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Category: समाज

स्व-घोषित विशेषज्ञों की जोखिमपूर्ण शिशु‑नींद सलाह पर स्वास्थ्य मंत्रालय की असहयोगी प्रतिक्रिया

एक गुप्त फिल्मांकन ने दिखाया कि कई ‘स्व-घोषित विशेषज्ञ’ सोशल मीडिया पर माता‑पिताओं को ऐसी नींद विधियाँ सुझा रहे हैं, जो चिकित्सकीय मानकों के बिल्कुल उलट हैं। धीरे‑धीरे-धुरी, पेट के ऊपर या साइड‑पोज़ जैसी असुरक्षित स्थितियों को ‘सुरक्षित’ बताकर उन्होंने शिशु में घातक श्वसन‑रहित स्थिति (SIDS) और असहनीय क्षति के जोखिम को बढ़ा दिया।

शिक्षित बाल रोग विशेषज्ञों ने स्पष्ट कर दिया कि ऐसी सलाह न केवल वैज्ञानिक रूप से असंस्कृत है, बल्कि मृत्यु का कारण बन सकती है। उन्होंने बताया कि शिशु को हमेशा पीठ के बल लेटना, एकसमान सख़्त परदा और कोई ढीले कपड़े न होना, मौलिक सुरक्षा उपाय हैं।

समस्या केवल गलत जानकारी तक सीमित नहीं है; यह सामाजिक असमानताओं को भी उजागर करती है। इंटरनेट और सोशल‑मीडिया के फ़ायदे‑नुकसान को समझते हुए, मध्यम‑आय वाले परिवार अक्सर सस्ते ऑनलाइन सलाह को भरोसा देते हैं, जबकि वास्तविक बाल रोग विशेषज्ञों तक पहुँच महँगी या दूरी से बाहर हो सकती है। यह सूचना‑अधिनियम का एक मुखर उदाहरण है जहाँ विज्ञापन के लुभावने शीर्षक के नीचे वैज्ञानिक आधार नहीं होता।

सरकारी प्रतिक्रिया, हालांकि शीघ्र थी, परन्तु असामान्य रूप से सतही रही। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक व्यापक चेतावनी जारी की, जिसमें ऐसे ‘अन्यायी सलाहकारों’ को रोकने की बात कही गई, परन्तु नियामक तंत्र में स्पष्ट कार्यवाही, दंड या कंटेंट मॉडरेशन की योजना प्रकाशन की कमी रही। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने विज्ञापन मानकों को सख़त करने की बात कही, परंतु सोशल‑मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की स्व-नियामक शक्ति अभी भी व्यर्थ है।

यह घटना प्रशासनिक अक्षम्यता का एक ठोस प्रमाण है: जहाँ सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खतरा है, वहाँ नीति‑क्रियान्वयन में सुस्ती बरकरार है। जोखिमपूर्ण सलाह को ‘इन्फ्लुएंसर’ की तरह प्रस्तुत करने वाले डिजिटल मंचों पर अब तक कोई ठोस बाध्यकारी उपाय नहीं दिखा।

सुखद भविष्य के लिए दो सटीक कदम आवश्यक हैं—पहला, बाल स्वास्थ्य सम्बंधी सूचना को प्रमाण‑आधारित प्लेटफ़ॉर्म पर केंद्रित करना और इसके लिये सरकारी‑निजी साझेदारी बनाना; दूसरा, डिजिटल विज्ञापन नियमन को सशक्त बनाना, जिससे लाइक‑संख्या प्रमाण नहीं, बल्कि चिकित्सकीय अनुमोदन मानक बन सके। तभी शिशु‑नींद की सुरक्षा के नाम पर खोई हुई जानों को बचाया जा सकेगा।

Published: May 5, 2026