजी सभा के सुरक्षा प्रबंधों के लिये आवंटित करने की माँग कर रहे हैं। इस राशि को मूलतः आव्रजन एवं सीमा सुरक्षा (इंडियन बॉर्डर सिक्योरिटी) के लिये निर्धारित बजट में जोड़ने का इरादा बताया गया है।
प्रस्ताव का मुख्य बिंदु यह है कि संसद के प्रमुख प्रतिनिधि द्वारा आयोजित उच्चस्तरीय इवेंट, जिसमें अंतरराष्ट्रीय राजनयिक और उद्योगपति भाग ले रहे हैं, उसकी हॉल सुरक्षा को सुदृढ़ करने हेतु यह बड़ी रकम खर्च की जानी चाहिए। वहीं, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी नागरिक सेवाओं के बजट में लगातार कटौती का सामना आम नागरिकों को करना पड़ रहा है। ग्रामीण अस्पतालों में बेहोश पीड़ितों को एम्बुलेंस न मिलना, सरकारी स्कूलों में शिक्षक अभाव, और पानी・बिजली की अनियमित आपूर्ति जैसी समस्याएँ इस प्रस्ताव की आलोचना में प्रमुख हथियार बन रही हैं।
विरोधी दलों ने इस प्रस्ताव को “नाइजीरिया में क्रिमिनल कलेक्शन” का स्थानीय रूप कहा है। उनका तर्क है कि जब गरीबों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवा नहीं मिल पाती, तो आदर्शवादी वर्ग के लिये एक बड़ी सुरक्षा व्यवस्था क्यों बनानी चाहिए? इस बात पर स्तुति से अधिक व्यंग्यात्मक टिप्पणी की जा रही है कि इस प्रकार की धनराशि को सुरक्षा के नाम पर जोड़ना, आधे भारत के मध्यम वर्ग के लिये सतह पर “सुरक्षा” की उपहास है।
सामाजिक द्रष्टा इस मुद्दे को वर्गीय असमानता और नीति‑निष्पादन की विफलता का संक्षिप्त उदाहरण मानते हैं। वे बताते हैं कि जब सरकारें बड़े पैमाने पर बजट को निजी इवेंट सुरक्षा में मोड़ती हैं, तो सार्वजनिक जवाबदेही के सिद्धांत भंग होते हैं। इससे न केवल प्रशासनिक विश्वसनीयता न्यूनतम स्तर पर आती है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की जिम्मेदारी की भावना भी क्षीण होती है।
वर्तमान में इस प्रस्ताव पर संसद के कई सदस्यों द्वारा आपत्ति दर्ज कराई गई है और इसे अस्वीकृत करने की मांग की जा रही है। यदि यह प्रस्ताव पारित हो भी जाता है, तो यह बजट प्रक्रिया में एक नई बारीकी का परिचायक बन जाएगा, जहाँ नीति‑निर्माता जनता के मूलभूत अधिकारों के बजाय एलीट के निजी कार्यक्रमों को प्राथमिकता देंगे। इस परिदृश्य में जनता की निराशा, सामाजिक तनाव, तथा प्रशासनिक भरोसे में गिरावट की संभावना स्पष्ट है।
Published: May 7, 2026