स्वस्थ आयु में घटाव: ब्रिटेन की दो साल की गिरावट ने उजागर किए स्वास्थ्य‑नीति के अंतराल
एक नवीन अध्ययन ने बताया कि ब्रिटेन में स्वस्थ जीवन प्रत्याशा दो लगातार वर्षों में घट गई है, जिससे लोगों को बीमारी या विकलांगता के साथ पहले ही दशक में जीना पड़ रहा है। यह तथ्य विशेष रूप से चौंकाने वाला है, क्योंकि इस समय विश्व भर में चिकित्सा के उन्नतियों, कैंसर और मोटापे जैसे रोगों के उपचार में निरंतर प्रगति देखी जा रही है।
अध्ययन ने स्वयं‑रिपोर्टेड सर्वेक्षण पर आधारित डेटा प्रस्तुत किया है। जबकि इससे मृत्यु‑दर जैसी वस्तुनिष्ठ आँकड़े नहीं निकलते, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा को जीवन की गुणवत्ता का एक प्रमुख मानक माना जाता है। परिणाम दर्शाते हैं कि युवा वयस्कों में मानसिक स्वास्थ्य का गिरावट सबसे तेज़ी से हो रहा है, जबकि कुछ आयु वर्ग में शारीरिक स्वास्थ्य में मामूली सुधार दिखा।
निहित नतीजों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। 2028 में यदि सेवानिवृत्ति आयु 67 वर्ष निर्धारित की जाए, तो औसत नागरिक को काम से बाहर निकलने से छह साल से अधिक समय पहले ही खराब स्वास्थ्य का सामना करना पड़ेगा। इस परिप्रेक्ष्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर भार बढ़ेगा, साथ ही सामाजिक सुरक्षा के खर्च में अप्रत्याशित बढ़ोतरी का जोखिम है।
रिपोर्ट ने इस गिरावट को महामारी के कारण नहीं मानते, जिससे यह संकेत मिलता है कि मौजूदा स्वास्थ्य‑नीति में गहरीStructural समस्याएँ होंगी। यहाँ प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठता है: क्या प्रभावी रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य के लिए सुदृढ़ सेवाएँ, तथा जीवन‑शैली के सुधार हेतु स्पष्ट रणनीति मौजूद है? यदि नहीं, तो यही उदासीनता नागरिकों को बेमेल रोग‑बोझ में धकेल रही है।
भारत में भी स्वास्थ्य‑सेवा के समान चुनौतियाँ स्पष्ट रूप से झलक रही हैं। बढ़ती आयु वर्गीय एंट्रेंस, शहरी‑ग्रामीण असमानता, और युवा वर्ग में तनाव‑निर्माण वाले वातावरण के कारण स्वस्थ जीवन प्रत्याशा में गिरावट का खतरा मौजूद है। इस संदर्भ में, ब्रिटेन की गिरावट को एक चेतावनी संकेत के रूप में लेना चाहिए, न कि सिर्फ़ एक दूरस्थ आँकड़ा।
व्याकरणिक बहानों और सतही पहलुओं पर राजनीति चलाना अब अस्वीकार्य हो चुका है। प्रशासन को चाहिए कि वह बगैर बहाने के, ठोस नीतियों के साथ इस बेताबी को समाप्त करे: सम्पूर्ण स्वास्थ्य‑डेटा की सटीक निगरानी, मानसिक स्वास्थ्य के लिए विशेष बजट, तथा जीवनशैली‑परिवर्तन के लिए जनसंचार रणनीतियाँ। तभी एक स्वस्थ, उत्पादक और आर्थिक रूप से सुदृढ़ नागरिक वर्ग की कल्पना संभव होगी।
Published: May 3, 2026